नर्मदापुरम में शिक्षाविभाग के लाखों रुपए के गबन का मामला:ऑपरेटर को हटाया, ट्रेजरी अधिकारी ने बीईओ दफ्तर में खंगाले दस्तावेज

नर्मदापुरम के पिपरिया में स्कालरशिप, एरियर्स राशि के गबन मामले में कम्प्यूटर ऑपरेटर कमलेश अहिरवार को हटा दिया गया है। राशि गबन का मामला उजागर होने के बाद से ही बीईओ एसएल रघुवंशी ने उसे काम पर आने से मना कर दिया। मामले की जांच करने भी ट्रेजरी की टीम बीईओ ऑफिस पहुंची। जिला ट्रेजरी अधिकारी नीतेश उइके समेत तीन सदस्यीय टीम ने गड़बड़ी से संबंधी दस्तावेजों की जांच की। करीब तीन घंटे तक टीम ने दस्तावेज खंगाले। जिसमें बड़ी राशि के भुगतान के बिल चेक किए। 1लाख, 5 व 10 लाख भुगतान वाले खाते देखे। जिनमें नाम, सरनेम, पति, पत्नी या बच्चें के ज्वाइंट होने गड़बड़ी थी। जांच में क्लियर हो गया कि राशि का सही खाते में भुगतान हुआ, लेकिन नाम, सरनेम या पति-पत्नी, बच्चों का ज्वाइंट खाता होने से वो संदेही के श्रेणी में शामिल हुए। स्कालरशिप व एरियर्स राशि से जुड़ा मामला है। जिसमें 2018 से अब तक हुए भुगतान संबंधी दस्तावेज ट्रेजरी टीम जांच में देखेंगी। जिसमें समय लगेगा। जिला ट्रेजरी अधिकारी उइके ने बीईओ को निर्देंश दिए कि 2018 से अब तक हुए बिलों भुगतान के एक-एक दस्तावेज लाकर जांच कराएं। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी पिपरिया डीडीओ कोड से छात्रों के स्कालरशिप और शिक्षकों एरियर्स की राशि को दूसरों के खातों में भुगतान कराया गया है। इस गड़बड़ी को कोष एवं लेखा विभाग के कोषालयीन सर्वर आईएफएमआईसी IFMIC ने पकड़ा है। आयुक्त कोष एवं लेखा विभाग भोपाल ने नर्मदापुरम जिला कोषालय अधिकारी को पत्र लिख इस मामले की जांच करने के आदेश दिए। जिला कोषालय अधिकारी नितेश कुमार उईके ने स्टेट बैंक के 11 और अन्य बैंकों के 12 कुल 23ग्राहकों के खातों को होल्ड कराया है। साथ ही इन बैंक खातों से हुए लेनदेन का स्टेटमेंट और बीईओ पिपरिया से भुगतान के संबंधित दस्तावेज, केसबुक, वेंडर फाइल मांगी है। जिसकी जांच ट्रेजरी टीम कर रही है। मामले में बीईओ कार्यालय के वित्तीय शाखा देखने वाले क्लर्क और कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका पर संदेह है। जिनके हाथों में ही ये सारा लेनदेन और दस्तावेज तैयार करने का जिम्मा रहता है। बीईओ रघुवंशी ने बताया प्रथम दृष्टया कम्प्यूटर ऑपरेटर कमलेश अहिरवार के दफ्तर आने पर रोक लगवा दी है। उन्हें हटा दिया है। जांच के बाद सारा मामला क्लियर होगा। जांच में 5,6 लाख रुपए के गबन का मामला सामने आने की संभावना है। तहसील, जनपद और पुलिस विभाग में सामने आ चुके गबन के मामले जिले में सरकारी योजना से जुड़े मामले में रुपए के गबन का मामला पहले भी सामने आ चुका है। पिछले डेढ़ साल में डोलरिया तहसील, जनपद पंचायत सिवनी मालवा और एसपी दफ्तर में वित्तीय कार्य की शाखा देखने वाले क्लर्क ने ही लाखों रुपए का गबन किया। जहां क्लर्क और लेखापाल ने अपनी पत्नी, बच्चों और रिश्तेदारों के खातों में सरकारी योजनाओं और एरियर्स राशि का भुगतान कराया। इन तीनों ही मामलों में क्लर्क और लेखापाल पर केस दर्ज हुए। जिनके केस कोर्ट में विचाराधीन है।

