दो बार बिकी, यौन शोषण झेला:जान बचाने भागी तो 6 साल का बेटा बिछड़ा; बेटी के साथ रेस्क्यू सेंटर में बीत रही जिंदगी
दो बार बिकी, यौन शोषण झेला:जान बचाने भागी तो 6 साल का बेटा बिछड़ा; बेटी के साथ रेस्क्यू सेंटर में बीत रही जिंदगी
33 वर्षीय महिला को उसके पति ने ही 40 हजार रुपए में बेच दिया। बेटा-बेटी को भी नहीं अपनाया। खरीदार ने उससे शादी की, फिर सालभर साथ रखने के बाद तीसरे शख्स को 70 हजार में बेच डाला। तीसरे शख्स ने शादी नहीं की। मारपीट कर यौन शोषण करता रहा। कई दिनों तक यातना झेलने के बाद महिला ने कैद से निकलने की ठान ली। बेटा-बेटी को साथ लिया और छिपते-छिपाते भोपाल पहुंच गई। यहां एक आदमी ने मदद का वादा किया। उस पर भरोसा कर महिला बच्चों के साथ उसके पास रहने आ गई। लगा कि अब जिंदगी में थोड़ा सुधार आएगा। लेकिन वही कहानी फिर दोहराई जाने लगी। चौथा शख्स मारता-पीटता, शोषण करता। बच्चों को परेशान करता था। महिला फिर भागी लेकिन इस बार 6 साल का बेटा कहीं छूट गया। वह 13 साल की बेटी को लेकर इंदौर आ गई। बड़ा गणपति इलाके में मां-बेटी भीख मांगकर गुजारा करने लगीं। इसी साल 28 फरवरी को एक सामाजिक संस्था ने दोनों को रेस्क्यू किया। परदेशीपुरा के पुनर्वास केंद्र पहुंचाया। पुनर्वास केंद्र की टीम को महिला को सदमे से उबारने में लंबा समय लग गया। वह अभी भी डिप्रेशन से पूरी तरह बाहर नहीं आ पाई है। हालांकि, यहां रहकर बच्ची मेहंदी लगाना, पेंटिंग करना सीख चुकी है। सुरक्षा का भरोसा दिलाने में काफी समय लग गया
सामाजिक संस्था 'प्रवेश' की टीम ने महिला और उसकी बेटी को रेस्क्यू किया था। दोनों काफी सहमे हुए थे। महिला तो टीम के पुरुषों को देखते ही घबराकर दूर भागने लगी। टीम समझा-बुझाकर दोनों को पुनर्वास केंद्र लाई। यहां दोनों से कई बार पूछताछ की कोशिश की गई लेकिन महिला डिप्रेशन में थी। वह सिर्फ इधर-उधर देखती रहती थी। बुंदेलखंडी में जो कुछ बोलती थी, अस्पष्ट था। बच्ची की हालत भी लगभग ऐसी ही थी। एक हफ्ते तक दोनों से कुछ खास पता नहीं चल सका। अन्य महिलाओं के साथ रहकर वह थोड़ी सहज हुई। ऑब्जर्व करने पर पता चला कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है। बच्ची से पूछा तो उसने बताया कि पिता मां, उसे और छोटे भाई को खूब मारते-पीटते थे। उन्होंने मां को बेच दिया था। इस पर टीम ने महिला का मेडिकल चेकअप कराया। इसमें शारीरिक शोषण का खुलासा हुआ। हालांकि, बच्ची के साथ कुछ गलत नहीं पाया गया। परिजन ने टीकमगढ़ में की थी शादी
'प्रवेश' की फाउंडर रुपाली जैन के मुताबिक, महिला से अब तक यही पता चला है कि वह छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के पास किसी गांव की रहने वाली है। परिवार गरीब है। 14-15 साल पहले परिजन ने उसकी शादी टीकमगढ़ में की थी। कुछ समय बाद पति परिवार से अलग होकर महिला के साथ दूसरे मकान में रहने लगा। पति छुटपुट काम करता था। रोज शराब पीकर आता और पिटाई करता था। उसने महिला को भी काम पर लगा दिया और उसके रुपए से भी जमकर शराब पीने लगा। इस बीच एक बच्ची हुई, फिर एक बेटा हुआ। पति नहीं सुधरा। वह जरा-जरा सी बात पर तीनों को पीटता था। पहले 40 हजार, फिर 70 हजार में सौदा
धीरे-धीरे पति ने कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया। वह शराब के लिए महिला से रुपए की मांग करने लगा। पत्नी ने विरोध किया तो उसने टीकमगढ़ के ही एक व्यक्ति को 40 हजार रुपए में बेच दिया। यह व्यक्ति भी खूब शराब पीता था। उसने महिला और उसके दोनों बच्चों पर काफी सख्ती की। दूसरे पति से महिला को एक और बेटा हुआ। इसके बाद उसने महिला और उसके पहले पति के दोनों बच्चों को साथ रखने से मना कर दिया। महिला को भोपाल में तीसरे व्यक्ति को 70 हजार रुपए में बेच दिया। मदद करने के नाम पर किया शोषण
