60 सिगरेट पीते थे नाना, कार्डियक अरेस्ट से निधन
60 सिगरेट पीते थे नाना, कार्डियक अरेस्ट से निधन
मुंबई । नाना पाटेकर ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि वह 56 साल की उम्र तक रोजाना करीब 60 सिगरेट पीते थे। उन्होंने 2007-08 के आसपास अचानक स्मोकिंग छोड़ने का फैसला किया था। नाना ने यह भी कहा था कि उन्हें खांसी रहती थी और एक करीबी व्यक्ति की बात ने उन्हें अपनी सेहत के बारे में गंभीरता से सोचने पर मजबूर किया।
स्मोकिंग को लंबे समय से हार्ट और फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों के जोखिम से जोड़ा जाता है। इसी वजह से हार्ट हेल्थ को लेकर एक स्थिति के बारे में जानना बेहद जरूरी है, जिसमें कुछ ही मिनटों में जिंदगी और मौत का फर्क हो सकता है- कार्डियक अरेस्ट।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि नाना पाटेकर को कार्डियक अरेस्ट हुआ था। क्या उनकी स्मोकिंग इसकी वजह थी? आइए समझते हैं-
कार्डियक अरेस्ट क्या होता है?
कार्डियक अरेस्ट ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिल अचानक शरीर में प्रभावी तरीके से खून पंप करना बंद कर देता है। इसकी वजह अक्सर दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि में गंभीर गड़बड़ी होती है।
जब दिल पंप करना बंद करता है, तो दिमाग और शरीर के दूसरे जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन वाला खून पहुंचना बंद हो जाता है। व्यक्ति कुछ ही सेकंड में बेहोश हो सकता है और सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत CPR और उपलब्ध होने पर AED का इस्तेमाल बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक नहीं
दोनों शब्दों को अक्सर एक ही समझ लिया जाता है, लेकिन इनके बीच बड़ा अंतर है।
हार्ट अटैक: इसमें आमतौर पर दिल की किसी ब्लड वेसल्स में ब्लॉकेज के कारण दिल के एक हिस्से तक खून की सप्लाई कम या बंद हो जाती है।
कार्डियक अरेस्ट: इसमें दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गंभीर समस्या के कारण दिल की पंपिंग अचानक रुक सकती है।
हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, लेकिन हर हार्ट अटैक में कार्डियक अरेस्ट नहीं होता।
कार्डियक अरेस्ट आने पर शरीर में क्या होता है?
कार्डियक अरेस्ट में दिल की पंपिंग अचानक रुकने से शरीर में ब्लड संचार तेजी से प्रभावित होता है। इसके बाद-
व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है।
वह आवाज देने या हिलाने पर प्रतिक्रिया नहीं देता।
सामान्य सांस बंद हो सकती है।
कभी-कभी व्यक्ति कुछ समय के लिए सिर्फ हांफता हुआ दिखाई दे सकता है।
ऑक्सीजन की कमी से कुछ ही मिनटों में दिमाग को गंभीर नुकसान हो सकता है।
किन कारणों से हो सकता है कार्डियक अरेस्ट?
कार्डियक अरेस्ट कई कारणों से हो सकता है। इनमें प्रमुख हैं:
कोरोनरी आर्टरी डिजीज
हार्ट अटैक
दिल की गंभीर इलेक्ट्रिकल रिदम समस्या
कार्डियोमायोपैथी
कुछ जेनेटिक हार्ट संबंधी समस्याएं
गंभीर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
कुछ मामलों में दवाओं या जहरीले पदार्थों का प्रभाव
गंभीर ऑक्सीजन की कमी
स्मोकिंग और दिल की सेहत का क्या कनेक्शन है?
सिगरेट के धुएं में मौजूद कई रसायन शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं। स्मोकिंग ब्लड वेसल्सओं को नुकसान पहुंचा सकती है, एथेरोस्क्लेरोसिस यानी धमनियों में प्लाक जमा होने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकती है और हार्ट रोग का जोखिम बढ़ा सकती है।
सिर्फ बहुत ज्यादा सिगरेट पीना ही चिंता की बात नहीं है। कम मात्रा में या लंबे समय तक स्मोकिंग करना भी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता। नाना पाटेकर ने जिस तरह अपनी स्मोकिंग की आदत अचानक छोड़ने की बात बताई थी, उससे एक महत्वपूर्ण संदेश मिलता है- स्मोकिंग छोड़ने के लिए कभी देर नहीं होती।
कार्डियक अरेस्ट में CPR क्यों जरूरी?
