प्रोफेसर कल्याण प्रसाद शर्मा की पुण्यतिथि पर एकल कला प्रदर्शनी

प्रोफेसर कल्याण प्रसाद शर्मा की पुण्यतिथि पर एकल कला प्रदर्शनी

प्रोफेसर कल्याण प्रसाद शर्मा की पुण्यतिथि पर एकल कला प्रदर्शनी

रायपुर । प्रोफेसर कल्याण प्रसाद शर्मा संस्थापक महाकौशल कला परिषद की पुण्यतिथि पर 13 जून 2024 को उनके बनाए हुए चित्रों की एकल कला प्रदर्शनी का आयोजन महाकौशल कला परिषद के फेसबुक आईडी पर आयोजित है । प्रोफेसर शर्मा ने 18 जुलाई 1959 को महाकौशल कला परिषद की स्थापना रायपुर में की और यह संस्था तब से अब तक निरंतर कला आयोजनों के लिए जानी जाती है । देश के नामचीन कलाकारों ने इस कला वीथिका में शिरकत की है और उनकी कला के दस्तावेज महाकौशल कला परिषद द्वारा संचालित महाकौशल कला वीथिका में संग्रहित हैं।

इस संग्रह में देश के जाने-माने कलाकारों की रचनाएं संग्रहित हैं ,जो समय--समय पर दर्शकों के अवलोकनार्थ प्रदर्शित की जाती है । प्रोफेसर शर्मा ने एक ओर जहां महाकौशल कला परिषद की स्थापना की वहीं कलाकारों को मंच देने के लिए उनकी कला के प्रदर्शन के लिए महाकौशल कला वीथिका की भी स्थापना की। इस कला वीथिका में देश के लब्ध प्रतिष्ठित कलाकारों ,युवा कलाकारों एवं बाल कलाकारों की एकल, युगल ,समूह ,राजकीय एवं अखिल भारतीय कला प्रदर्शनी का आयोजन निरंतरता से जारी है। प्रोफेसर शर्मा ने महाकौशल कला परिषद के द्वारा राजकीय कला प्रदर्शनी का आयोजन रायपुर में महाकौशल कला वीथिका में किया। आयोजन सन 1961 से प्रारंभ हुआ और आज तक निरंतर जारी है ।

कला एवं कलाकारों को मंच देने के लिए समर्पित यह संस्था महाकौशल कला परिषद स्वर्गीय कल्याण प्रसाद शर्मा की जिंदगी भर की मेहनत की पूंजी है । प्रोफेसर शर्मा ने जहां एक ओर राज्य के कलाकारों के लिए मंच देने हेतु राजकीय कला प्रदर्शनी का आयोजन किया ,वहीं दूसरी ओर राज्य की कला धारा को देश की कला धारा से जोड़ने का कार्य भी अखिल भारतीय कला प्रदर्शनी के आयोजन से किया। प्रदेश की एकमात्र अशासकीय कला वीथिका थी ,जिसमें अखिल भारतीय कला प्रदर्शनी का आयोजन 60 के दशक से किया जाने लगा था। देश के प्रतिष्ठित युवा एवं बाल कलाकारों ने अपनी रचनाएं महाकौशल कला परिषद द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कला प्रदर्शनी में भेजी । पुरस्कृत हुए । बड़े सम्मान के साथ आज भी अपनी जीवनी में इसका उल्लेख करते हैं । इन आयोजनों में जहां एक और निर्णायक के रूप में देश के कला महाविद्यालयों के प्रतिष्ठित कलागुरु कलाकार, प्रतिष्ठित व्यावसायिक कलाकार ,शिल्पकार बतौर निर्णायक उपस्थित हुए । उनकी उपस्थिति ने एक ओर जहां निर्णायक महाकौशल कला परिषद में हुई । वहीं उनकी उपस्थिति ने महाकौशल ललित कला महाविद्यालय के विद्यार्थियों को भी लाभान्वित किया । छात्र इन बड़े नामचीन कलाकारों से रूबरू हुए ।

