जबलपुर में कथावाचक देविका पटेल को कथा करने से रोका:गैर ब्राह्मण होने पर कर रहे थे विरोध; पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया

जबलपुर पुलिस ने कथावाचक देविका पटेल की शिकायत पर रैपुरा गांव में रहने वाले सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। कथावाचक ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया था कि गांव के कुछ लोग उन्हें कथा करने से सिर्फ इसलिए रोक रहे थे, कि वह ब्राहम्ण नहीं है। मामले की जानकारी मिलते ही पनागर थाना पुलिस ने रैपुरा गांव के सचिन तिवारी, सुरेंद्र तिवारी, सचिन मिश्रा, जयकुमार, पवन तिवारी, ईलू तिवारी और लल्ला दुबे के खिलाफ धारा 296 (धार्मिक अनुष्ठान में बाधा डालना), धारा 351 (2) (धमकी देना) और धारा 3 (5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दरअसल रैपुरा के केवलचंद पटेल ने 24 फरवरी से एक सप्ताह तक के लिए गांव में भागवत कथा का आयोजन किया था, यहां कथावाचक देविका पटेल को बुलाया गया। यह बात गांव के कुछ लोगों को नगवार गुजरी। गांव के कुछ युवकों ने कथित रूप से गैर-ब्राह्मण होने का हवाला देते हुए कथा करने से रोकने का प्रयास किया। देविका पटेल ने कहा कि उन युवकों ने उनके पिता को भी धमकियां दी। आरोपियों ने कथावाचक देविका पटेल को कथित रूप से यह कहकर रोका कि कथा वाचन केवल ब्राह्मणों का अधिकार है। इतना ही नहीं, कथावाचक को यह भी कहा गया कि अगर वह कथा करना चाहती हैं, तो पहले किसी ब्राह्मण युवक से विवाह करें। शिकायत के एक सप्ताह बाद दर्ज हुआ केस जो लोग गांव में देविका पटेल के कथा करने का विरोध कर रहे थे, उनकी धमकियों को ग्रामीणों ने दरकिनार किया। देविका पटेल की गांव में कथा करवाई, जिसमें कि बड़ी संख्या में लोग कथा सुनने भी पहुंचे, इस दौरान गांव में पुलिस ने भी सुरक्षा प्रदान की थी। मामले में आवेदकों ने युवकों द्वारा की गई बातचीत और आपत्ति करने का वीडियो भी पुलिस को दिया गया था। इसके बावजूद भी पुलिस को FIR दर्ज करने में एक सप्ताह से ज्यादा का समय लग गया। बुधवार को देविका पटेल की शिकायत पर पनागर थाना पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्जकर जांच में लिया है। देविका पटेल का कहना है क धर्म और अध्यात्म किसी जाति विशेष की संपत्ति नहीं है। हर व्यक्ति को भक्ति और कथा करने का अधिकार है। मुझे मेरे समाज और गांव के लोगों का समर्थन मिला, जिसके लिए मैं आभारी हूं। यह घटना धार्मिक स्वतंत्रता और जातिगत भेदभाव को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ चुकी है। देविका ने बताया कि इससे पहले भी वह कथा कर चुकी है, जहां पर ग्रामीणों को उन्हें भरपूर समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि आखिर रैपुरा गांव वालों को मेरे द्वारा कथा करने से क्यों अपत्ति थी। कथावाचक देविका पटेल की शिकायत पर एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि रैपुरा गांव में 24 फरवरी से कथा होनी थी। गांव के ही केवलचंद पटेल ने इसका आयोजन किया था। इस बीच सचिन तिवारी सहित कुछ अन्य लोगों ने देविका पटेल द्वारा कथा करने का विरोध किया गया।कथावाचक और उनके परिवार वालों को जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। मामला संज्ञान में आते ही सुचारु रूप से पूरे कार्यक्रम का आयोजन करवाया गया था। गांव के कुछ लोगों ने जब देविका पटेल की कथा का विरोध किया तो, ब्राहम्ण समाज के कुछ लोगों ने कथा का समर्थन भी किया। इसके बाद गांव के लोग इकट्ठा हुए और गांव में कथा शांतिपूर्ण ढंग से होने का निवेदन किया था।

