दबोह के पंडरी में जंगली जानवर के पगमार्ग मिले:चार दिन से ग्रामीण दहशत में, खेत पर जाने में भी डर रहे

भिंड के दबोह क्षेत्र के पंड़री और कसल गांव में चार दिनों से जंगली जानवर होने की दहशत बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए की मौजूदगी के स्पष्ट सबूत हैं, लेकिन वन विभाग इसे हायना बताकर पल्ला झाड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने आज (शुक्रवार) खेतों में तेंदुए की गुर्राहट सुनी, जिससे दहशत और बढ़ गई। फसलों की रखवाली के लिए खेत पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। फसल खराब हो रही है। उन्होंने बताया कि हम हथियारों, लाठी-डंडों के साथ खुद की सुरक्षा कर रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने खेतों में तेंदुए के पैरों के निशान देखे और प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है। वन विभाग पर गुमराह करने का आरोप गांव के रामकिशोर सिंह ने आरोप लगाया कि वन विभाग तेंदुए की बजाय हायना के फुटप्रिंटस होने की बात कह रहा है। इससे पहले भी वन विभाग ने इसे हायना बताकर अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया था। ग्रामीणों ने वन विभाग के सर्च ऑपरेशन पर भी सवाल उठाए और कहा कि उनकी टीम सही जांच नहीं कर रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव से सुरक्षा की गुहार लगाई। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर वन विभाग ने छह सदस्यीय टीम को फिर से मौके पर भेजा है, जो अब तेंदुए के होने या न होने की पड़ताल करेगी। चार पहले दो ग्रामीण हुए थे घायल चार दिन पहले इस जंगली जानवर ने दो ग्रामीणों को घायल कर दिया था। इसके बावजूद वन विभाग की लापरवाही से ग्रामीणों में आक्रोश है। रेंजर बसंत शर्मा का कहना है ग्रामीणों की शिकायतें आ रही लेकिन देखा किसी ने नहीं। पूरे क्षेत्र की सर्चिंग करवा ली गई है। जंगली जानवर है जो गांव के नजदीक से चला गया। अब सिर्फ अफवाह है।

दबोह के पंडरी में जंगली जानवर के पगमार्ग मिले:चार दिन से ग्रामीण दहशत में, खेत पर जाने में भी डर रहे
भिंड के दबोह क्षेत्र के पंड़री और कसल गांव में चार दिनों से जंगली जानवर होने की दहशत बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए की मौजूदगी के स्पष्ट सबूत हैं, लेकिन वन विभाग इसे हायना बताकर पल्ला झाड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने आज (शुक्रवार) खेतों में तेंदुए की गुर्राहट सुनी, जिससे दहशत और बढ़ गई। फसलों की रखवाली के लिए खेत पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। फसल खराब हो रही है। उन्होंने बताया कि हम हथियारों, लाठी-डंडों के साथ खुद की सुरक्षा कर रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने खेतों में तेंदुए के पैरों के निशान देखे और प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है। वन विभाग पर गुमराह करने का आरोप गांव के रामकिशोर सिंह ने आरोप लगाया कि वन विभाग तेंदुए की बजाय हायना के फुटप्रिंटस होने की बात कह रहा है। इससे पहले भी वन विभाग ने इसे हायना बताकर अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया था। ग्रामीणों ने वन विभाग के सर्च ऑपरेशन पर भी सवाल उठाए और कहा कि उनकी टीम सही जांच नहीं कर रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव से सुरक्षा की गुहार लगाई। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर वन विभाग ने छह सदस्यीय टीम को फिर से मौके पर भेजा है, जो अब तेंदुए के होने या न होने की पड़ताल करेगी। चार पहले दो ग्रामीण हुए थे घायल चार दिन पहले इस जंगली जानवर ने दो ग्रामीणों को घायल कर दिया था। इसके बावजूद वन विभाग की लापरवाही से ग्रामीणों में आक्रोश है। रेंजर बसंत शर्मा का कहना है ग्रामीणों की शिकायतें आ रही लेकिन देखा किसी ने नहीं। पूरे क्षेत्र की सर्चिंग करवा ली गई है। जंगली जानवर है जो गांव के नजदीक से चला गया। अब सिर्फ अफवाह है।