वन भूमि में पट्टा लेने लगातार अवैध कटाई

396 परिपक्व ठूंठ, वनरक्षक पर गिरी गाज, अफसर सुरक्षित छत्तीसगढ़ संवाददाता पिथौरा, 30 अगस्त। क्षेत्र में वन विभाग की अनदेखी से गांवों के आसपास के जंगल लगातार कटते जा रहे हंै। दूसरी ओर बहुतायत में जंगल काट कर कब्जा करने के जिम्मेदार जिले के वन अधिकारी तक होने चाहिए, परन्तु जिला स्तरीय अफसर मात्र अपने एक वनरक्षक को ही निलंबित कर पूरे मामले का पटाक्षेप करने जुटा है। ज्ञात हो कि विगत दिनों सांकरा उपवन परिक्षेत्र के लोहरिन डोंगरी में ग्रामीणों द्वारा मंदिर बनाने के नाम से कई एकड़ वन भूमि से छोटे बड़े पेड़ पौधे कटने की बात प्रमाणित होने पर उच्च अधिकारियों ने स्वयं को बचाने एक वनरक्षक को निलंबित कर दिया। ग्रामीण सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिथौरा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत सांकरा उप वनपरिक्षेत्र के ग्राम लोहरीनडोंगरी, कंचनपुर , धरमपुर, पीपरौद एवं माटीदरहा के जंगलों में पेड़ो की अंधाधुंध कटाई विगत माह भर से जारी है। जिससे जंगल में हरे-भरे पेड़ पैधों की संख्या में लगातार समाप्त होती जा रही है। पेड़ों की कटाई के कारण वनों का क्षेत्रफल भी कम होते जा रहा है। यहाँ अतिक्रमणकारियों द्वारा वन अधिकार पट्टा पाने के लालच में अनगिनत पेड़ों की कटाई की गई, लेकिन वन विभाग के आलाधिकारियों ने जंगल कटने से रोकने के लिए कोई पहल करने की बजाय यह कहते रहे कि ग्रामीणों ने संसद एवं विधायक को उक्त वन भूमि दिलाने के लिए आवेदन दिया है, इसलिए कार्रवाई नहीं की जा रही है। लिहाजा जंगलों की कटाई आज भी जारी है। राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर स्थित ग्राम लोहरीन डोंगरी के जंगल कक्ष क्र. 257 में हाल ही में हजारों पेड़ काटे गए लेकिन वन विभाग द्वारा अब - तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। लिहाजा आज भी कटाई जारी है। इसी तरह ग्राम कंचनपुर, धरमपुर, पीपरौद एवं माटीदरहा के जंगलों में हजारों पेड़ काट डाले गए। कार्रवाई नहीं होने से विभाग के उच्च अधिकारी भी अब संदेह के दायरे में है। पौधरोपण में करोड़ों खर्च, नतीजा सिफर क्षेत्र में वन भूमि पर कैम्पा मद से प्रतिवर्ष करोड़ों रूपये पौधरोपण के नाम से खर्च किये जाते हंै। रोपण का कार्य पूरी तरह राजनीतिक माहौल में किया जाता है। हरियाली बचाने अतिथि तरह- तरह के व्याख्यान देते हैं। परन्तु हालात यह है कि हरियाली बचना तो दूरी उस स्थान पर पुन: दो-चार साल बाद पौधारोपण की योजना बन जाती है और पुन: करोड़ों रूपये की सरकारी स्वीकृति भी मिल जाती है। वनरक्षक निलंबित, अतिक्रमित भूमि पर खेती लोहरीनडोंगरी कक्ष क्र. 259 के जिस जंगल में अवैध कटाई के आरोप में एक वन रक्षक को निलंबित कर मामला समाप्त किया गया था। अब उसी पेड़ पौधे मुक्त वन भूमि पर ग्रामीण दलहन-तिलहन की खेती भी करने लगे हैं, परन्तु वन विभाग मौन है। शुक्रवार दोपहर साढ़े 12 बजे लिखे जाने तक फसल को नष्ट कर अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। 5 ग्रामीणों के विरुद्ध ग्राम बिजेमाल जंगल कक्ष क्र. 259 के जंगल में हुए अवैध कटाई पर वन विभाग ने कार्रवाई की है। यहां 396 बड़े पेड़ के ठंूठ की गिनती की गई। जिसमें 5 ग्रामीणों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। उक्त कटाई मामले में मात्र एक वन रक्षक सोहन यादव को ही दोषी मानते हुए उसे निलंबित कर दिया गया, जबकि सैकड़ों हरे भरे मिश्रित प्रजाति के पेड़ों को काटने पर उच्च अधिकारियों तक कार्रवाई की जानी थी, परंतु स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए उच्च अधिकारियों ने मात्र एक वनरक्षक को निलंबित कर मामला समाप्त कर दिया। पता लगाता हूं- प्रभारी रेंजर इस मामले में परिक्षेत्र के प्रभारी रेंजर टी आर सिन्हा ने छत्तीसगढ़ को बताया कि वे नए आये हैं, उनके कार्यकाल का मामला नही हंै। उक्त सम्बन्ध में मंगलवार को सवित्रिपुर में उन्होंने ग्रामीणों की बैठक ले कर समझाइश दी है। यहां यह बता देना लाजिमी होगा कि पिथौरा परिक्षेत्र में आसपास परिक्षेत्र में रेंजर होते हुए भी लगातार डिप्टी रेंजरो को प्रभारी रेंजर के पद पर पदस्थ किया जा रहा है जिससे जंगलों की अवैध कटाई लगातार जारी है।

