छत्तीसगढ़ में 10 हजार सरकारी कनेक्शन काटे गए
छत्तीसगढ़ में 10 हजार सरकारी कनेक्शन काटे गए
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों के बढ़ते बिजली बिल बकाये को देखते हुए बिजली कंपनी ने सख्त कदम उठाया है। प्रदेशभर में 10 हजार से अधिक सरकारी बिजली कनेक्शनों को स्थायी रूप से डिस्कनेक्ट कर दिया गया है। इन कनेक्शनों पर करीब 51 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया था। वहीं प्रदेश के 40 सरकारी विभागों पर कुल 3,432 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी होने से बिजली कंपनियों के वित्तीय प्रबंधन पर लगातार दबाव बना हुआ है।
बकाया वसूली के लिए शुरू होगी नई प्रक्रिया
बिजली कंपनी ने अब बकाया राशि की वसूली के लिए ड्यूज रिकवरी एक्ट के तहत कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है। इसके तहत संबंधित विभागों की बकाया राशि को उनके नियमित बिजली बिलों में जोड़कर वसूला जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, भुगतान के लिए संबंधित विभागों को कई बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन समय पर राशि जमा नहीं होने के कारण स्थायी डिस्कनेक्शन की कार्रवाई करनी पड़ी।
फिर से कनेक्शन चालू कराने पर चुकाना होगा पूरा बकाया
कंपनी के मुताबिक जिन सरकारी कनेक्शनों का भविष्य में दोबारा उपयोग किया जाएगा, उन्हें पुनः चालू कराने से पहले पूरा बकाया जमा करना अनिवार्य होगा। वहीं जिन परिसरों में बिजली आपूर्ति अभी भी जारी है, वहां ड्यूज रिकवरी एक्ट के तहत बकाया राशि को किस्तों अथवा नियमित बिजली बिलों में समायोजित कर वसूला जाएगा।
कई वितरण क्षेत्रों में हुई कार्रवाई
यह अभियान प्रदेश के विभिन्न वितरण क्षेत्रों में चलाया गया। अंबिकापुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायपुर, जगदलपुर, महासमुंद, कोरबा, रायगढ़, जांजगीर और राजनांदगांव सहित अन्य सर्कलों में बड़ी संख्या में सरकारी बिजली कनेक्शन स्थायी रूप से काटे गए। रायपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई।
एक अगस्त से लागू होगी प्री-पेड बिजली व्यवस्था
बिजली कंपनी ने सरकारी कार्यालयों के लिए एक अगस्त से प्री-पेड बिजली व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी विभागों को तीन महीने के बिजली खर्च के बराबर अग्रिम राशि जमा करनी होगी। कंपनी का मानना है कि इससे समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा और बिजली वितरण व्यवस्था पर वित्तीय दबाव कम किया जा सकेगा। साथ ही बड़े बकायादारों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
नगरीय प्रशासन विभाग पर सबसे अधिक बकाया
आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक बिजली बिल बकाया नगरीय प्रशासन विभाग पर है, जिस पर 1,674 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी है। इसके अलावा 39 अन्य विभागों पर भी कुल 1,758 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया है। अधिकारियों का कहना है कि कई विभाग बजट की कमी का हवाला देते हैं, जबकि कुछ मामलों में आवंटित राशि अन्य मदों में खर्च होने से बिजली बिल लंबित रह जाते हैं। कई विभागों ने पिछले दो वर्षों से नियमित भुगतान भी नहीं किया है।