तीसरे व्यक्ति ने भी महिला और बच्चों पर अत्याचार करने शुरू कर दिए। वह भी शराबी था। एक दिन महिला मौका पाकर अपने बच्चों के साथ घर से निकल गई और भोपाल रेलवे स्टेशन तक पहुंची। यहां उसे कय्यूम मिला। बोला, 'मैं तुम्हारी मदद करता हूं। कोई भी तुम्हारे साथ मारपीट नहीं करेगा।' कय्यूम महिला को अपने साथ ले गया। वह अकेला रहता था। उसने महिला का शारीरिक शोषण शुरू कर दिया। विरोध करने पर पीटता था। कुछ दिनों बाद महिला इससे परेशान हो गई। दोनों बच्चों को लेकर घर से निकलकर स्टेशन तक पहुंची। यहां भीड़भाड़ और ट्रेन में चढ़ने की आपाधापी में 6 साल का बेटा मां-बहन से बिछड़ गया। भोपाल रेलवे स्टेशन पर महिला और उसकी बेटी इंदौर की ट्रेन में बैठ गईं। यहां आकर बड़ा गणपति इलाके में भीख मांगने लगीं। थाने गई तो पुलिस ने भगा दिया
रुपाली के मुताबिक, महिला और बच्ची दोनों पढ़े-लिखे नहीं हैं। पुनर्वास केंद्र में बच्ची को मेहंदी लगाना, पेंटिंग की ट्रेनिंग दी गई है। बच्ची ने बताया कि वह पढ़ना चाहती है। अगले साल उसका स्कूल में एडमिशन कराया जाएगा। दैनिक भास्कर ने महिला और बच्ची से बात की। महिला बातचीत से घबराती रही। उसने जिस भाषा में सवालों के जवाब दिए, वह समझ नहीं आई। कई बार पूछताछ में उसने अपनी भाषा में आपबीती सुनाई। यह भी बताया कि एक-दो बार थाने भी गई तो पुलिस ने उसे भगा दिया। ये खबर भी पढ़ें... गैंगरेप पीड़िता का पति बोला-जिंदगी नर्क बन गई रीवा में गैंगरेप पीड़िता के पति का कहना है कि पांच माह पहले ही परिवार की मर्जी से हमने लव मैरिज की थी। शादी के पहले मैंने ससुराल वालों से वादा किया था कि चाहे कुछ भी हो जाए आपकी बेटी को हमेशा खुश रखूंगा। अब बस यही सोचता हूं कि मैं ससुराल वालों से कैसे नजर मिला पाऊंगा, क्यों मैं अपना वादा नहीं निभा पाया। जिंदगी नर्क बन गई है। पढ़ें पूरी खबर..
33 वर्षीय महिला को उसके पति ने ही 40 हजार रुपए में बेच दिया। बेटा-बेटी को भी नहीं अपनाया। खरीदार ने उससे शादी की, फिर सालभर साथ रखने के बाद तीसरे शख्स को 70 हजार में बेच डाला। तीसरे शख्स ने शादी नहीं की। मारपीट कर यौन शोषण करता रहा। कई दिनों तक यातना झेलने के बाद महिला ने कैद से निकलने की ठान ली। बेटा-बेटी को साथ लिया और छिपते-छिपाते भोपाल पहुंच गई। यहां एक आदमी ने मदद का वादा किया। उस पर भरोसा कर महिला बच्चों के साथ उसके पास रहने आ गई। लगा कि अब जिंदगी में थोड़ा सुधार आएगा। लेकिन वही कहानी फिर दोहराई जाने लगी। चौथा शख्स मारता-पीटता, शोषण करता। बच्चों को परेशान करता था। महिला फिर भागी लेकिन इस बार 6 साल का बेटा कहीं छूट गया। वह 13 साल की बेटी को लेकर इंदौर आ गई। बड़ा गणपति इलाके में मां-बेटी भीख मांगकर गुजारा करने लगीं। इसी साल 28 फरवरी को एक सामाजिक संस्था ने दोनों को रेस्क्यू किया। परदेशीपुरा के पुनर्वास केंद्र पहुंचाया। पुनर्वास केंद्र की टीम को महिला को सदमे से उबारने में लंबा समय लग गया। वह अभी भी डिप्रेशन से पूरी तरह बाहर नहीं आ पाई है। हालांकि, यहां रहकर बच्ची मेहंदी लगाना, पेंटिंग करना सीख चुकी है। सुरक्षा का भरोसा दिलाने में काफी समय लग गया
