मौत के बाद भी चल रही थी रजिस्ट्री, रायपुर में जमीन घोटाले का खुलासा
मौत के बाद भी चल रही थी रजिस्ट्री, रायपुर में जमीन घोटाले का खुलासा
रायपुर। एक मृतक के नाम से पहले जमीन की रजिस्ट्री कराई गई और बाद में उसी मृतक के वारिसों के नाम वसीयत के आधार पर नाम दर्ज करा लिया गया। मामला अभनपुर तहसील के ग्राम टेकारी स्थित खसरा नंबर 323/1, रकबा 0.360 हेक्टेयर कृषि भूमि से जुड़ा है, यहां शिकायत के बाद इस आदेश पर रोक लगा दी गई है।
नईदुनिया को मिले दस्तावेजों के अनुसार ग्राम टेकारी निवासी शारदा वर्मा की मृत्यु 23 अप्रैल 2021 को हो चुकी थी। मृत्यु प्रमाण पत्र में इसका स्पष्ट उल्लेख है। बावजूद इसके 24 जून 2025 को कथित रूप से शारदा वर्मा को विक्रेता दर्शाते हुए जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रजिस्ट्री दस्तावेजों में मृतका के पहचान दस्तावेजों का उपयोग किया गया।
वसीयत भी बनी विवाद की जड़
सूत्रों के अनुसार शारदा वर्मा ने अपने पुत्र गुलाब वर्मा के नाम वसीयत की थी। लेकिन उपलब्ध अभिलेख बताते हैं कि गुलाब वर्मा की भी मृत्यु 24 फरवरी 2024 को हो चुकी थी। नियमानुसार वसीयत में दर्ज व्यक्ति की मृत्यु के बाद स्थिति बदल जाती है और संपत्ति का बंटवारा वैधानिक वारिसों के बीच होना चाहिए। बावजूद इसके वसीयत के आधार पर नामांतरण का आवेदन प्रस्तुत हुआ और 20 नवंबर 2025 को राजस्व रिकार्ड में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
बिना नोटिस, बिना जांच नामांतरण का आरोप
भूमि से जुड़े मूल दर्जधारकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें किसी प्रकार की सूचना या नोटिस नहीं दिया गया। आपत्ति दर्ज करने का अवसर नहीं मिला। राजस्व अभिलेखों में दर्ज वैध नामों की अनदेखी की गई। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि संबंधित भूमि पूर्व से कौशल तारवानी पिता उत्तमचंद तारवानी के नाम दर्ज रही है। लेकिन बावजूद इसके अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया गया।
अन्नू तारक की भूमिका संदिग्ध
बता दें कि अन्नू तारक का नाम भारतमाला घोटाले मे भी आ चुका है। शिकायतकर्ता के अनुसार अन्नू तारक ने मृतक शारदा वर्मा की जगह अन्य को खड़ा करके उक्त जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम पर करवा ली थी। जबकि उनकी मृत्यु 23 अप्रैल 2021 में हो चुकी थी। आरोप है कि अन्नू तारक ने उक्त जमीन को कौशल तारवानी और कपिल तारवानी को बेच दी। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि आवेदन में यह तथ्य नहीं बताया गया कि वसीयत धारक की भी पहले ही मृत्यु हो चुकी है। इस तरह राजस्व अधिकारियों के समक्ष मामला सामान्य नामांतरण जैसा पेश किया गया।
अधिकारियों का क्या कहना
सृजन सोनकर, अतिरिक्त तहसीलदार, खोरपा ने कहा कि वसीयत के आधार पर प्रस्तुत आवेदन पर नियमानुसार आदेश पारित किया गया था। अब शिकायत मिलने के बाद आदेश पर रोक लगा दी गई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।







