तवा डैम से मिला अजनाल नदी को जल:नहर का पानी आने से हुई लबालब, शहर के 15 वार्डों में जल संकट होगा दूर

हरदा की जीवनदायिनी अजनाल नदी में एक बार फिर जान आ गई है। तवा डैम से छोड़े गए नहर के पानी ने नदी को नया जीवन दिया है। मार्च में किसानों द्वारा मूंग की फसल की सिंचाई के लिए मोटर से पानी निकालने के कारण नदी पूरी तरह सूख गई थी। इस सूखी नदी से शहर के कई वार्डों में पेयजल संकट गहरा गया था। बिरजाखेड़ी पंप इंजन से पुराने शहर में होने वाली जलापूर्ति भी प्रभावित हुई। इस पंप से रोजाना करीब 10 हजार लोगों को पानी मिलता है। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही यह जल व्यवस्था नदी के सूखने से बाधित हो गई थी। नदी में पानी कम होने से कुओं का जलस्तर भी नीचे चला गया। नगर पालिका को टैंकरों से वार्डों में पानी पहुंचाना पड़ रहा था। अब तवा डैम से नहर में छोड़े गए पानी के सीपेज से अजनाल नदी लबालब हो गई है। इससे पुराने शहर और मुख्य बाजार क्षेत्र की कॉलोनियों में रहने वाले लगभग 9 वार्डों के 10 हजार लोगों को निरंतर पानी की आपूर्ति हो सकेगी। इससे बोरिंग और अन्य जल स्रोतों का स्तर भी बढ़ेगा। नगर पालिका जल्द ही गुप्तेश्वर मंदिर के पास स्थित स्टॉप डैम पर पानी रोककर जलापूर्ति व्यवस्था को और बेहतर करेगी। जल संकट के समाधान और पानी बचाने पर नपा में बैठक आज गर्मी का सीजन शुरू होने के सा साथ ही शहर में कहीं-कहीं जलसंकट के मामले सामने आने लगे हैं। आए दिन नगर पालिका में और मंगलवार को जन सुनवाई में विभिन्न कॉलोनियों की महिलाएं और रहवासी पानी की किल्लत को लेकर पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए नपा ने पानी के प्रबंधन के संबंध में मंगलवार को शाम 5 बजे से बैठक रखी है। इसमें नपा के सभी 35 वार्डों के पार्षद, जनप्रतिनिधि और शहर के प्रबुद्ध नागरिकों को आमंत्रित किया है। बैठक में उन क्षेत्रों को चिन्हित कर समाधान पर चर्चा कर रणनीति तैयार की जाएगी, जहां पानी की परेशानी आ रही है।इसके अलावा इस बैठक में नपा जलकर बढ़ाने के मुद्दे पर भी विचार विमर्श करेगी। नपा का मानना है कि उसे प्रति नल कनेक्शन हर माह करीब 585 रुपए खर्च आता है, इसके एवज में उसे पानी के टैक्स के रूप में केवल 75 रूपए मासिक मिलता है।

तवा डैम से मिला अजनाल नदी को जल:नहर का पानी आने से हुई लबालब, शहर के 15 वार्डों में जल संकट होगा दूर
हरदा की जीवनदायिनी अजनाल नदी में एक बार फिर जान आ गई है। तवा डैम से छोड़े गए नहर के पानी ने नदी को नया जीवन दिया है। मार्च में किसानों द्वारा मूंग की फसल की सिंचाई के लिए मोटर से पानी निकालने के कारण नदी पूरी तरह सूख गई थी। इस सूखी नदी से शहर के कई वार्डों में पेयजल संकट गहरा गया था। बिरजाखेड़ी पंप इंजन से पुराने शहर में होने वाली जलापूर्ति भी प्रभावित हुई। इस पंप से रोजाना करीब 10 हजार लोगों को पानी मिलता है। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही यह जल व्यवस्था नदी के सूखने से बाधित हो गई थी। नदी में पानी कम होने से कुओं का जलस्तर भी नीचे चला गया। नगर पालिका को टैंकरों से वार्डों में पानी पहुंचाना पड़ रहा था। अब तवा डैम से नहर में छोड़े गए पानी के सीपेज से अजनाल नदी लबालब हो गई है। इससे पुराने शहर और मुख्य बाजार क्षेत्र की कॉलोनियों में रहने वाले लगभग 9 वार्डों के 10 हजार लोगों को निरंतर पानी की आपूर्ति हो सकेगी। इससे बोरिंग और अन्य जल स्रोतों का स्तर भी बढ़ेगा। नगर पालिका जल्द ही गुप्तेश्वर मंदिर के पास स्थित स्टॉप डैम पर पानी रोककर जलापूर्ति व्यवस्था को और बेहतर करेगी। जल संकट के समाधान और पानी बचाने पर नपा में बैठक आज गर्मी का सीजन शुरू होने के सा साथ ही शहर में कहीं-कहीं जलसंकट के मामले सामने आने लगे हैं। आए दिन नगर पालिका में और मंगलवार को जन सुनवाई में विभिन्न कॉलोनियों की महिलाएं और रहवासी पानी की किल्लत को लेकर पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए नपा ने पानी के प्रबंधन के संबंध में मंगलवार को शाम 5 बजे से बैठक रखी है। इसमें नपा के सभी 35 वार्डों के पार्षद, जनप्रतिनिधि और शहर के प्रबुद्ध नागरिकों को आमंत्रित किया है। बैठक में उन क्षेत्रों को चिन्हित कर समाधान पर चर्चा कर रणनीति तैयार की जाएगी, जहां पानी की परेशानी आ रही है।इसके अलावा इस बैठक में नपा जलकर बढ़ाने के मुद्दे पर भी विचार विमर्श करेगी। नपा का मानना है कि उसे प्रति नल कनेक्शन हर माह करीब 585 रुपए खर्च आता है, इसके एवज में उसे पानी के टैक्स के रूप में केवल 75 रूपए मासिक मिलता है।