हाथ नहीं करते काम तो पांव से लिखकर दी परीक्षा, सपना है IAS बनना
हाथ नहीं करते काम तो पांव से लिखकर दी परीक्षा, सपना है IAS बनना
जगदलपुर। ‘हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मानव की अदम्य दृढ़ता और कभी हार ना मानने वाले भाव को समेटे इस कविता को चरितार्थ कर दिखाया है, बस्तर की आदिवासी बेटी राखी नाग ने। सोमवार को राखी नौंवी कक्षा की परीक्षा देते हुए नानगुर के स्वामी आत्मानंद विद्यालय में मिली। राखी विलक्षण है। जन्म से ही दिव्यांग होने के बाद भी उसकी शिक्षा के प्रति ऐसी ललक है कि जन्म से ही उसके हाथ काम नहीं करते हैं, तो उसने पांव से लिखना शुरू कर दिया।







