मूंग सिंचाई के लिए नहर संचालन का होगा काम:हरदा में बिना अनुमति और राशि जमा किए पंप चलाने पर होगी कार्रवाई

जल संसाधन विभाग हरदा के कार्यपालन यंत्री डीके सिंह ने ग्रीष्मकालीन मूंग सिंचाई के लिए नहर संचालन का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। इसके तहत माचक उपनहर 9 अप्रैल सुबह 6 बजे से 10 अप्रैल शाम 6 बजे तक बंद रहेगी। रेवापुर सोनतलाई उपनहर 10 अप्रैल शाम 6 बजे से 12 अप्रैल सुबह 6 बजे तक बंद रहेगी। फिर माचक उपनहर 12 अप्रैल सुबह 6 बजे से 13 अप्रैल शाम 6 बजे तक बंद रहेगी। रेवापुर और सोनतलाई उपनहर 13 अप्रैल शाम 6 बजे से 15 अप्रैल सुबह 6 बजे तक बंद रहेंगी। माचक उपनहर फिर से 15 अप्रैल सुबह 6 बजे से 16 अप्रैल शाम 6 बजे तक बंद रहेगी। डिफॉल्टर किसानों के बंद होंगे पंप विभाग ने किसानों को सख्त निर्देश दिए हैं। बिना अनुमति और अग्रिम राशि जमा किए सिंचाई पंप नहीं चलाया जा सकेगा। ट्रैक्टर चलित और 10 एचपी से अधिक क्षमता के पंप पर प्रतिबंध रहेगा। सिंचाई राजस्व जमा न करने वाले डिफॉल्टर किसानों के सायफन या पंप बंद कर दिए जाएंगे। कार्यपालन यंत्री के अनुसार, पानी की उपलब्धता और आवश्यकता के आधार पर बड़ी उपशाखाओं के ओसराबंदी कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है।

मूंग सिंचाई के लिए नहर संचालन का होगा काम:हरदा में बिना अनुमति और राशि जमा किए पंप चलाने पर होगी कार्रवाई
जल संसाधन विभाग हरदा के कार्यपालन यंत्री डीके सिंह ने ग्रीष्मकालीन मूंग सिंचाई के लिए नहर संचालन का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। इसके तहत माचक उपनहर 9 अप्रैल सुबह 6 बजे से 10 अप्रैल शाम 6 बजे तक बंद रहेगी। रेवापुर सोनतलाई उपनहर 10 अप्रैल शाम 6 बजे से 12 अप्रैल सुबह 6 बजे तक बंद रहेगी। फिर माचक उपनहर 12 अप्रैल सुबह 6 बजे से 13 अप्रैल शाम 6 बजे तक बंद रहेगी। रेवापुर और सोनतलाई उपनहर 13 अप्रैल शाम 6 बजे से 15 अप्रैल सुबह 6 बजे तक बंद रहेंगी। माचक उपनहर फिर से 15 अप्रैल सुबह 6 बजे से 16 अप्रैल शाम 6 बजे तक बंद रहेगी। डिफॉल्टर किसानों के बंद होंगे पंप विभाग ने किसानों को सख्त निर्देश दिए हैं। बिना अनुमति और अग्रिम राशि जमा किए सिंचाई पंप नहीं चलाया जा सकेगा। ट्रैक्टर चलित और 10 एचपी से अधिक क्षमता के पंप पर प्रतिबंध रहेगा। सिंचाई राजस्व जमा न करने वाले डिफॉल्टर किसानों के सायफन या पंप बंद कर दिए जाएंगे। कार्यपालन यंत्री के अनुसार, पानी की उपलब्धता और आवश्यकता के आधार पर बड़ी उपशाखाओं के ओसराबंदी कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है।