बांदा में 60 साल बाद जागी ब्रिटिश कालीन नहर:2.70 करोड़ की लागत से हुआ कायाकल्प, 12 गांवों को मिलेगा पानी

बुंदेलखंड के बांदा में जल संकट से निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वादा पूरा होना शुरू हो गया है। जलशक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद की देखरेख में 30 किलोमीटर लंबी नहर का कायाकल्प कर दिया गया है। यह नहर ब्रिटिश शासनकाल में बनाई गई थी। पैलानी तहसील के अलोना गांव से निवाईच-पिपरहरी समेत एक दर्जन गांवों को सिंचाई के लिए बनाई गई यह नहर पिछले 60 वर्षों से बेकार पड़ी थी। केन नदी पर लिफ्ट परियोजना भी शुरू की गई थी, लेकिन वह भी अधूरी रह गई। धीरे-धीरे नहर का अस्तित्व खत्म हो गया। किसानों ने इसे अपने खेतों में मिला लिया था। मुख्यमंत्री योगी के संकल्प को पूरा करने के लिए जलशक्ति मंत्री ने इस नहर के कायाकल्प की पहल की। 2.70 करोड़ रुपए की लागत से अलोना गांव स्थित केन नदी में पंप कैनाल से नहर की खुदाई का काम पूरा किया गया। मात्र तीन महीने की मेहनत से अलोना रजबहा के जरिए 30 किलोमीटर तक पानी पहुंचा दिया गया है। इससे करीब एक दर्जन गांवों के 2000 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई शुरू हो गई है। किसान बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि पिछले 60 सालों में वे मुश्किल से एक फसल उगा पाते थे। उसके लिए भी निजी नलकूपों से महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ता था।

बांदा में 60 साल बाद जागी ब्रिटिश कालीन नहर:2.70 करोड़ की लागत से हुआ कायाकल्प, 12 गांवों को मिलेगा पानी
बुंदेलखंड के बांदा में जल संकट से निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वादा पूरा होना शुरू हो गया है। जलशक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद की देखरेख में 30 किलोमीटर लंबी नहर का कायाकल्प कर दिया गया है। यह नहर ब्रिटिश शासनकाल में बनाई गई थी। पैलानी तहसील के अलोना गांव से निवाईच-पिपरहरी समेत एक दर्जन गांवों को सिंचाई के लिए बनाई गई यह नहर पिछले 60 वर्षों से बेकार पड़ी थी। केन नदी पर लिफ्ट परियोजना भी शुरू की गई थी, लेकिन वह भी अधूरी रह गई। धीरे-धीरे नहर का अस्तित्व खत्म हो गया। किसानों ने इसे अपने खेतों में मिला लिया था। मुख्यमंत्री योगी के संकल्प को पूरा करने के लिए जलशक्ति मंत्री ने इस नहर के कायाकल्प की पहल की। 2.70 करोड़ रुपए की लागत से अलोना गांव स्थित केन नदी में पंप कैनाल से नहर की खुदाई का काम पूरा किया गया। मात्र तीन महीने की मेहनत से अलोना रजबहा के जरिए 30 किलोमीटर तक पानी पहुंचा दिया गया है। इससे करीब एक दर्जन गांवों के 2000 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई शुरू हो गई है। किसान बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि पिछले 60 सालों में वे मुश्किल से एक फसल उगा पाते थे। उसके लिए भी निजी नलकूपों से महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ता था।