गुड फ्राइडे पर जबलपुर में निकली क्रूस यात्रा:होली ट्रिनिटी चर्च से शुरू होकर शहरभर से गुजरी यात्रा, ईसाइयों ने की प्रार्थना

जबलपुर के चर्चों में आज गुड फ्राइडे परंपरागत रूप से मनाया गया। यह दिन प्रार्थना, तपस्या और उपवास का माना जाता है। सवा दो हजार साल पहले इसी दिन यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। गुड फ्राइडे का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम 'वे ऑफ द क्रॉस' के तहत दुखमयी क्रूस यात्रा निकाली गई। यह यात्रा होली ट्रिनिटी चर्च से शुरू हुई। यात्रा रसल चौक, नोदरा ब्रिज, तीन पत्ती और पुराना बस स्टैंड होते हुए भंवरताल गार्डन स्थित होली ट्रिनिटी चर्च में समाप्त हुई। यात्रा में शामिल ईसाई समाज के लोगों ने पूरे मार्ग में यीशु का स्तुति-गान किया। चर्च में ईसा मसीह के साथ हुए विश्वासघात, उनकी गिरफ्तारी, मुकदमे और सूली पर चढ़ाए जाने की कथाएं सुनाई गईं। ईसाई समुदाय के अनुसार, प्रभु ईसा मसीह ने लोगों के पाप मिटाने के लिए अपना बलिदान दिया था। इस दिन को 'गुड' इसलिए कहा जाता है क्योंकि ईसाइयों के लिए इसका विशेष धार्मिक महत्व है। वे मानते हैं कि सूली पर यीशु की मृत्यु मानवता के पापों के लिए अंतिम बलिदान थी। यह बलिदान प्रेम और मुक्ति का प्रतीक है। यह शुक्रवार ईस्टर पर यीशु के पुनरागमन का संकेत भी है, जो ईसाई धर्म में सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

गुड फ्राइडे पर जबलपुर में निकली क्रूस यात्रा:होली ट्रिनिटी चर्च से शुरू होकर शहरभर से गुजरी यात्रा, ईसाइयों ने की प्रार्थना
जबलपुर के चर्चों में आज गुड फ्राइडे परंपरागत रूप से मनाया गया। यह दिन प्रार्थना, तपस्या और उपवास का माना जाता है। सवा दो हजार साल पहले इसी दिन यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। गुड फ्राइडे का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम 'वे ऑफ द क्रॉस' के तहत दुखमयी क्रूस यात्रा निकाली गई। यह यात्रा होली ट्रिनिटी चर्च से शुरू हुई। यात्रा रसल चौक, नोदरा ब्रिज, तीन पत्ती और पुराना बस स्टैंड होते हुए भंवरताल गार्डन स्थित होली ट्रिनिटी चर्च में समाप्त हुई। यात्रा में शामिल ईसाई समाज के लोगों ने पूरे मार्ग में यीशु का स्तुति-गान किया। चर्च में ईसा मसीह के साथ हुए विश्वासघात, उनकी गिरफ्तारी, मुकदमे और सूली पर चढ़ाए जाने की कथाएं सुनाई गईं। ईसाई समुदाय के अनुसार, प्रभु ईसा मसीह ने लोगों के पाप मिटाने के लिए अपना बलिदान दिया था। इस दिन को 'गुड' इसलिए कहा जाता है क्योंकि ईसाइयों के लिए इसका विशेष धार्मिक महत्व है। वे मानते हैं कि सूली पर यीशु की मृत्यु मानवता के पापों के लिए अंतिम बलिदान थी। यह बलिदान प्रेम और मुक्ति का प्रतीक है। यह शुक्रवार ईस्टर पर यीशु के पुनरागमन का संकेत भी है, जो ईसाई धर्म में सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।