युवा महिलाओं में ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल करने से सामाजिक चिंता का जोखिम अधिक : अध्ययन

नई दिल्ली, 6 अप्रैल । रविवार को एक शोध टीम ने बताया कि स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल करने वाली युवतियों में अन्य जेंडर्स की तुलना में सामाजिक चिंता (सोशल एंग्जायटी) ज्यादा पाई जाती है। यह अध्ययन यूरोपियन साइकेट्रिक एसोसिएशन कांग्रेस 2025 में, मैड्रिड (स्पेन) में प्रस्तुत किया गया। इसमें बताया गया कि किस तरह जेंडर (लिंग) स्मार्टफोन की अधिकता और उस पर मानसिक या व्यवहारिक निर्भरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। युवतियां विशेष रूप से ज़्यादा सामाजिक चिंता का शिकार होती हैं। शोध में यह भी पाया गया कि जेंडर का सीधा संबंध इस बात से है कि व्यक्ति स्मार्टफोन पर कितना समय बिताता है और उसे ऑनलाइन दूसरों के द्वारा बुरा समझे जाने का कितना डर रहता है। रुमानिया के जॉर्ज एमिल पालाडे यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन से प्रमुख शोधकर्ता डॉ. सिबी सैंडोर ने कहा, यह नतीजे दिखाते हैं कि जेंडर के बीच बड़ा अंतर है और महिलाएं स्मार्टफोन के कारण मानसिक रूप से अधिक प्रभावित हो रही हैं। शोध में यह भी सामने आया कि सोशल मीडिया पर बातचीत की आदत, भावनाओं को समझने में कमी और दूसरों से मिलने वाला सहयोग, ये सब स्मार्टफोन की लत से प्रभावित हो सकते हैं।

युवा महिलाओं में ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल करने से सामाजिक चिंता का जोखिम अधिक : अध्ययन
नई दिल्ली, 6 अप्रैल । रविवार को एक शोध टीम ने बताया कि स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल करने वाली युवतियों में अन्य जेंडर्स की तुलना में सामाजिक चिंता (सोशल एंग्जायटी) ज्यादा पाई जाती है। यह अध्ययन यूरोपियन साइकेट्रिक एसोसिएशन कांग्रेस 2025 में, मैड्रिड (स्पेन) में प्रस्तुत किया गया। इसमें बताया गया कि किस तरह जेंडर (लिंग) स्मार्टफोन की अधिकता और उस पर मानसिक या व्यवहारिक निर्भरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। युवतियां विशेष रूप से ज़्यादा सामाजिक चिंता का शिकार होती हैं। शोध में यह भी पाया गया कि जेंडर का सीधा संबंध इस बात से है कि व्यक्ति स्मार्टफोन पर कितना समय बिताता है और उसे ऑनलाइन दूसरों के द्वारा बुरा समझे जाने का कितना डर रहता है। रुमानिया के जॉर्ज एमिल पालाडे यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन से प्रमुख शोधकर्ता डॉ. सिबी सैंडोर ने कहा, यह नतीजे दिखाते हैं कि जेंडर के बीच बड़ा अंतर है और महिलाएं स्मार्टफोन के कारण मानसिक रूप से अधिक प्रभावित हो रही हैं। शोध में यह भी सामने आया कि सोशल मीडिया पर बातचीत की आदत, भावनाओं को समझने में कमी और दूसरों से मिलने वाला सहयोग, ये सब स्मार्टफोन की लत से प्रभावित हो सकते हैं।