रायपुर के गणपति का भव्य श्रृंगार, सोने-रत्नों से जड़ा मुकुट

रायपुर के गणपति का भव्य श्रृंगार, सोने-रत्नों से जड़ा मुकुट

रायपुर के गणपति का भव्य श्रृंगार, सोने-रत्नों से जड़ा मुकुट

रायपुर। रायपुर का गोलबाजार गणेशोत्सव इस बार भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति की ओर से भगवान गणपति का स्वर्ण श्रृंगार किया गया है। गणपति को करीब 1 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत का सोने और रत्नों से जड़ा मुकुट पहनाया गया है। इस मुकुट का वजन 750 ग्राम है।

गणपति के इस खास स्वर्ण श्रृंगार के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि देर रात के बाद भी दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम नहीं होती। यहां सुबह करीब 4 बजे तक दर्शन का सिलसिला जारी रहता है।

समिति के मुताबिक, गणपति को स्वर्ण मुकुट पहनाने की परंपरा 2018 से निभाई जा रही है। हर साल यहां बड़ी संख्या में नेता और जनप्रतिनिधि भी गणपति के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

117 साल पुराना गणेशोत्सव, व्यापारी परिवारों की चौथी पीढ़ी जुड़ी

गोलबाजार शहर के पुराने गणेशोत्सव स्थलों में शामिल है। समिति के अनुसार, इस साल यहां गणपति स्थापना के 117 साल पूरे हो रहे हैं। इतने लंबे समय से चली आ रही इस परंपरा से शहर के व्यापारी परिवारों की चौथी पीढ़ी जुड़ी हुई है।

समिति से जुड़े भाजपा नेता केदार गुप्ता ने बताया कि वे पिछले 37 साल से गणेशोत्सव की सेवा में लगे हैं। उनके अनुसार, पहले गोलबाजार में गणेशोत्सव के दौरान गुफाएं बनाई जाती थीं, लेकिन अब जगह कम होने के कारण गुफाओं की जगह झांकी तैयार की जाती है।

गणपति के साथ बालाजी, लक्ष्मी और पद्मावती के भी दर्शन

गोलबाजार के पंडाल में भगवान गणपति के साथ भगवान बालाजी, माता लक्ष्मी और मां पद्मावती की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं। सुबह से लेकर देर रात तक यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहती है।

गणपति दर्शन के साथ पंडाल में होने वाले भजन भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। भजन के दौरान श्रद्धालु झूमते और डांस करते नजर आते हैं। रात बढ़ने के साथ भी श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रहती है और सुबह करीब 4 बजे तक दर्शन का सिलसिला चलता है।

750 ग्राम सोने और रत्नों से बना है मुकुट

केदार गुप्ता ने बताया कि समिति के प्रति लोगों की आस्था काफी पुरानी है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां गणपति बप्पा से मांगी गई मुराद पूरी होती है। उन्होंने बताया कि गणपति का मुकुट 750 ग्राम सोने और रत्नों से तैयार किया गया है।

इसकी मौजूदा बाजार कीमत 1 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इसी स्वर्ण मुकुट से गणपति का श्रृंगार किया गया है। समिति की ओर से 2018 से गणपति को स्वर्ण मुकुट पहनाने की परंपरा जारी है।

मनोकामना पूरी हुई तो रिद्धि-सिद्धि के लिए भी बनेगा स्वर्ण मुकुट

समिति की ओर से भविष्य में रिद्धि-सिद्धि जी के लिए भी स्वर्ण मुकुट तैयार कराने की इच्छा जताई गई है। समिति के अनुसार, अगर किसी श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है और उनका सहयोग मिलता है तो रिद्धि-सिद्धि जी के लिए भी स्वर्ण मुकुट तैयार कराया जाएगा।

समिति के लोग इस बारे में चर्चा भी कर रहे हैं। पिछले साल किसी श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होने के बाद उन्होंने 2 किलो चांदी अर्पित की थी।

तिलक की परंपरा से जुड़ा आयोजन

समिति के सदस्यों के अनुसार, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव को लोगों को एकजुट करने और देश में एकता की भावना मजबूत करने के उद्देश्य से सार्वजनिक रूप दिया था। गोलबाजार में व्यापारी और युवा आज भी इसी भावना के साथ गणेशोत्सव मनाते हैं।

117 साल पुराने इस आयोजन में शहर की पुरानी परंपरा के साथ नई पीढ़ी की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। व्यापारी परिवारों की चौथी पीढ़ी आयोजन से जुड़ी है और युवा भी उत्सव की व्यवस्थाओं में भाग ले रहे हैं।

स्वर्ण मुकुट वाले गणपति के दर्शन को रातभर जुटे श्रद्धालु

गोलबाजार के इस ऐतिहासिक पंडाल में दर्शन के लिए शहर के साथ-साथ दूर-दूर से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सुबह से शुरू होने वाली भीड़ देर रात तक बनी रहती है। रात बढ़ने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह कम नहीं होता।

सुबह करीब 4 बजे तक श्रद्धालुओं का दर्शन के लिए पहुंचना जारी रहता है। 1 करोड़ से ज्यादा कीमत के स्वर्ण मुकुट से सजे गणपति, 117 साल पुरानी परंपरा और पंडाल में स्थापित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं इस गणेशोत्सव को खास बना रही हैं।