राजभवन में मना बिहार, ओडिशा, गुजरात, सिक्किम और तेलंगाना का स्थापना दिवस

छत्तीसगढ़ संवाददाता रायपुर, 9 जुलाई।राजभवन में आज बिहार, ओडिशा, गुजरात, तेलंगाना और सिक्किम राज्यों का स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने कहा कि विभिन्न राज्यों की भाषा, संस्कृति, परंपराओं और प्रथाओं के ज्ञान और समझ से भारत की एकता और अखंडता मजबूत होगी। इस अवसर पर उडिय़ा समाज के प्रतिनिधि, विधायक पुरंदर मिश्रा, गुजराती समाज की प्रतिनिधि श्रीमती चार्मी दावड़ा, बिहारी समाज के प्रतिनिधि आचार्य रेमेन्द्र नाथ मिश्र और तेलंगाना समाज के प्रतिनिधि जी. स्वामी ने अपने-अपने समाज की गतिविधियों और छत्तीसगढ़ के विकास में समाज की भूमिका पर प्रकाश डाला। इन राज्यों के लोकनृत्यों की रंगारंग प्रस्तृति दी। जिसमें ओडिशा का डालखाई नृत्य, बिहार का कजरी लोकनृत्य, गुजरात का गरबा, तेलंगाना का लंबाडी पिल्ला और सिक्किम के लोकनृत्य ने सभी का मन मोह लिया। बिहारी समाज के प्रतिनिधि और इतिहासकार आचार्य रेमेन्द्र नाथ मिश्र ने राज्यपाल को इस विशेष अवसर पर ऐतिहासिक ताम्र पत्र की अनुकृति भेंट की साथ ही गुजराती समाज के लोगो ने पारंपरिक वस्त्र भेंट किया।

राजभवन में मना बिहार, ओडिशा, गुजरात, सिक्किम और तेलंगाना का स्थापना दिवस
छत्तीसगढ़ संवाददाता रायपुर, 9 जुलाई।राजभवन में आज बिहार, ओडिशा, गुजरात, तेलंगाना और सिक्किम राज्यों का स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने कहा कि विभिन्न राज्यों की भाषा, संस्कृति, परंपराओं और प्रथाओं के ज्ञान और समझ से भारत की एकता और अखंडता मजबूत होगी। इस अवसर पर उडिय़ा समाज के प्रतिनिधि, विधायक पुरंदर मिश्रा, गुजराती समाज की प्रतिनिधि श्रीमती चार्मी दावड़ा, बिहारी समाज के प्रतिनिधि आचार्य रेमेन्द्र नाथ मिश्र और तेलंगाना समाज के प्रतिनिधि जी. स्वामी ने अपने-अपने समाज की गतिविधियों और छत्तीसगढ़ के विकास में समाज की भूमिका पर प्रकाश डाला। इन राज्यों के लोकनृत्यों की रंगारंग प्रस्तृति दी। जिसमें ओडिशा का डालखाई नृत्य, बिहार का कजरी लोकनृत्य, गुजरात का गरबा, तेलंगाना का लंबाडी पिल्ला और सिक्किम के लोकनृत्य ने सभी का मन मोह लिया। बिहारी समाज के प्रतिनिधि और इतिहासकार आचार्य रेमेन्द्र नाथ मिश्र ने राज्यपाल को इस विशेष अवसर पर ऐतिहासिक ताम्र पत्र की अनुकृति भेंट की साथ ही गुजराती समाज के लोगो ने पारंपरिक वस्त्र भेंट किया।