एमपी-छत्तीसगढ़ की मिट्टी से निकले बॉलीवुड के सितारे
एमपी-छत्तीसगढ़ की मिट्टी से निकले बॉलीवुड के सितारे
मुंबई । बॉलीवुड की चमचमाती दुनिया यानी मायानगरी मुंबई में हर साल लाखों आंखें हीरो-हीरोइन बनने का सपना लेकर पहुंचती हैं। लेकिन इस भीड़ में अपनी पहचान वही बना पाता है, जिसके पास अभिनय का हुनर और मिट्टी की असली खुशबू होती है।
अक्सर माना जाता है कि बॉलीवुड पर सिर्फ बड़े महानगरों या फिल्मी परिवारों (नेपोटिज्म) का दबदबा है, लेकिन मध्य प्रदेश (MP) और छत्तीसगढ़ (CG) के छोटे शहरों और कस्बों से निकले कलाकारों ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से लेकर थियेटर के मंचों तक, इन कलाकारों ने अपनी बेमिसाल अदाकारी से बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारों को पीछे छोड़ दिया है।
आइए एक्टर्स के फिल्मी सफर के जरिए जानते हैं उन दिग्गज कलाकारों को, जिन्होंने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का नाम वैश्विक स्तर पर चमकाया है।
यूं तो मनोज बाजपेयी का जन्म बिहार में हुआ था, लेकिन उनके अभिनय की नींव और उनकी कला का एक बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और वहां के थियेटर ग्रुप्स से गहराई से जुड़ा रहा है। 'द फैमिली मैन', 'सत्या' और 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' जैसी फिल्मों से भारतीय सिनेमा को बदलने वाले मनोज बाजपेयी अक्सर अपनी कलात्मक ग्रोथ के लिए एमपी के रंगमंच को श्रेय देते हैं।
फिल्म 'संघर्ष' के 'लज्जा शंकर पांडे' और 'दुश्मन' के सायको किलर 'गोकुल पंडित' को कोई कैसे भूल सकता है? भारतीय सिनेमा के सबसे खूंखार और प्रतिभाशाली खलनायकों में शुमार आशुतोष राणा मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा के रहने वाले हैं।
स्थानीय रामलीला में अभिनय करने से लेकर बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता बनने तक का उनका सफर बेहद प्रेरणादायक है। वे आज एक बेहतरीन लेखक और कवि भी हैं।
फिल्म 'चाइना गेट' के खूंखार 'जगीरा' से लेकर 'गोलमाल' सीरीज के कॉमेडी कैरेक्टर 'वसूली भाई' तक, हर किरदार को अमर कर देने वाले मुकेश तिवारी मध्य प्रदेश के सागर शहर से ताल्लुक रखते हैं। वे एनएसडी (NSD) के पूर्व छात्र रहे हैं और उनकी कड़क आवाज और कॉमिक टाइमिंग का आज पूरा बॉलीवुड दीवाना है।
एक्टर, सिंगर और बेहतरीन एंकर अन्नू कपूर (मूल नाम अनिल कपूर) का जन्म और पालन-पोषण भोपाल में हुआ था। उनकी मां एक बंगाली और पिता पंजाबी थियेटर कंपनी चलाते थे। 'विक्की डोनर' में डॉ. चड्ढा का रोल हो या 'जॉली एलएलबी', अन्नू कपूर ने हर फ्रेम में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
आज के दौर में बॉलीवुड के सबसे सफल और चहेते युवा सुपरस्टार्स में से एक कार्तिक आर्यन (मूल नाम - कार्तिक तिवारी) मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हैं। उनके माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं।
बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के, सिर्फ अपनी मेहनत के दम पर 'प्यार का पंचनामा' के लंबे मोनोलॉग से पहचान बनाने वाले कार्तिक ने 'भूल भुलैया 2' और 'चंदू चैंपियन' जैसी फिल्मों से साबित कर दिया कि ग्वालियर के लड़के का भौकाल अब पूरे बॉलीवुड पर है।
'बैंडिट क्वीन', 'विरासत', 'सत्या', 'सरफरोश' और 'ओएमजी (OMG)' जैसी फिल्मों में अपनी कड़क आवाज और दमदार अभिनय से खौफ पैदा करने वाले दिग्गज अभिनेता गोविंद नामदेव मध्य प्रदेश के सागर शहर के रहने वाले हैं।
