कब्रिस्तान स्थानांतरण को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय का विरोध:सैकड़ों साल पुराने कब्रिस्तान को 2 किमी दूर शिफ्ट करने पर भड़के, आंदोलन की दी धमकी

मेंहदावल क्षेत्र के मंझरिया से बीमापार तक प्रस्तावित नए बाइपास के निर्माण में एक प्राचीन कब्रिस्तान की भूमि आ रही है, जिससे विवाद पैदा हो गया है। इमलीडीहा गांव स्थित यह कब्रिस्तान सैकड़ों वर्षों से अल्पसंख्यक समुदाय का एकमात्र दफन स्थल है। प्रशासन ने इस भूमि को दो किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन स्थानीय समुदाय ने इसका कड़ा विरोध किया है। प्रशासन ने कब्रिस्तान की भूमि को दो किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन यह प्रस्ताव स्थानीय अल्पसंख्यक समुदाय के लिए संवेदनशील मामला बन गया है। समुदाय का कहना है कि यह कब्रिस्तान उनका एकमात्र दफन स्थल है और इसे हटाना उनकी धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है। उन्होंने प्रशासन से इस निर्णय को बदलने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। कब्रिस्तान की भूमि और बाइपास मार्ग का विवरण प्रस्तावित बाइपास मार्ग मंझरिया से शुरू होकर झारखंडी मंदिर होते हुए फरदहां नहर के पास से गुजरते हुए बीमापार बीएमसीटी मार्ग को जोड़ेगा। वर्तमान कब्रिस्तान की कुल भूमि 0.101 हेक्टेयर (18 मंडी) है, जिसमें से 0.078197 हेक्टेयर भूमि इस बाइपास के मार्ग में आ रही है। प्रशासन ने इस भूमि को दो किलोमीटर दूर स्थित पोखरे के पास स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय ने इस पर कड़ा विरोध जताया है। समुदाय का प्रदर्शन और प्रशासन की प्रतिक्रिया अल्पसंख्यक समुदाय ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि पोखरे की भूमि पर स्थित वैकल्पिक कब्रिस्तान स्थल न केवल बहुत दूर है, बल्कि वहां जाने का कोई उचित रास्ता भी नहीं है। इसके अलावा, वहां बड़े पैमाने पर काश्तकारों की भूमि भी आ रही है, जिससे विवाद और बढ़ सकता है। इस मुद्दे पर मेंहदावल तहसीलदार आनंद कुमार ओझा ने कहा कि यह आरोप गलत हैं, वे केवल कब्रिस्तान की भूमि का निरीक्षण करने गए थे और वैकल्पिक स्थल की तलाशी ली जा रही है। केंद्रीय मंत्री को पत्र और प्रशासन के प्रयास इस मामले में सांसद लक्ष्मी कांत उर्फ पप्पू निषाद ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र सौंपकर कब्रिस्तान की भूमि को बचाने की अपील की थी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण करना शुरू किया। प्रशासन अब इस संवेदनशील मामले का समाधान निकालने के लिए प्रयासरत है, लेकिन यदि समुदाय की मांगें पूरी नहीं होतीं, तो यह मामला और उग्र हो सकता है।

कब्रिस्तान स्थानांतरण को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय का विरोध:सैकड़ों साल पुराने कब्रिस्तान को 2 किमी दूर शिफ्ट करने पर भड़के, आंदोलन की दी धमकी
मेंहदावल क्षेत्र के मंझरिया से बीमापार तक प्रस्तावित नए बाइपास के निर्माण में एक प्राचीन कब्रिस्तान की भूमि आ रही है, जिससे विवाद पैदा हो गया है। इमलीडीहा गांव स्थित यह कब्रिस्तान सैकड़ों वर्षों से अल्पसंख्यक समुदाय का एकमात्र दफन स्थल है। प्रशासन ने इस भूमि को दो किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन स्थानीय समुदाय ने इसका कड़ा विरोध किया है। प्रशासन ने कब्रिस्तान की भूमि को दो किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन यह प्रस्ताव स्थानीय अल्पसंख्यक समुदाय के लिए संवेदनशील मामला बन गया है। समुदाय का कहना है कि यह कब्रिस्तान उनका एकमात्र दफन स्थल है और इसे हटाना उनकी धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है। उन्होंने प्रशासन से इस निर्णय को बदलने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। कब्रिस्तान की भूमि और बाइपास मार्ग का विवरण प्रस्तावित बाइपास मार्ग मंझरिया से शुरू होकर झारखंडी मंदिर होते हुए फरदहां नहर के पास से गुजरते हुए बीमापार बीएमसीटी मार्ग को जोड़ेगा। वर्तमान कब्रिस्तान की कुल भूमि 0.101 हेक्टेयर (18 मंडी) है, जिसमें से 0.078197 हेक्टेयर भूमि इस बाइपास के मार्ग में आ रही है। प्रशासन ने इस भूमि को दो किलोमीटर दूर स्थित पोखरे के पास स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय ने इस पर कड़ा विरोध जताया है। समुदाय का प्रदर्शन और प्रशासन की प्रतिक्रिया अल्पसंख्यक समुदाय ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि पोखरे की भूमि पर स्थित वैकल्पिक कब्रिस्तान स्थल न केवल बहुत दूर है, बल्कि वहां जाने का कोई उचित रास्ता भी नहीं है। इसके अलावा, वहां बड़े पैमाने पर काश्तकारों की भूमि भी आ रही है, जिससे विवाद और बढ़ सकता है। इस मुद्दे पर मेंहदावल तहसीलदार आनंद कुमार ओझा ने कहा कि यह आरोप गलत हैं, वे केवल कब्रिस्तान की भूमि का निरीक्षण करने गए थे और वैकल्पिक स्थल की तलाशी ली जा रही है। केंद्रीय मंत्री को पत्र और प्रशासन के प्रयास इस मामले में सांसद लक्ष्मी कांत उर्फ पप्पू निषाद ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र सौंपकर कब्रिस्तान की भूमि को बचाने की अपील की थी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण करना शुरू किया। प्रशासन अब इस संवेदनशील मामले का समाधान निकालने के लिए प्रयासरत है, लेकिन यदि समुदाय की मांगें पूरी नहीं होतीं, तो यह मामला और उग्र हो सकता है।