लहार कस्बे की सरकारी दुकानों पर छिड़ा विवाद:तहसील कोर्ट में 160 दुकान मालिकों ने पेश किया जवाब, कुछ ने दस्तावेज नहीं किए जमा
लहार कस्बे की सरकारी दुकानों पर छिड़ा विवाद:तहसील कोर्ट में 160 दुकान मालिकों ने पेश किया जवाब, कुछ ने दस्तावेज नहीं किए जमा
भिंड जिले के लहार कस्बे में सरकारी दुकानों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। तहसील कोर्ट द्वारा सरकारी जमीन पर बनी दुकानों के मालिकों से नीलामी और आवंटन के दस्तावेज मांगे गए थे। इस पर 160 से अधिक दुकान मालिकों ने दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए हैं, जबकि कई दुकानदार अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं कर सके। ऐसे में कोर्ट सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। लहार कस्बे में 187 दुकानदारों को तहसील कोर्ट ने नोटिस जारी कर सरकारी जमीन पर कब्जे और दुकानों के आवंटन से जुड़े दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया था। इसके लिए 21 नवंबर की तारीख निर्धारित की गई थी। गुरुवार को तहसील कोर्ट में 160 से अधिक दुकान मालिकों ने अपने दस्तावेज या वकीलों के माध्यम से जवाब प्रस्तुत किया। हालांकि, इनमें से अधिकांश ने केवल जवाब दाखिल किया, जबकि मूल दस्तावेजों की संख्या कम रही। तहसील कोर्ट के अनुसार, दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया अभी जारी है, और अगले गुरुवार, 28 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन दुकानदारों ने वकीलों के माध्यम से जवाब दिया है, उन्हें एक और अवसर प्रदान किया जाएगा, ताकि वे अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें। दुकानदारों में हड़कंप कोर्ट की सख्ती के चलते कई दुकान मालिक अब भी दस्तावेज प्रस्तुत करने में असमर्थ हैं। लहार तहसील से मिली जानकारी के अनुसार, ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना है। तहसील कोर्ट, हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों को हटाने के लिए कठोर कदम उठाने की तैयारी में है। ये है मामला करीब दो साल पहले पांच वकीलों की एक टीम ने ग्वालियर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। एडवोकेट पीएन मेहरा, एडवोकेट चंद्रशेखर उपाध्याय, एडवोकेट विकास बिरथरे, एडवोकेट राकेश शर्मा महते, एडवोकेट पवन दीक्षित मिहोना द्वारा याचिका में दावा किया गया कि लहार कस्बे में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके नगर पालिका द्वारा दुकानों का निर्माण कराया गया और इन्हें निजी व्यक्तियों को आवंटित किया गया। हाई कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए तहसीलदार को निर्देश दिया कि वह दुकानदारों का पक्ष सुने और सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराए। वैध या अवैध, जल्द होगा निर्णय तहसीलदार राजकुमार नागोरिया ने बताया कि इस मामले में दुकानदारों का पक्ष सुनने और दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा, "160 से अधिक जवाब अब तक प्रस्तुत किए जा चुके हैं। आगामी सुनवाई में दस्तावेजों की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। लहार कस्बे के इस मामले ने स्थानीय व्यापारियों में हलचल पैदा कर दी है। जहां कुछ दुकानदारों ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए दस्तावेज पेश कर दिए हैं, वहीं कई अब भी पीछे हैं। 28 नवंबर को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि इन दुकानों का भविष्य क्या होगा, वे वैध ठहरेंगी या अवैध।
भिंड जिले के लहार कस्बे में सरकारी दुकानों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। तहसील कोर्ट द्वारा सरकारी जमीन पर बनी दुकानों के मालिकों से नीलामी और आवंटन के दस्तावेज मांगे गए थे। इस पर 160 से अधिक दुकान मालिकों ने दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए हैं, जबकि कई दुकानदार अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं कर सके। ऐसे में कोर्ट सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। लहार कस्बे में 187 दुकानदारों को तहसील कोर्ट ने नोटिस जारी कर सरकारी जमीन पर कब्जे और दुकानों के आवंटन से जुड़े दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया था। इसके लिए 21 नवंबर की तारीख निर्धारित की गई थी। गुरुवार को तहसील कोर्ट में 160 से अधिक दुकान मालिकों ने अपने दस्तावेज या वकीलों के माध्यम से जवाब प्रस्तुत किया। हालांकि, इनमें से अधिकांश ने केवल जवाब दाखिल किया, जबकि मूल दस्तावेजों की संख्या कम रही। तहसील कोर्ट के अनुसार, दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया अभी जारी है, और अगले गुरुवार, 28 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन दुकानदारों ने वकीलों के माध्यम से जवाब दिया है, उन्हें एक और अवसर प्रदान किया जाएगा, ताकि वे अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें। दुकानदारों में हड़कंप कोर्ट की सख्ती के चलते कई दुकान मालिक अब भी दस्तावेज प्रस्तुत करने में असमर्थ हैं। लहार तहसील से मिली जानकारी के अनुसार, ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना है। तहसील कोर्ट, हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों को हटाने के लिए कठोर कदम उठाने की तैयारी में है। ये है मामला करीब दो साल पहले पांच वकीलों की एक टीम ने ग्वालियर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। एडवोकेट पीएन मेहरा, एडवोकेट चंद्रशेखर उपाध्याय, एडवोकेट विकास बिरथरे, एडवोकेट राकेश शर्मा महते, एडवोकेट पवन दीक्षित मिहोना द्वारा याचिका में दावा किया गया कि लहार कस्बे में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके नगर पालिका द्वारा दुकानों का निर्माण कराया गया और इन्हें निजी व्यक्तियों को आवंटित किया गया। हाई कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए तहसीलदार को निर्देश दिया कि वह दुकानदारों का पक्ष सुने और सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराए। वैध या अवैध, जल्द होगा निर्णय तहसीलदार राजकुमार नागोरिया ने बताया कि इस मामले में दुकानदारों का पक्ष सुनने और दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा, "160 से अधिक जवाब अब तक प्रस्तुत किए जा चुके हैं। आगामी सुनवाई में दस्तावेजों की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। लहार कस्बे के इस मामले ने स्थानीय व्यापारियों में हलचल पैदा कर दी है। जहां कुछ दुकानदारों ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए दस्तावेज पेश कर दिए हैं, वहीं कई अब भी पीछे हैं। 28 नवंबर को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि इन दुकानों का भविष्य क्या होगा, वे वैध ठहरेंगी या अवैध।