चांपा में बोलीं जयाप्रदा- 'अगला जन्म CG में मिले', तालियों से गूंज उठा मैदान
चांपा में बोलीं जयाप्रदा- 'अगला जन्म CG में मिले', तालियों से गूंज उठा मैदान
चांपा: कोसा नगरी चांपा के भालेराव मैदान में आयोजित भव्य दशहरा महोत्सव में फिल्म अभिनेत्री और पूर्व सांसद जयाप्रदा के अंदाज ने दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं, छत्तीसगढ़ी फिल्मों के कलाकार पद्मश्री अनुज शर्मा की गीत-संगीत से सजी प्रस्तुतियों ने उत्सव में चार चांद लगा दिए। रिमोट कंट्रोल के जरिए रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। जया प्रदा के इस कथन पर कि "मेरा अगला जन्म छत्तीसगढ़ की धरती पर हो" पूरा मैदान तालियों और जयकारों से गूंज उठा।
दशहरा उत्सव समिति चांपा की ओर से आयोजित महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं जया प्रदा को देखने और सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोग जुटे। चांपा पहुंचने पर कोसा नगरी की परंपरा के अनुरूप उन्हें कोसा की माला पहनाकर और कोसा साड़ी भेंटकर सम्मानित किया गया।
इस दौरान अभिनेत्री के साथ सेल्फी लेने और उनसे मिलने के लिए लोगों में खासा उत्साह नजर आया। कार्यक्रम में सांसद कमलेश जांगड़े, जांजगीर-चांपा विधायक व्यास कश्यप, जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, नगर पालिका अध्यक्ष प्रदीप नामदेव, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा, बिल्डर धीरेंद्र बाजपेयी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जय थवाईत, अमर सुल्तानिया, विनोद तिवारी सहित दशहरा उत्सव समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ की संस्कृति और चांपा की साड़ी की तारीफ
मंच से संबोधित करते हुए जया प्रदा ने मां शबरी की पावन धरा को प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से उनका पुराना और आत्मीय नाता रहा है। यहां की संस्कृति, सादगी और लोगों का अपनापन उन्हें हमेशा आकर्षित करता है। चांपा की कोसा साड़ी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि यहां की साड़ियां विश्वभर में प्रसिद्ध हैं और वह भी यहां से बड़ी संख्या में साड़ियां लेकर जाती हैं।
40 साल के फिल्मी सफर की साझा की यादें
जया प्रदा ने अपने चार दशक लंबे फिल्मी सफर की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि अपने करियर में करीब 240 फिल्मों में काम किया है। उनकी चर्चित फिल्मों में 'तोहफा', 'शराबी', 'मवाली' और 'कामचोर' शामिल हैं। हिंदी फिल्मों के साथ दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। अमिताभ बच्चन, जितेंद्र और ऋषि कपूर जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ काम करने के अनुभव भी साझा किए।
इस दौरान उन्होंने अपने लोकप्रिय गीतों 'गोरी हैं कलाइयां, तू लादे मुझे हरी-हरी चूड़ियां' और 'मुझे नौलक्खा मंगा दे' की पंक्तियां गुनगुनाईं तो दर्शक उत्साह से झूम उठे। उनके संबोधन और गीतों पर मैदान में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ उत्साह जताया।
अनुज शर्मा के गीतों पर देर रात तक झूमे दर्शक
पद्मश्री अनुज शर्मा ने अपनी छत्तीसगढ़ी प्रस्तुतियों से देर रात तक समां बांधे रखा। जसगीत, भक्ति गीत और लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति संगीत की धुन पर दर्शक झूमते रहे और पूरे आयोजन स्थल पर उत्साह का माहौल बना रहा।
रिमोट कंट्रोल से हुआ पुतलों का दहन
दशहरा महोत्सव के दौरान रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का रिमोट कंट्रोल से दहन किया गया। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक इस आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग भालेराव मैदान पहुंचे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पुतला दहन ने महोत्सव को यादगार बना दिया।








