छत्तीसगढ़ संवाददाता
दंतेवाड़ा, 6 सितंबर। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में कृषि विभाग, निर्माण एनजीओ, भूमगादी एवं अन्य समन्वित विभागों द्वारा जिले के चारो विकासखंड के 220 ग्रामों में जैविक कृषक खेत पाठशाला प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजन किया जा रहा है।
इस कृषक खेत पाठशाला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस प्रशिक्षण में किसानों को कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं होती बल्कि उनके ही गांव में जो किसान भाई बहुत अच्छे से विधि या अन्य तकनीक से उन्नत जैविक खेती कर रहे हैं, उनके खेतों में ही इस पाठशाला प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी कृषक मित्र, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, जैविक कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील कृषक, जैविक कार्यकर्ता, कृषि सखी, पशु सखी भाग ले रहे है।
कृषक खेत पाठशाला का आयोजन तीन चरणों में किया जा रहा है। पहले पहले चरण में बुवाई रोपाई तथा निंदाई के समय खेती में विशेष सावधानियां बरतने के बारे में कृषकों को जानकारी दी जाती है। फिर उन्हें जैविक खाद, जैविक दवा के बनाने तथा उसके उपयोग के बारे में प्रायोगिक जानकारी से अवगत कराया जाता है। दूसरे चरण में पौधे की ग्रोथ अवस्था में उपयुक्त जैविक खाद या जैविक दवा के उपयोग एवं तृतीय और अंतिम चरण में फसल कटाई के अवसर पर सावधानियां को भी विस्तार पूर्वक बताया जाता है। ताकि उपज का अधिकतम मूल्य उन्हें प्राप्त हो। इसके अलावा सभी प्रकार की उन्नत खेती के तकनीक के बारे में भी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विस्तार से चर्चा की जाती है और सबसे बड़ी बात तो यह है इस पाठशाला के अन्तर्गत अन्य किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में ही समझाइश दिया जाता है, जिससे सभी को आसानी से समझ में आ जाए और अंत में सभी कृषकों से शपथ दिलाई जाती है कि वह अपने खेतों में भी आने वाले वर्षों में इस पद्धति का उपयोग कर अपने खेत का उत्पादन को बढ़ाएंगे।
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दंतेवाड़ा, 6 सितंबर। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में कृषि विभाग, निर्माण एनजीओ, भूमगादी एवं अन्य समन्वित विभागों द्वारा जिले के चारो विकासखंड के 220 ग्रामों में जैविक कृषक खेत पाठशाला प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजन किया जा रहा है।
इस कृषक खेत पाठशाला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस प्रशिक्षण में किसानों को कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं होती बल्कि उनके ही गांव में जो किसान भाई बहुत अच्छे से विधि या अन्य तकनीक से उन्नत जैविक खेती कर रहे हैं, उनके खेतों में ही इस पाठशाला प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी कृषक मित्र, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, जैविक कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील कृषक, जैविक कार्यकर्ता, कृषि सखी, पशु सखी भाग ले रहे है।
कृषक खेत पाठशाला का आयोजन तीन चरणों में किया जा रहा है। पहले पहले चरण में बुवाई रोपाई तथा निंदाई के समय खेती में विशेष सावधानियां बरतने के बारे में कृषकों को जानकारी दी जाती है। फिर उन्हें जैविक खाद, जैविक दवा के बनाने तथा उसके उपयोग के बारे में प्रायोगिक जानकारी से अवगत कराया जाता है। दूसरे चरण में पौधे की ग्रोथ अवस्था में उपयुक्त जैविक खाद या जैविक दवा के उपयोग एवं तृतीय और अंतिम चरण में फसल कटाई के अवसर पर सावधानियां को भी विस्तार पूर्वक बताया जाता है। ताकि उपज का अधिकतम मूल्य उन्हें प्राप्त हो। इसके अलावा सभी प्रकार की उन्नत खेती के तकनीक के बारे में भी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विस्तार से चर्चा की जाती है और सबसे बड़ी बात तो यह है इस पाठशाला के अन्तर्गत अन्य किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में ही समझाइश दिया जाता है, जिससे सभी को आसानी से समझ में आ जाए और अंत में सभी कृषकों से शपथ दिलाई जाती है कि वह अपने खेतों में भी आने वाले वर्षों में इस पद्धति का उपयोग कर अपने खेत का उत्पादन को बढ़ाएंगे।