बच्चों को धन नहीं, संस्कार दें- विशुद्ध सागर महाराज:बोदरली में जैन मुनि का मंगल प्रवचन, भारतीय संस्कृति से जुड़ने का आह्वान

अकोला से इंदौर की ओर विहार कर रहे जैन मुनि श्री 108 विशुद्ध सागर महाराज का बोदरली में मंगल प्रवचन हुआ। महाराज श्री ने आधुनिक युग में बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रामायण, महाभारत और श्रीमद्भागवत के आदर्शों को अपनाने से बच्चे धर्म, सत्य और कर्तव्य को प्राथमिकता देते हैं। इससे परिवार में एकता और समाज में शांति बनी रहती है। विशुद्ध सागर बोले - बच्चों को संस्कारवान बनाए माता-पिता विशुद्ध सागर ने कहा कि माता-पिता को बच्चों को धन की जगह अच्छे संस्कार देने चाहिए। उन्होंने बताया कि धन से सुख-शांति नहीं मिलती। अच्छे संस्कार ही परिवार को एकजुट रखते हैं। सही मार्गदर्शन और धार्मिक शिक्षा पाने वाले बच्चे बड़े होकर माता-पिता और सास-ससुर की सेवा करते हैं। उन्होंने बताया कि धर्म का पालन करने वाले परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। माता-पिता को बच्चों को संस्कारवान बनाना चाहिए। इससे वे अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन कर सकेंगे। भक्ति संध्या और धार्मिक चर्चा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने महाराज श्री के प्रवचन से आत्मिक शांति का अनुभव किया। प्रवचन के बाद भक्ति संध्या और धार्मिक चर्चा हुई। इस दौरान सभी भक्तों ने धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस मौके पर महाराज श्री के साथ श्री 108 प्रणय सागर जी, श्री 108 सर्वार्थ सागर जी और श्री 108 सौम्या सागर जी महाराज भी मौजूद रहे।

बच्चों को धन नहीं, संस्कार दें- विशुद्ध सागर महाराज:बोदरली में जैन मुनि का मंगल प्रवचन, भारतीय संस्कृति से जुड़ने का आह्वान
अकोला से इंदौर की ओर विहार कर रहे जैन मुनि श्री 108 विशुद्ध सागर महाराज का बोदरली में मंगल प्रवचन हुआ। महाराज श्री ने आधुनिक युग में बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रामायण, महाभारत और श्रीमद्भागवत के आदर्शों को अपनाने से बच्चे धर्म, सत्य और कर्तव्य को प्राथमिकता देते हैं। इससे परिवार में एकता और समाज में शांति बनी रहती है। विशुद्ध सागर बोले - बच्चों को संस्कारवान बनाए माता-पिता विशुद्ध सागर ने कहा कि माता-पिता को बच्चों को धन की जगह अच्छे संस्कार देने चाहिए। उन्होंने बताया कि धन से सुख-शांति नहीं मिलती। अच्छे संस्कार ही परिवार को एकजुट रखते हैं। सही मार्गदर्शन और धार्मिक शिक्षा पाने वाले बच्चे बड़े होकर माता-पिता और सास-ससुर की सेवा करते हैं। उन्होंने बताया कि धर्म का पालन करने वाले परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। माता-पिता को बच्चों को संस्कारवान बनाना चाहिए। इससे वे अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन कर सकेंगे। भक्ति संध्या और धार्मिक चर्चा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने महाराज श्री के प्रवचन से आत्मिक शांति का अनुभव किया। प्रवचन के बाद भक्ति संध्या और धार्मिक चर्चा हुई। इस दौरान सभी भक्तों ने धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस मौके पर महाराज श्री के साथ श्री 108 प्रणय सागर जी, श्री 108 सर्वार्थ सागर जी और श्री 108 सौम्या सागर जी महाराज भी मौजूद रहे।