जबलपुर में कथावाचक देविका पटेल को कथा करने से रोका:गैर ब्राह्मण होने पर कर रहे थे विरोध; पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया
जबलपुर पुलिस ने कथावाचक देविका पटेल की शिकायत पर रैपुरा गांव में रहने वाले सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। कथावाचक ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया था कि गांव के कुछ लोग उन्हें कथा करने से सिर्फ इसलिए रोक रहे थे, कि वह ब्राहम्ण नहीं है। मामले की जानकारी मिलते ही पनागर थाना पुलिस ने रैपुरा गांव के सचिन तिवारी, सुरेंद्र तिवारी, सचिन मिश्रा, जयकुमार, पवन तिवारी, ईलू तिवारी और लल्ला दुबे के खिलाफ धारा 296 (धार्मिक अनुष्ठान में बाधा डालना), धारा 351 (2) (धमकी देना) और धारा 3 (5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दरअसल रैपुरा के केवलचंद पटेल ने 24 फरवरी से एक सप्ताह तक के लिए गांव में भागवत कथा का आयोजन किया था, यहां कथावाचक देविका पटेल को बुलाया गया। यह बात गांव के कुछ लोगों को नगवार गुजरी। गांव के कुछ युवकों ने कथित रूप से गैर-ब्राह्मण होने का हवाला देते हुए कथा करने से रोकने का प्रयास किया। देविका पटेल ने कहा कि उन युवकों ने उनके पिता को भी धमकियां दी। आरोपियों ने कथावाचक देविका पटेल को कथित रूप से यह कहकर रोका कि कथा वाचन केवल ब्राह्मणों का अधिकार है। इतना ही नहीं, कथावाचक को यह भी कहा गया कि अगर वह कथा करना चाहती हैं, तो पहले किसी ब्राह्मण युवक से विवाह करें। शिकायत के एक सप्ताह बाद दर्ज हुआ केस जो लोग गांव में देविका पटेल के कथा करने का विरोध कर रहे थे, उनकी धमकियों को ग्रामीणों ने दरकिनार किया। देविका पटेल की गांव में कथा करवाई, जिसमें कि बड़ी संख्या में लोग कथा सुनने भी पहुंचे, इस दौरान गांव में पुलिस ने भी सुरक्षा प्रदान की थी। मामले में आवेदकों ने युवकों द्वारा की गई बातचीत और आपत्ति करने का वीडियो भी पुलिस को दिया गया था। इसके बावजूद भी पुलिस को FIR दर्ज करने में एक सप्ताह से ज्यादा का समय लग गया। बुधवार को देविका पटेल की शिकायत पर पनागर थाना पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्जकर जांच में लिया है। देविका पटेल का कहना है क धर्म और अध्यात्म किसी जाति विशेष की संपत्ति नहीं है। हर व्यक्ति को भक्ति और कथा करने का अधिकार है। मुझे मेरे समाज और गांव के लोगों का समर्थन मिला, जिसके लिए मैं आभारी हूं। यह घटना धार्मिक स्वतंत्रता और जातिगत भेदभाव को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ चुकी है। देविका ने बताया कि इससे पहले भी वह कथा कर चुकी है, जहां पर ग्रामीणों को उन्हें भरपूर समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि आखिर रैपुरा गांव वालों को मेरे द्वारा कथा करने से क्यों अपत्ति थी। कथावाचक देविका पटेल की शिकायत पर एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि रैपुरा गांव में 24 फरवरी से कथा होनी थी। गांव के ही केवलचंद पटेल ने इसका आयोजन किया था। इस बीच सचिन तिवारी सहित कुछ अन्य लोगों ने देविका पटेल द्वारा कथा करने का विरोध किया गया।कथावाचक और उनके परिवार वालों को जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। मामला संज्ञान में आते ही सुचारु रूप से पूरे कार्यक्रम का आयोजन करवाया गया था। गांव के कुछ लोगों ने जब देविका पटेल की कथा का विरोध किया तो, ब्राहम्ण समाज के कुछ लोगों ने कथा का समर्थन भी किया। इसके बाद गांव के लोग इकट्ठा हुए और गांव में कथा शांतिपूर्ण ढंग से होने का निवेदन किया था।