मुरकौल स्कूल में शिक्षक नहीं, भड़के छात्र
मुरकौल स्कूल में शिक्षक नहीं, भड़के छात्र
अंबिकापुर। दिल्ली के जंतर-मंतर, मध्य प्रदेश के भोपाल, जबलुपर और झारखंड के बाद अब छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के हायर सेकेंडरी स्कूल मुरकौल में शिक्षकों की कमी को लेकर गुरुवार को विद्यार्थियों का गुस्सा फूट पड़ा।
स्कूल समय पर कक्षा में जाने के बजाय छात्र-छात्राएं वाड्रफनगर-सनावल मार्ग पर सड़क पर बैठ गए और सड़क जाम कर दिया। इससे वाड्रफनगर-सनावल मार्ग पर करीब ढाई घंटे तक यातायात बाधित रहा।
जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यशैली पर नाराजगी जताई
विद्यार्थियों ने जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि शिक्षण सत्र शुरू होने से पहले शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। पिछले साल तक डीएमएफ से अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था की जाती थी, लेकिन इस वर्ष वह व्यवस्था भी नहीं की गई।
रसायन विज्ञान का एक भी शिक्षक नहीं
छात्रों ने बताया कि इस वर्ष स्कूल में रसायन विज्ञान विषय का एक भी शिक्षक नहीं है। हिंदी और संस्कृत जैसे विषयों के लिए भी विशेषज्ञ शिक्षक नहीं हैं। दूसरे विषयों के शिक्षकों से जैसे-तैसे हिंदी-संस्कृत पढ़ाई जा रही है, लेकिन रसायन की पढ़ाई सत्र शुरू होने से आज तक शुरू ही नहीं हुई है।
इसी महीने से तिमाही परीक्षा शुरू होनी है
इसी महीने से तिमाही परीक्षा शुरू होनी है, लेकिन रसायन का एक भी पाठ नहीं पढ़ाया गया। आंदोलन की सूचना पर वाड्रफनगर से विकासखंड शिक्षा कार्यालय के कर्मचारी और आसपास के संकुल समन्वयक मौके पर पहुंचे और छात्रों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे। उनकी मांग थी कि तत्काल कम से कम रसायन विषय के शिक्षक की व्यवस्था की जाए।
जिला शिक्षा अधिकारी से वीडियो कॉल पर छात्रों की बात कराई
हंगामे को देखते हुए मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने जिला शिक्षा अधिकारी एमआर यादव से वीडियो कॉल पर छात्रों की बात कराई। छात्रों ने बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया। डीईओ ने वीडियो कॉल पर आश्वस्त किया कि 15 दिवस के भीतर शिक्षकों की कमी दूर कर दी जाएगी।
इसके बाद दोपहर करीब एक बजे छात्र स्कूल में प्रवेश किए। विद्यालय का समय सुबह 10:30 बजे का है।सूत्रों के अनुसार डीएमएफ से सामग्री खरीदी पर जोर दिए जाने के कारण अतिथि शिक्षकों को लेकर कोई निर्णय नहीं हो सका, जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई।
विद्यालय के प्राचार्य का कहना है कि उन्होंने पहले ही शिक्षकों की कमी की जानकारी उच्च कार्यालय को दे दी थी। बीईओ के रायपुर में प्रशिक्षण में होने के कारण कार्यालयीन कर्मचारियों को मौके पर जाना पड़ा।