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के पूर्व छात्र रहे गोविंद नामदेव ने थियेटर से निकलकर बॉलीवुड में विलेन और कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर एक ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसे आज भी कोई छू नहीं पाया है।
पिछले 50 वर्षों से भारतीय सिनेमा (हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम) में सक्रिय और 250 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके शरत सक्सेना मध्य प्रदेश के सतना के रहने वाले हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई भोपाल के सेंट जोसेफ कॉन्वेंट और इंजीनियरिंग की पढ़ाई जबलपुर से हुई थी।
'मिस्टर इंडिया' के 'डागा', 'गुलाम' के 'अलकाजी' और 'बजरंगी भाईजान' के 'दयानंद' जैसे किरदारों को अमर बनाने वाले शरत सक्सेना ने अपनी दमदार बॉडी और बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से दशकों तक दर्शकों का मनोरंजन किया है
अपनी दमदार और भारी आवाज से बाहुबली (हिंदी डब) को अमर बनाने वाले और 'तानाजी' जैसी फिल्मों में छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवंत किरदार निभाने वाले शरद केलकर मध्य प्रदेश के ग्वालियर से हैं। उन्होंने ग्वालियर से ही अपनी फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई पूरी की और बाद में मुंबई का रुख किया।
भारतीय सिनेमा और थियेटर के 'पितामह' कहे जाने वाले पद्म भूषण सत्यदेव दुबे का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुआ था। उन्होंने 1960 और 70 के दशक में भारतीय थियेटर और समानांतर सिनेमा (Parallel Cinema) की दिशा बदल दी। उन्होंने श्याम बेनेगल की कई कालजयी फिल्मों (जैसे 'अंकुर', 'निशांत', 'भूमिका') की पटकथा और संवाद लिखे थे।
आमिर खान प्रोडक्शंस की फिल्म 'पीपली लाइव' (Plipli Live) में 'नत्था' का मुख्य और यादगार किरदार निभाने वाले ओंकार दास मानिकपुरी छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले हैं। बॉलीवुड में आने से पहले वे छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध 'नचा' लोक रंगमंच और हबीब तनवीर के 'नया थिएटर' के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे।
'बर्फी', 'लूडो' और 'मर्डर' जैसी शानदार फिल्मों के कल्ट डायरेक्टर अनुराग बसु का जन्म छत्तीसगढ़ के भिलाई में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा भिलाई स्टील प्लांट के सांस्कृतिक माहौल में हुई, जिसका असर उनकी फिल्मों की बेहतरीन विजुअल स्टोरीटेलिंग में साफ दिखाई देता है।
रंगमंच की मजबूत नींव - भोपाल का 'भारत भवन' और छत्तीसगढ़ में हबीब तनवीर का 'नया थियेटर' ऐसे संस्थान रहे हैं, जिन्होंने कलाकारों को केवल स्टार बनना नहीं, बल्कि अभिनय की गहराइयों को जीना सिखाया।
संवाद अदायगी और भाषा पर पकड़ - हिंदी बेल्ट (Hindi Heartand) से होने के कारण इन दोनों राज्यों के कलाकारों का भाषा, लहजे (Diction) और संवाद अदायगी पर गजब का नियंत्रण होता है, जो बॉलीवुड फिल्मों के लिए सबसे जरूरी तत्व है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के इन हुनरबाजों ने साबित कर दिया कि मायानगरी में गॉडफादर की नहीं, बल्कि जमीनी अनुभव और कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। आज जब भी बॉलीवुड में रियलिस्टिक और दमदार सिनेमा की बात होती है, इन राज्यों के कलाकारों का नाम सबसे ऊपर आता है।








