सागर में तापमान गिरा, 9.7 डिग्री रिकॉर्ड:सुबह से छाया रहा कोहरा, शीतलहर चलने से ठिठुरे लोग, स्कूलों की छुट्‌टी

सागर में कभी बादल तो कभी धूप खिल रही है, जिससे दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। शुक्रवार सुबह से सागर में बादल छाए रहे तो वहीं, घना कोहरा भी रहा। बर्फीली हवा ने ठिठुरन बढ़ा दी। अचानक बदले मौसम और सर्द हवा चलने से 24 घंटों में सागर में न्यूनतम तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 23.8 डिग्री और न्यूनतम पारा 9.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तापमान में गिरावट को देखते हुए सागर में शुक्रवार को कक्षा नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के स्कूलों की छुट्‌टी घोषित की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम में परिवर्तन आया है। आगामी दो दिनों तक मौसम ऐसा ही बना रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 18 जनवरी से अगले पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने की संभावना जताई है। यह उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित करेगा। इसका असर हिमालय की तरफ भी रहेगा। जिससे बर्फीली हवा की रफ्तार बढ़ जाएगी, जो मध्यप्रदेश में भी आकर ठिठुरन बढ़ा देगी। जनवरी के आखिरी सप्ताह में भी इस बार ठंड का असर देखने मिल सकता है। शीतलहर से बचाओ के लिए एडवाइजरी जारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता तिमोरी ने शीत लहर से बचाओ के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने बताया कि शीत ऋतु में वातावरण का तापमान अत्याधिक कम होने (शीतलहर) के कारण मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव वृद्वजनों, गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति और 5 साल के छोटे बच्चों पर अधिक होता है। शीत लहर के दौरान विशेष सतर्कता बरतना चाहिए। शीत लहर के प्रभाव जैसे सर्दी, जुकाम, बुखार, निमोनिया, त्वचा रोग, फेफड़ों में संक्रमण, हाईपेथर्मिया, अस्थमा, एलर्जी होने की आशंका बढ़ जाती है। यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो स्थिति गंभीर भी हो सकती है। प्रभावों से पूर्व बचाव के लिए समयानुसार उचित कार्रवाई की जाने की स्थिति में प्राकृतिक विपदा का सामना किया जा सकता है। ऐसे में शीतलहर से बचाओ के लिए शरीर को सूखा रखें। शरीर में गर्माहट बनाएं रखने के लिए सिर, गर्दन, कान, नाक, हाथ, पैर की उगलियों को पर्याप्त रूप से ढक कर रखें। टोपी, हेड, मफलर, जल रोधी जूतों को उपयोग करें। स्वास्थ्य वर्धक गर्म भोजन का सेवन करें। शीत प्रकृति के भोजन से दूर रहें। रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करने विटामिन सी से भरपूर ताजे फल खाएं। गर्म तरल पदार्थों का नियमित रूप से सेवन करें। बुजुर्ग, नवजात शिशुओं और बच्चों का अधिक ध्यान रखें। पिछले चार दिनों का तापमान

सागर में तापमान गिरा, 9.7 डिग्री रिकॉर्ड:सुबह से छाया रहा कोहरा, शीतलहर चलने से ठिठुरे लोग, स्कूलों की छुट्‌टी
सागर में कभी बादल तो कभी धूप खिल रही है, जिससे दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। शुक्रवार सुबह से सागर में बादल छाए रहे तो वहीं, घना कोहरा भी रहा। बर्फीली हवा ने ठिठुरन बढ़ा दी। अचानक बदले मौसम और सर्द हवा चलने से 24 घंटों में सागर में न्यूनतम तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 23.8 डिग्री और न्यूनतम पारा 9.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तापमान में गिरावट को देखते हुए सागर में शुक्रवार को कक्षा नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के स्कूलों की छुट्‌टी घोषित की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम में परिवर्तन आया है। आगामी दो दिनों तक मौसम ऐसा ही बना रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 18 जनवरी से अगले पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने की संभावना जताई है। यह उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित करेगा। इसका असर हिमालय की तरफ भी रहेगा। जिससे बर्फीली हवा की रफ्तार बढ़ जाएगी, जो मध्यप्रदेश में भी आकर ठिठुरन बढ़ा देगी। जनवरी के आखिरी सप्ताह में भी इस बार ठंड का असर देखने मिल सकता है। शीतलहर से बचाओ के लिए एडवाइजरी जारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता तिमोरी ने शीत लहर से बचाओ के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने बताया कि शीत ऋतु में वातावरण का तापमान अत्याधिक कम होने (शीतलहर) के कारण मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव वृद्वजनों, गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति और 5 साल के छोटे बच्चों पर अधिक होता है। शीत लहर के दौरान विशेष सतर्कता बरतना चाहिए। शीत लहर के प्रभाव जैसे सर्दी, जुकाम, बुखार, निमोनिया, त्वचा रोग, फेफड़ों में संक्रमण, हाईपेथर्मिया, अस्थमा, एलर्जी होने की आशंका बढ़ जाती है। यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो स्थिति गंभीर भी हो सकती है। प्रभावों से पूर्व बचाव के लिए समयानुसार उचित कार्रवाई की जाने की स्थिति में प्राकृतिक विपदा का सामना किया जा सकता है। ऐसे में शीतलहर से बचाओ के लिए शरीर को सूखा रखें। शरीर में गर्माहट बनाएं रखने के लिए सिर, गर्दन, कान, नाक, हाथ, पैर की उगलियों को पर्याप्त रूप से ढक कर रखें। टोपी, हेड, मफलर, जल रोधी जूतों को उपयोग करें। स्वास्थ्य वर्धक गर्म भोजन का सेवन करें। शीत प्रकृति के भोजन से दूर रहें। रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करने विटामिन सी से भरपूर ताजे फल खाएं। गर्म तरल पदार्थों का नियमित रूप से सेवन करें। बुजुर्ग, नवजात शिशुओं और बच्चों का अधिक ध्यान रखें। पिछले चार दिनों का तापमान