वन भूमि में पट्टा लेने लगातार अवैध कटाई
396 परिपक्व ठूंठ, वनरक्षक पर गिरी गाज, अफसर सुरक्षित छत्तीसगढ़ संवाददाता पिथौरा, 30 अगस्त। क्षेत्र में वन विभाग की अनदेखी से गांवों के आसपास के जंगल लगातार कटते जा रहे हंै। दूसरी ओर बहुतायत में जंगल काट कर कब्जा करने के जिम्मेदार जिले के वन अधिकारी तक होने चाहिए, परन्तु जिला स्तरीय अफसर मात्र अपने एक वनरक्षक को ही निलंबित कर पूरे मामले का पटाक्षेप करने जुटा है। ज्ञात हो कि विगत दिनों सांकरा उपवन परिक्षेत्र के लोहरिन डोंगरी में ग्रामीणों द्वारा मंदिर बनाने के नाम से कई एकड़ वन भूमि से छोटे बड़े पेड़ पौधे कटने की बात प्रमाणित होने पर उच्च अधिकारियों ने स्वयं को बचाने एक वनरक्षक को निलंबित कर दिया। ग्रामीण सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिथौरा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत सांकरा उप वनपरिक्षेत्र के ग्राम लोहरीनडोंगरी, कंचनपुर , धरमपुर, पीपरौद एवं माटीदरहा के जंगलों में पेड़ो की अंधाधुंध कटाई विगत माह भर से जारी है। जिससे जंगल में हरे-भरे पेड़ पैधों की संख्या में लगातार समाप्त होती जा रही है। पेड़ों की कटाई के कारण वनों का क्षेत्रफल भी कम होते जा रहा है। यहाँ अतिक्रमणकारियों द्वारा वन अधिकार पट्टा पाने के लालच में अनगिनत पेड़ों की कटाई की गई, लेकिन वन विभाग के आलाधिकारियों ने जंगल कटने से रोकने के लिए कोई पहल करने की बजाय यह कहते रहे कि ग्रामीणों ने संसद एवं विधायक को उक्त वन भूमि दिलाने के लिए आवेदन दिया है, इसलिए कार्रवाई नहीं की जा रही है। लिहाजा जंगलों की कटाई आज भी जारी है। राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर स्थित ग्राम लोहरीन डोंगरी के जंगल कक्ष क्र. 257 में हाल ही में हजारों पेड़ काटे गए लेकिन वन विभाग द्वारा अब - तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। लिहाजा आज भी कटाई जारी है। इसी तरह ग्राम कंचनपुर, धरमपुर, पीपरौद एवं माटीदरहा के जंगलों में हजारों पेड़ काट डाले गए। कार्रवाई नहीं होने से विभाग के उच्च अधिकारी भी अब संदेह के दायरे में है। पौधरोपण में करोड़ों खर्च, नतीजा सिफर क्षेत्र में वन भूमि पर कैम्पा मद से प्रतिवर्ष करोड़ों रूपये पौधरोपण के नाम से खर्च किये जाते हंै। रोपण का कार्य पूरी तरह राजनीतिक माहौल में किया जाता है। हरियाली बचाने अतिथि तरह- तरह के व्याख्यान देते हैं। परन्तु हालात यह है कि हरियाली बचना तो दूरी उस स्थान पर पुन: दो-चार साल बाद पौधारोपण की योजना बन जाती है और पुन: करोड़ों रूपये की सरकारी स्वीकृति भी मिल जाती है। वनरक्षक निलंबित, अतिक्रमित भूमि पर खेती लोहरीनडोंगरी कक्ष क्र. 259 के जिस जंगल में अवैध कटाई के आरोप में एक वन रक्षक को निलंबित कर मामला समाप्त किया गया था। अब उसी पेड़ पौधे मुक्त वन भूमि पर ग्रामीण दलहन-तिलहन की खेती भी करने लगे हैं, परन्तु वन विभाग मौन है। शुक्रवार दोपहर साढ़े 12 बजे लिखे जाने तक फसल को नष्ट कर अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। 5 ग्रामीणों के विरुद्ध ग्राम बिजेमाल जंगल कक्ष क्र. 259 के जंगल में हुए अवैध कटाई पर वन विभाग ने कार्रवाई की है। यहां 396 बड़े पेड़ के ठंूठ की गिनती की गई। जिसमें 5 ग्रामीणों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। उक्त कटाई मामले में मात्र एक वन रक्षक सोहन यादव को ही दोषी मानते हुए उसे निलंबित कर दिया गया, जबकि सैकड़ों हरे भरे मिश्रित प्रजाति के पेड़ों को काटने पर उच्च अधिकारियों तक कार्रवाई की जानी थी, परंतु स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए उच्च अधिकारियों ने मात्र एक वनरक्षक को निलंबित कर मामला समाप्त कर दिया। पता लगाता हूं- प्रभारी रेंजर इस मामले में परिक्षेत्र के प्रभारी रेंजर टी आर सिन्हा ने छत्तीसगढ़ को बताया कि वे नए आये हैं, उनके कार्यकाल का मामला नही हंै। उक्त सम्बन्ध में मंगलवार को सवित्रिपुर में उन्होंने ग्रामीणों की बैठक ले कर समझाइश दी है। यहां यह बता देना लाजिमी होगा कि पिथौरा परिक्षेत्र में आसपास परिक्षेत्र में रेंजर होते हुए भी लगातार डिप्टी रेंजरो को प्रभारी रेंजर के पद पर पदस्थ किया जा रहा है जिससे जंगलों की अवैध कटाई लगातार जारी है।