नर्मदापुरम में शिक्षाविभाग के लाखों रुपए के गबन का मामला:ऑपरेटर को हटाया, ट्रेजरी अधिकारी ने बीईओ दफ्तर में खंगाले दस्तावेज
नर्मदापुरम के पिपरिया में स्कालरशिप, एरियर्स राशि के गबन मामले में कम्प्यूटर ऑपरेटर कमलेश अहिरवार को हटा दिया गया है। राशि गबन का मामला उजागर होने के बाद से ही बीईओ एसएल रघुवंशी ने उसे काम पर आने से मना कर दिया। मामले की जांच करने भी ट्रेजरी की टीम बीईओ ऑफिस पहुंची। जिला ट्रेजरी अधिकारी नीतेश उइके समेत तीन सदस्यीय टीम ने गड़बड़ी से संबंधी दस्तावेजों की जांच की। करीब तीन घंटे तक टीम ने दस्तावेज खंगाले। जिसमें बड़ी राशि के भुगतान के बिल चेक किए। 1लाख, 5 व 10 लाख भुगतान वाले खाते देखे। जिनमें नाम, सरनेम, पति, पत्नी या बच्चें के ज्वाइंट होने गड़बड़ी थी। जांच में क्लियर हो गया कि राशि का सही खाते में भुगतान हुआ, लेकिन नाम, सरनेम या पति-पत्नी, बच्चों का ज्वाइंट खाता होने से वो संदेही के श्रेणी में शामिल हुए। स्कालरशिप व एरियर्स राशि से जुड़ा मामला है। जिसमें 2018 से अब तक हुए भुगतान संबंधी दस्तावेज ट्रेजरी टीम जांच में देखेंगी। जिसमें समय लगेगा। जिला ट्रेजरी अधिकारी उइके ने बीईओ को निर्देंश दिए कि 2018 से अब तक हुए बिलों भुगतान के एक-एक दस्तावेज लाकर जांच कराएं। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी पिपरिया डीडीओ कोड से छात्रों के स्कालरशिप और शिक्षकों एरियर्स की राशि को दूसरों के खातों में भुगतान कराया गया है। इस गड़बड़ी को कोष एवं लेखा विभाग के कोषालयीन सर्वर आईएफएमआईसी IFMIC ने पकड़ा है। आयुक्त कोष एवं लेखा विभाग भोपाल ने नर्मदापुरम जिला कोषालय अधिकारी को पत्र लिख इस मामले की जांच करने के आदेश दिए। जिला कोषालय अधिकारी नितेश कुमार उईके ने स्टेट बैंक के 11 और अन्य बैंकों के 12 कुल 23ग्राहकों के खातों को होल्ड कराया है। साथ ही इन बैंक खातों से हुए लेनदेन का स्टेटमेंट और बीईओ पिपरिया से भुगतान के संबंधित दस्तावेज, केसबुक, वेंडर फाइल मांगी है। जिसकी जांच ट्रेजरी टीम कर रही है। मामले में बीईओ कार्यालय के वित्तीय शाखा देखने वाले क्लर्क और कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका पर संदेह है। जिनके हाथों में ही ये सारा लेनदेन और दस्तावेज तैयार करने का जिम्मा रहता है। बीईओ रघुवंशी ने बताया प्रथम दृष्टया कम्प्यूटर ऑपरेटर कमलेश अहिरवार के दफ्तर आने पर रोक लगवा दी है। उन्हें हटा दिया है। जांच के बाद सारा मामला क्लियर होगा। जांच में 5,6 लाख रुपए के गबन का मामला सामने आने की संभावना है। तहसील, जनपद और पुलिस विभाग में सामने आ चुके गबन के मामले जिले में सरकारी योजना से जुड़े मामले में रुपए के गबन का मामला पहले भी सामने आ चुका है। पिछले डेढ़ साल में डोलरिया तहसील, जनपद पंचायत सिवनी मालवा और एसपी दफ्तर में वित्तीय कार्य की शाखा देखने वाले क्लर्क ने ही लाखों रुपए का गबन किया। जहां क्लर्क और लेखापाल ने अपनी पत्नी, बच्चों और रिश्तेदारों के खातों में सरकारी योजनाओं और एरियर्स राशि का भुगतान कराया। इन तीनों ही मामलों में क्लर्क और लेखापाल पर केस दर्ज हुए। जिनके केस कोर्ट में विचाराधीन है।