सामाजिक संस्था 'प्रवेश' की टीम ने महिला और उसकी बेटी को रेस्क्यू किया था। दोनों काफी सहमे हुए थे। महिला तो टीम के पुरुषों को देखते ही घबराकर दूर भागने लगी। टीम समझा-बुझाकर दोनों को पुनर्वास केंद्र लाई। यहां दोनों से कई बार पूछताछ की कोशिश की गई लेकिन महिला डिप्रेशन में थी। वह सिर्फ इधर-उधर देखती रहती थी। बुंदेलखंडी में जो कुछ बोलती थी, अस्पष्ट था। बच्ची की हालत भी लगभग ऐसी ही थी। एक हफ्ते तक दोनों से कुछ खास पता नहीं चल सका। अन्य महिलाओं के साथ रहकर वह थोड़ी सहज हुई। ऑब्जर्व करने पर पता चला कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है। बच्ची से पूछा तो उसने बताया कि पिता मां, उसे और छोटे भाई को खूब मारते-पीटते थे। उन्होंने मां को बेच दिया था। इस पर टीम ने महिला का मेडिकल चेकअप कराया। इसमें शारीरिक शोषण का खुलासा हुआ। हालांकि, बच्ची के साथ कुछ गलत नहीं पाया गया। परिजन ने टीकमगढ़ में की थी शादी
'प्रवेश' की फाउंडर रुपाली जैन के मुताबिक, महिला से अब तक यही पता चला है कि वह छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के पास किसी गांव की रहने वाली है। परिवार गरीब है। 14-15 साल पहले परिजन ने उसकी शादी टीकमगढ़ में की थी। कुछ समय बाद पति परिवार से अलग होकर महिला के साथ दूसरे मकान में रहने लगा। पति छुटपुट काम करता था। रोज शराब पीकर आता और पिटाई करता था। उसने महिला को भी काम पर लगा दिया और उसके रुपए से भी जमकर शराब पीने लगा। इस बीच एक बच्ची हुई, फिर एक बेटा हुआ। पति नहीं सुधरा। वह जरा-जरा सी बात पर तीनों को पीटता था। पहले 40 हजार, फिर 70 हजार में सौदा
धीरे-धीरे पति ने कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया। वह शराब के लिए महिला से रुपए की मांग करने लगा। पत्नी ने विरोध किया तो उसने टीकमगढ़ के ही एक व्यक्ति को 40 हजार रुपए में बेच दिया। यह व्यक्ति भी खूब शराब पीता था। उसने महिला और उसके दोनों बच्चों पर काफी सख्ती की। दूसरे पति से महिला को एक और बेटा हुआ। इसके बाद उसने महिला और उसके पहले पति के दोनों बच्चों को साथ रखने से मना कर दिया। महिला को भोपाल में तीसरे व्यक्ति को 70 हजार रुपए में बेच दिया। मदद करने के नाम पर किया शोषण
तीसरे व्यक्ति ने भी महिला और बच्चों पर अत्याचार करने शुरू कर दिए। वह भी शराबी था। एक दिन महिला मौका पाकर अपने बच्चों के साथ घर से निकल गई और भोपाल रेलवे स्टेशन तक पहुंची। यहां उसे कय्यूम मिला। बोला, 'मैं तुम्हारी मदद करता हूं। कोई भी तुम्हारे साथ मारपीट नहीं करेगा।' कय्यूम महिला को अपने साथ ले गया। वह अकेला रहता था। उसने महिला का शारीरिक शोषण शुरू कर दिया। विरोध करने पर पीटता था। कुछ दिनों बाद महिला इससे परेशान हो गई। दोनों बच्चों को लेकर घर से निकलकर स्टेशन तक पहुंची। यहां भीड़भाड़ और ट्रेन में चढ़ने की आपाधापी में 6 साल का बेटा मां-बहन से बिछड़ गया। भोपाल रेलवे स्टेशन पर महिला और उसकी बेटी इंदौर की ट्रेन में बैठ गईं। यहां आकर बड़ा गणपति इलाके में भीख मांगने लगीं। थाने गई तो पुलिस ने भगा दिया
रुपाली के मुताबिक, महिला और बच्ची दोनों पढ़े-लिखे नहीं हैं। पुनर्वास केंद्र में बच्ची को मेहंदी लगाना, पेंटिंग की ट्रेनिंग दी गई है। बच्ची ने बताया कि वह पढ़ना चाहती है। अगले साल उसका स्कूल में एडमिशन कराया जाएगा। दैनिक भास्कर ने महिला और बच्ची से बात की। महिला बातचीत से घबराती रही। उसने जिस भाषा में सवालों के जवाब दिए, वह समझ नहीं आई। कई बार पूछताछ में उसने अपनी भाषा में आपबीती सुनाई। यह भी बताया कि एक-दो बार थाने भी गई तो पुलिस ने उसे भगा दिया। ये खबर भी पढ़ें... गैंगरेप पीड़िता का पति बोला-जिंदगी नर्क बन गई रीवा में गैंगरेप पीड़िता के पति का कहना है कि पांच माह पहले ही परिवार की मर्जी से हमने लव मैरिज की थी। शादी के पहले मैंने ससुराल वालों से वादा किया था कि चाहे कुछ भी हो जाए आपकी बेटी को हमेशा खुश रखूंगा। अब बस यही सोचता हूं कि मैं ससुराल वालों से कैसे नजर मिला पाऊंगा, क्यों मैं अपना वादा नहीं निभा पाया। जिंदगी नर्क बन गई है। पढ़ें पूरी खबर..