फूंडहार व जोरा समेत शासकीय स्कूलों में तोड़फोड़ की घटनाएं

फूंडहार व जोरा समेत शासकीय स्कूलों में तोड़फोड़ की घटनाएं

फूंडहार व जोरा समेत शासकीय स्कूलों में तोड़फोड़ की घटनाएं

रायपुर: शहर के शासकीय स्कूलों में हाल के महीनों में एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है। बारहवीं और आठवीं कक्षा के कुछ छात्र विद्यालय छोड़ने से पहले अंतिम दिनों में स्कूल परिसर में तोड़फोड़ कर रहे हैं। इस बढ़ती घटनाओं को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने अब कड़ा रुख अपनाया है।

स्पष्ट कर दिया गया है कि शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले विद्यार्थियों को तब तक स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) और अंकसूची जारी नहीं की जाएगी, जब तक क्षति की भरपाई नहीं हो जाती।

जानकारी के अनुसार कुछ विद्यार्थी परीक्षा परिणाम आने के बाद या स्कूल के अंतिम दिन, स्कूल समय से पहले या बाद में परिसर में रुक जाते हैं। इस दौरान वे तोड़फोड़ करते हैं। खासतौर पर बालक शौचालयों में अधिक नुकसान की घटनाएं सामने आई हैं। दरवाजे, नल, पार्टिशन, टाइल्स आदि तोड़े जा रहे हैं।

केवल शौचालय ही नहीं, बल्कि कक्षाओं में भी बेंच-डेस्क, ब्लैकबोर्ड, पंखे, ट्यूबलाइट और बिजली के स्विच बोर्ड को क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। इससे स्कूलों को आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही नए सत्र में पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। मरम्मत कार्य में समय और अतिरिक्त संसाधन खर्च करने पड़ रहे हैं।

फेयरवेल उपद्रव का रूप लेती जा रही

शहर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फूंडहार और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जोरा सहित अन्य विद्यालयों में भी इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि यह प्रवृत्ति धीरे-धीरे ‘फेयरवेल उपद्रव’ का रूप लेती जा रही है, जिसे समय रहते रोकना आवश्यक है। विद्यालयों की शाला विकास एवं स्कूल प्रबंधन समितियों ने संयुक्त बैठक कर इस मुद्दे पर चर्चा की।

समिति सदस्यों का कहना है कि चूंकि छात्र स्कूल छोड़कर जा रहे होते हैं, इसलिए उन्हें पकड़े जाने या अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर नहीं रहता। इसी मानसिकता का फायदा उठाकर वे शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन अब इस तरह की गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि यदि किसी विद्यार्थी द्वारा तोड़फोड़ की जाती है और उसकी पुष्टि होती है, तो संबंधित छात्र के अभिभावकों को नुकसान की भरपाई करनी होगी। जब तक क्षति की पूरी राशि जमा नहीं की जाएगी, तब तक विद्यालय की ओर से टीसी और अंकसूची जारी नहीं की जाएगी। प्रबंधन का मानना है कि अभिभावकों की जवाबदेही तय होने से इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।

यह केवल अनुशासनहीनता है

फूंडहार शाला विकास एवं प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भुवन साहू ने कहा कि शासकीय संपत्ति जनता के कर से निर्मित होती है। इसे नुकसान पहुंचाना न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी से भी मुंह मोड़ना है। उन्होंने कहा, 'तोड़फोड़ की संस्कृति को पनपने नहीं दिया जाएगा। विद्यार्थियों को यह समझना होगा कि स्कूल उनकी अपनी संस्था है। यहां की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना अपने ही भविष्य को नुकसान पहुंचाना है।'

विद्यालय प्रबंधन ने यह भी संकेत दिए हैं कि आगे से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी। साथ ही विद्यार्थियों को विदाई के अवसर पर सकारात्मक और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि उत्साह गलत दिशा में न जाए।