अगर कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो गया है और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, तो कार्डियक अरेस्ट की आशंका हो सकती है। ऐसे समय CPR यानी Cardiopulmonary Resuscitation शुरू करना महत्वपूर्ण है।
CPR का मतलब मेडिकल मदद पहुंचने तक शरीर में कुछ ब्लड प्रवाह बनाए रखना है। इससे दिमाग और दूसरे जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
CPR कैसे करें?
अगर व्यक्ति प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है और सामान्य सांस नहीं ले रहा है-
1. तुरंत मदद के लिए कॉल करें
स्थानीय इमरजेंसी मेडिकल सर्विस को तुरंत बुलाएं। आसपास मौजूद किसी व्यक्ति को AED लाने के लिए कहें, अगर उपलब्ध हो।
2. छाती पर दबाव शुरू करें
व्यक्ति को सख्त और समतल सतह पर पीठ के बल लिटाएं। दोनों हाथों को छाती के बीच में रखें और लगातार दबाव दें।
3. गति बनाए रखें
वयस्कों में छाती पर दबाव लगभग 100–120 बार प्रति मिनट की गति से किया जाता है।
4. AED उपलब्ध हो तो इस्तेमाल करें
AED दिल की रिदम का विश्लेषण करता है और जरूरत पड़ने पर इलेक्ट्रिक शॉक देने के लिए निर्देश देता है। मशीन के वॉइस या स्क्रीन निर्देशों का पालन करें।
5. मदद आने तक जारी रखें
मेडिकल टीम आने तक या व्यक्ति में सामान्य सांस/हरकत के स्पष्ट संकेत आने तक CPR जारी रखना चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति CPR देने में प्रशिक्षित नहीं है, तो भी अचानक बेहोश और सामान्य सांस न ले रहे वयस्क में Hands-Only CPR यानी सिर्फ छाती पर दबाव शुरू करना मददगार हो सकता है।
कार्डियक अरेस्ट के बाद क्या होता है?
कार्डियक अरेस्ट से बचने के बाद मरीज को अस्पताल में निगरानी और आगे की जांच की जरूरत होती है। डॉक्टर यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि अरेस्ट किस वजह से हुआ।
इसके लिए ECG, ब्लड टेस्ट, इकोकार्डियोग्राम, कोरोनरी एंजियोग्राफी या अन्य जांच की जरूरत पड़ सकती है।
कुछ मरीजों में आगे कार्डियक अरेस्ट का जोखिम कम करने के लिए दवाओं, एंजियोप्लास्टी, सर्जरी या Implantable Cardioverter Defibrillator (ICD) जैसे उपचार की जरूरत पड़ सकती है। उपचार पूरी तरह कारण और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।
क्या कार्डियक अरेस्ट से बचाव संभव है?
हर कार्डियक अरेस्ट को रोका नहीं जा सकता, लेकिन हार्ट को स्वस्थ रखने से कई जोखिम कम किए जा सकते हैं। इसके लिए-
स्मोकिंग और तंबाकू से दूरी रखें।
ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें।
डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
संतुलित आहार लें।
वजन को स्वस्थ सीमा में रखने की कोशिश करें।
शराब का सेवन सीमित रखें या उससे बचें।
परिवार में कम उम्र में हार्ट रोग या अचानक मौत का इतिहास हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
हार्ट अटैक में दिल की ब्लड वेसल्स की समस्या प्रमुख होती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल की पंपिंग अचानक रुक सकती है। दोनों गंभीर स्थितियां हैं, लेकिन दोनों का मतलब एक नहीं है।
कार्डियक अरेस्ट में सबसे महत्वपूर्ण चीज है समय पर पहचान, तुरंत इमरजेंसी मदद, CPR और जरूरत पड़ने पर AED।
और अगर कोई व्यक्ति स्मोकिंग करता है, तो उसे छोड़ना हार्ट स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक हो सकता है। नाना पाटेकर की कहानी इसी बात की याद दिलाती है कि लंबे समय की आदत को छोड़ने का फैसला किसी भी उम्र में लिया जा सकता है।








