अनुपूरक मांग के दूसरे बैच के बजाय एलपीजी संकट पर चर्चा करे सरकार: विपक्ष
अनुपूरक मांग के दूसरे बैच के बजाय एलपीजी संकट पर चर्चा करे सरकार: विपक्ष
नयी दिल्ली। लोकसभा में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने "अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच' को पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए वित्तीय अनुशासन करार दिया है जबकि विपक्ष ने कहा है कि इस समय रसोई गैस बड़ा संकट है और इससे निपटने के उपाय करने की जरूरत है।
भारतीय जनता पार्टी के जगदम्बिका पाल ने 'अनुदानों की अनुपूरक मांगों-दूसरा बैच' पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए गुरुवार को लोकसभा में कहा कि जब दुनिया पश्चिम एशिया संकट के कारण चुनौतियों से जूझ रही है तो मोदी सरकार ने 'अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच' को सदन में पेश कर संकट की स्थिति से निपटने के लिए वित्तीय प्रावधान किये हैं। उन्होंने चुनौती के समय के लिए इसे वित्तीय अनुशासन बताया और कहा कि इस बैच के जरिए सरकार ने 'आर्थिक स्थिरता निधि' की व्यवस्था करने जैसे ठोस कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पूरी दुनिया में इस समय अनिश्चितता की स्थिति बन गई है और इसकी वजह से तेल के दामाें में उछाल आया है। उनका कहना था कि इस संघर्ष का सीधा असर पूरे विश्व पर पड़ रहा है। हॉर्मूज जलडमरूमध्य मार्ग से तेल की आवाजाही रोकने के कारण यह समस्या खड़ी हुई है। ईरान के भारतीय जहाजों को आने की अनुमति देने से स्थिति भारत के लिए कुछ बेहतर हुई है।
भाजपा नेता ने अनुपूरक मांग के दूसरे बैच को आर्थिक समस्याओं का समाधान बताया और कहा कि भारत में गरीब कल्याण के लिए जो योजना कोविड काल से शुरु हुई थीं वह मोदी सरकार की दूरदर्शिता थी और उसका यह अभियान अब भी जारी है। इससे देश के गरीबों के कल्याण का काम हो रहा है और उन्हें राशन उपलब्घ कराया जा रहाहै। उनका कहना था कि कोविड के समय उठाया गया मोदी सरकार का यह कदम किसी भी स्थिति से उपजे संकट में लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए उठाया गया दूरदृष्टि वाला कदम साबित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि इस बैच से एक लाख करोड़ रुपए आर्थिक स्थिरता निधि के रूप में लिये जा रहे हैं। यह संकटकालीन बफर फंड है। श्री पाल ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उद्योगों को मजबूत करने के लिए भी इस निधि का इस्तेमाल किया जाना है और किसानों को उर्वरक के रूप में दी जाने वाली सब्सिडी में इससे बड़ा इजाफा किया जाना है। उनका कहना था कि इस बैच की निधि से 19 हजार 200 करोड़ किसानों को उर्वरक सब्सिडी के लिए दिये जाएंगे।
कांग्रेस के शफी परम्बिल ने कहा कि सरकार एजेंडे में उल्लिखित विषय की जगह अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच को लेकर सदन में आई है जबकि इस समय एलपीजी सबसे बड़ा संकट बन गया है और सरकार को इस संकट से निपटने पर ध्यान देकर इसके समाधान के लिए कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि अरब देशों में बड़ी संख्या में भारतीय फंसे हुए हैं सरकार को उनकी वापसी के लिए काम करना चाहिए लेकिन वह दूसरे काम पर लगी है। प्रधानमंत्री चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त हैं और जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी सरकार से एलपीजी संकट पर चर्चा की मांग का नोटिस देते हैं तो उनको सकारात्मक जवाब नहीं दिया जाता है और मामले को टालने का प्रयास होता है।
तृणमूल कांग्रेस के आजाद कीर्ति झा ने भी एलपीजी संकट को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर सहित देश के विभिन्न मंदिरों में भगवान का भोग तैयार होना कठिन हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल के हिस्से का पैसा सरकार नहीं दे रही है। मनरेगा का पैसा भी नहीं दिया गया है जिसके कारण गरीबों को पैसा मिलना कठिन हो गया है। उनका कहना था कि राज्य में जारी अन्य कई केंद्रीय योजनाओं के लिए जो पैसा आवंटित किया गया है वह राज्य सरकार को नहीं दिया जा रहा है।
समाजवादी पार्टी के राम शिरोमणि ने कहा कि सरकार जन समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है और युवाओं को रोजगार उपलब्ध नहीं करा पा रही है।







