हाई कोर्ट ने जेल प्रहरी की बर्खास्तगी रद्द की

हाई कोर्ट ने जेल प्रहरी की बर्खास्तगी रद्द की

हाई कोर्ट ने जेल प्रहरी की बर्खास्तगी रद्द की

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में रायपुर केंद्रीय जेल के प्रहरी लखनलाल जायसवाल की बर्खास्तगी को निरस्त करते हुए उनकी तत्काल सेवा बहाली के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट वीडियो के आधार पर किसी कर्मचारी को दंडित करना न्यायसंगत नहीं है।

मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच ने की। कोर्ट ने 31 दिसंबर 2024 और 6 अगस्त 2025 को जारी बर्खास्तगी आदेशों को रद्द कर दिया।
विभागीय जांच में पाई गई गंभीर खामियां

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संदीप दुबे ने दलील दी कि विभागीय जांच में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। वीडियो फुटेज को साक्ष्य अधिनियम के तहत प्रमाणित नहीं किया गया और न ही अस्पताल के किसी कर्मचारी का बयान दर्ज किया गया।

कोर्ट ने पाया कि आरोप पत्र में समय और स्थान का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। डॉक्टरों द्वारा सुझाए गए मेडिकल परीक्षणों की रिपोर्ट में देरी को भी गलत तरीके से प्रहरी की लापरवाही माना गया। वीडियो की सत्यता जांचने की वैधानिक प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।
क्या था मामला?

2 अगस्त 2024 को प्रहरी लखनलाल जायसवाल को कैदी रोशन चंद्रकर को चिकित्सा जांच के लिए अंबेडकर अस्पताल ले जाने की जिम्मेदारी दी गई थी। वापसी के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनके आधार पर जेल प्रशासन ने आरोप लगाया कि प्रहरी कैदी के परिजनों के साथ फाफाडीह स्थित एक रेस्तरां में गया और जानबूझकर वापसी में देरी की।

इन आरोपों के आधार पर प्रहरी को बर्खास्त कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि केवल अप्रमाणित वीडियो के आधार पर दी गई सजा कानूनन टिकाऊ नहीं है।