भारत के लिए राहत की खबर: यूएई के OPEC छोड़ने से कच्चे तेल के दाम हो सकते हैं कम

भारत के लिए राहत की खबर: यूएई के OPEC छोड़ने से कच्चे तेल के दाम हो सकते हैं कम

भारत के लिए राहत की खबर: यूएई के OPEC छोड़ने से कच्चे तेल के दाम हो सकते हैं कम

नई दिल्ली । वैश्विक ऊर्जा बाजार और खाड़ी देशों की राजनीति में मंगलवार को उस वक्त भूचाल आ गया, जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 'ओपेक' (ओर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) से बाहर होने का ऐतिहासिक एलान कर दिया। करीब 6 दशक (1967) तक संगठन का हिस्सा रहने के बाद यूएई का यह कदम न केवल तेल की कीमतों को प्रभावित करेगा, बल्कि सऊदी अरब के दबदबे और पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर डालेगा।
सऊदी अरब से तनातनी और तेल उत्पादन का विवाद

यूएई और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से 'तेल उत्पादन कोटा' को लेकर खींचतान चल रही थी। ओपेक का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद, यूएई अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहा था क्योंकि सऊदी अरब कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उत्पादन कम रखने के पक्ष में था।

    यूएई का नया लक्ष्य: वर्तमान उत्पादन: 3.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन।
    2027 तक लक्ष्य: 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन।

ओपेक से बाहर होने के बाद अब यूएई बिना किसी पाबंदी के तेल उत्पादन बढ़ा सकेगा, जिससे सऊदी अरब का बाजार पर एकाधिकार कमजोर होना तय है।
कूटनीतिक नाराजगी का परिणाम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल आर्थिक नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक है। यूएई पिछले कुछ समय से दो प्रमुख मोर्चों पर नाराज था:

    यूएई चाहता था कि सऊदी अरब और कतर मिलकर ईरान के बढ़ते हमलों के खिलाफ सख्त सैन्य या राजनीतिक कार्रवाई करें, लेकिन खाड़ी देशों की बैठक में इस पर आम सहमति नहीं बन सकी।
    पाकिस्तान द्वारा ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिश और सऊदी अरब से उसकी बढ़ती नजदीकी यूएई को अखर रही थी। हाल ही में यूएई ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर वापस मांगकर अपने इरादे साफ कर दिए थे।

भारत के लिए 'गुड न्यूज'

    यूएई के इस स्वतंत्र फैसले का सबसे सकारात्मक असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है।
    यूएई द्वारा बाजार में ज्यादा तेल उतारने से वैश्विक कीमतों में गिरावट आने की संभावना है।
    कच्चा तेल सस्ता होने से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा और देश में महंगाई कम करने में मदद मिलेगी।

बदल जाएगा खाड़ी का नक्शा

यूएई का यह "इकोनॉमिक एग्जिट" दरअसल सऊदी-पाक गठजोड़ को कमजोर करने और खुद को वैश्विक ऊर्जा केंद्र के रूप में स्वतंत्र रूप से स्थापित करने की एक बड़ी रणनीतिक चाल है। अब दुनिया की नजरें सऊदी अरब की जवाबी कार्रवाई पर टिकी हैं।