उनकी कला की बारीकियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। मनन किया और बहुत कुछ उनकी कला को देखकर सीखा। छात्रों के सहर्ष निवेदन को इन वरिष्ठ कलाकारों ने अपनी तूलिका से कार्यशाला के रूप में रचना निर्मित कर परिभाषित किया। युवा कलाकारों ने देश के नामचीन कलाकारों को प्रोफेसर शर्मा के व्दारा महाकौशल परिषद के द्वारा ही गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करते हुए महाकौशल ललित कला महाविद्यालय की स्थापना सन 1961 में रायपुर में की और मध्य प्रदेश की पांच ललित कला संस्था में एक संस्था होने का गौरव महाकौशल ललित कला संस्थान को प्राप्त था । ललित कला महाविद्यालय से प्रदेश के बहुतेरे कलाकारों का कला शिक्षण हुआ और देश में अपनी कला के माध्यम से अपना और इस महाविद्यालय का नाम बढ़ाया । प्रोफेसर शर्मा ने जीवन पर्यंत महाकौशल ललित कला महाविद्यालय के प्राचार्य का दायित्व निभाया और इस अंचल में गुरु शिष्य की ऐसी परंपरा कायम की जिसमें इस अंचल को बड़े-बड़े कलाकार दिए , जिन्होंने देश में इस प्रदेश का और अपना नाम रोशन किया । प्रोफेसर शर्मा ने एक ओर जहां महाकौशल ललित कला महाविद्यालय के साथ राजकीय कला प्रदर्शनी यों का आयोजन महाकौशल कला परिषद के द्वारा महाकौशल कला वीथिका में आयोजित किया । इससे मध्य प्रदेश के कलाकारों को अपनी रचना प्रदर्शित करने का मंच मिला और वे इस मंच से पुरस्कृत होकर सम्मानित हुए। एक ओर जहां राजकीय कला प्रदर्शनी का आयोजन निरंतरता से प्रारंभ हुआ ,जो आप तक जारी है । वहीं दूसरी ओर देश की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य भी प्रोफेसर शर्मा के द्वारा ही 60 के दशक में प्रारंभ किया गया । अखिल भारतीय कला प्रदर्शनियों का आयोजन महाकौशल कला परिषद के बैनर तले महाकौशल कला वीथिका किया गया,जो मध्य प्रदेश की एकमात्र अशासकीय कला वीथिका थी । देश के नामचीन कलाकार, युवा कलाकार एवं बाल कलाकारों ने अपनी रचनाओं को इन कला प्रदर्शनी में भेज कर भाग लिया और पुरस्कृत हुए। देश की मुख्य कला धारा से प्रदेश के कलाकार जुड़े । उन्हें बहुत कुछ इन कला प्रदर्शनी को देखने से सीखने का मौका मिला । इन अखिल भारतीय कला प्रदर्शनी में बतौर निर्णायक देश के प्रमुख चित्रकला महाविद्यालयों के प्राचार्य ,विषय विशेषज्ञ प्राध्यापक एवं व्यावसायिक कलाकार बतौर निर्णायक आमंत्रित किए जाते रहे। उन लब्ध प्रतिष्ठित निर्णायक कलाकारों के रायपुर आगमन से एक और जहां महाकौशल कला वीथिका के आयोजनों को गरिमा मिली । वहीं दूसरी ओर इन प्रतिष्ठित कलाकारों ने महाकौशल ललित कला महाविद्यालय में अपनी रचना धर्मिता से युवा कलाकारों को अभी प्रेरित किया कार्यशाला में उनके द्वारा बनाए गए चित्रों को देखकर युवा कलाकारों ने कला की बारीकियों को प्रत्यक्ष रूप से जाना देखा और अपने जीवन में उसे उतारने का प्रयास किया कला ऐसा वातावरण प्रवेश शर्मा की अथक कला साधना का ही परिणाम था कि देश की मुख्य कलाधारा से रायपुर जुड़ा रायपुर के कलाकारों को अपनी कला को प्रदर्शित करने के लिए मंच मिला ।प्रदेश के कलाकारों को रायपुर ने राजकीय आयोजनों के माध्यम से मंच दिया और पुरस्कृत किया ।वही देश के कलाकारों को भी साठ के दशक से रायपुर में अपनी कला को प्रदर्शित करने के लिए और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए एक मंच प्रोफेसर शर्मा ने महाकौशल कला परिषद के माध्यम से प्रदान किया  ।