युवा संसद में बोले वक्ता-युवा देश का असल भविष्य:अयान ने कहा-हम ऐसे देश में नहीं रहते जहां, एक तानाशाह हमारे भविष्य का फैसला करे
युवा संसद में बोले वक्ता-युवा देश का असल भविष्य:अयान ने कहा-हम ऐसे देश में नहीं रहते जहां, एक तानाशाह हमारे भविष्य का फैसला करे
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसरोवर सभागार में विकसित भारत की थीम पर बुधवार से राज्य स्तरीय युवा संसद का आयोजन किया गया है। पहले दिन सीधी विधायक रीति पाठक, विधानसभा के सचिव, राष्ट्रीय सेवा योजना के सचिव मौजूद थे। गुरुवार को दूसरे और अंतिम दिन युवा संसद में परिचर्चा का विषय है भारतीय संविधान के 75 वर्ष, अधिकार, कर्तव्य और प्रगति की यात्रा"। हर वक्ता को तीन मिनट बोलने का समय तय किया गया है। दूसरे दिन के पहले वक्ता के रूप में गौरव राठौर ने संबोधन देते हुए कहा- हमारे देश का संविधानिक विकास बहुत गौरवशाली रहा है। हमारे संविधान के अधिकार और कर्तव्य का समन्वय विकास का प्रारूप बनाते हैं। इसीलिए हर व्यक्ति को यह जानने की आवश्यकता है कि वह क्या कर सकता है। संविधान हमारी ढाल, इसकी तलवार बनना चाहता हूं
दूसरे वक्ता अयान शेख ने अंग्रेजी में संबोधन दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा- वो भारत जहां कृष्ण ने कर्म का ज्ञान दिया, कुरुक्षेत्र में धर्म का दान दिया। जहां भगत सिंह ने फांसी हंसकर पाई, भारत पर आजादी की बलि छाई। ये वो है भारत। संविधान केवल एक डॉक्यूमेंट नहीं। ये एक सुनहरा भविष्य है। संविधान हमारी ढाल जरूर है लेकिन हमें इसकी तलवार बनना चाहूंगा। हम ऐसे देश में नहीं रहते जहां एक तानाशाह हमारे भविष्य का फैसला करे
अयान ने कहा- मैं यह कहना चाहता हूं कि आज इस किताब की बदौलत है कि हम ऐसे शासन में नहीं रहते जहां एक तानाशाह हमारे भविष्य का निर्णय करता है। हम एक ऐसे शासन में रहते हैं जहां इस देश का असल भविष्य देश का युवा, लोकतंत्र के सबसे बडे़ मंदिर में बैठकर अपने भविष्य का निर्णय स्वयं कर सकता है। धन्य है वो जिन्होंने इस किताब को बनाया। जय भीम जय संविधान।
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसरोवर सभागार में विकसित भारत की थीम पर बुधवार से राज्य स्तरीय युवा संसद का आयोजन किया गया है। पहले दिन सीधी विधायक रीति पाठक, विधानसभा के सचिव, राष्ट्रीय सेवा योजना के सचिव मौजूद थे। गुरुवार को दूसरे और अंतिम दिन युवा संसद में परिचर्चा का विषय है भारतीय संविधान के 75 वर्ष, अधिकार, कर्तव्य और प्रगति की यात्रा"। हर वक्ता को तीन मिनट बोलने का समय तय किया गया है। दूसरे दिन के पहले वक्ता के रूप में गौरव राठौर ने संबोधन देते हुए कहा- हमारे देश का संविधानिक विकास बहुत गौरवशाली रहा है। हमारे संविधान के अधिकार और कर्तव्य का समन्वय विकास का प्रारूप बनाते हैं। इसीलिए हर व्यक्ति को यह जानने की आवश्यकता है कि वह क्या कर सकता है। संविधान हमारी ढाल, इसकी तलवार बनना चाहता हूं
दूसरे वक्ता अयान शेख ने अंग्रेजी में संबोधन दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा- वो भारत जहां कृष्ण ने कर्म का ज्ञान दिया, कुरुक्षेत्र में धर्म का दान दिया। जहां भगत सिंह ने फांसी हंसकर पाई, भारत पर आजादी की बलि छाई। ये वो है भारत। संविधान केवल एक डॉक्यूमेंट नहीं। ये एक सुनहरा भविष्य है। संविधान हमारी ढाल जरूर है लेकिन हमें इसकी तलवार बनना चाहूंगा। हम ऐसे देश में नहीं रहते जहां एक तानाशाह हमारे भविष्य का फैसला करे
अयान ने कहा- मैं यह कहना चाहता हूं कि आज इस किताब की बदौलत है कि हम ऐसे शासन में नहीं रहते जहां एक तानाशाह हमारे भविष्य का निर्णय करता है। हम एक ऐसे शासन में रहते हैं जहां इस देश का असल भविष्य देश का युवा, लोकतंत्र के सबसे बडे़ मंदिर में बैठकर अपने भविष्य का निर्णय स्वयं कर सकता है। धन्य है वो जिन्होंने इस किताब को बनाया। जय भीम जय संविधान।