यूएन में गूंजा हिमालय का मुद्दा
यूएन में गूंजा हिमालय का मुद्दा
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अपने पहले अंतरराष्ट्रीय संबोधन में वैश्विक समुदाय का ध्यान हिमालयी क्षेत्र में गहराते पर्यावरण संकट की ओर आकर्षित किया है। रैपर से राजनेता बने 36 वर्षीय बालेन शाह ने यूएन के वैश्विक मंच से एक नया दृष्टिकोण पेश करते हुए भारत और चीन के साथ मिलकर 'हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म' (Himalayan Climate Resilience Mechanism) स्थापित करने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा है।
आपदाओं का जिक्र और वैश्विक समुदाय को चेतावनी
हाल ही में नेपाल में आई भीषण और विनाशकारी आकस्मिक बाढ़ (Flash Floods) का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विश्व नेताओं को आगाह किया कि तेजी से बढ़ता वैश्विक तापमान और ग्लोबल वार्मिंग अत्यंत संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट कर रही है।
अपने भाषण में उन्होंने रेखांकित किया कि संपूर्ण हिंदू कुश हिमालयी क्षेत्र लगभग 2 अरब आबादी का जीवन आधार है। ये गगनचुंबी पर्वत श्रृंखलाएं केवल नेपाल ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राष्ट्रों के करोड़ों नागरिकों को पीने का पानी, कृषि संसाधन और आजीविका के साधन उपलब्ध कराती हैं। ऐसे में यह क्षेत्र पूरी पृथ्वी के 'लाइफ-सपोर्ट सिस्टम' का एक अभिन्न अंग है।
"ग्लेशियर और बाढ़ वीजा लगवाकर नहीं आते"
जलवायु संकट की वैश्विक प्रकृति पर बात करते हुए बालेन शाह ने अत्यंत प्रभावशाली विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां किसी राजनीतिक सीमा को नहीं मानतीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिघलते ग्लेशियर और विनाशकारी प्राकृतिक आपदाएं पासपोर्ट पर वीजा देखकर सीमा पार नहीं करतीं।
भारत और चीन के साथ त्रिपक्षीय सहयोग का रोडमैप
प्रधानमंत्री के संबोधन का सबसे मुख्य बिंदु भारत और चीन जैसे दो बड़े पड़ोसियों के साथ मिलकर काम करने की पहल रही। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के मध्य स्थित एक लैंडलॉक्ड (भू-आबद्ध) देश होने के नाते नेपाल अपनी रणनीतिक संप्रभुता और क्षेत्रीय संतुलन को सदैव सर्वोपरि रखता है।
इसी संतुलित कूटनीति का परिचय देते हुए उन्होंने तीनों देशों को एक संयुक्त फ्रेमवर्क के तहत लाने का विचार रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि नेपाल, भारत और चीन को मिलकर हिमालयी क्षेत्र की खतरनाक होती हिमनद झीलों की लगातार निगरानी करनी चाहिए।
नेपाल की मुख्य अपेक्षाएं और साझा नेटवर्क की जरूरत
नेपाल के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि तीनों देशों को मिलकर एक उन्नत और त्वरित पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) का निर्माण करना चाहिए। साथ ही, किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सीमा पार से तत्काल राहत व बचाव कार्य सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने वैश्विक नेताओं से आह्वान किया कि हिमालय को विभाजित सूचनाओं का केंद्र बनाने के बजाय अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सहयोग की एक मिसाल बनाया जाए।
पुनर्निर्माण का आर्थिक संकट और पड़ोसी देशों का आभार
यूएन के मंच पर बालेन शाह ने नेपाल में हालिया प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने देश के सड़क तंत्र, पुलों, शैक्षणिक संस्थानों, रिहाइशी इलाकों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी क्षति पहुंचाई है।
उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि नेपाल जैसे विकासशील राष्ट्र को उन पर्यावरणीय नुकसानों की भरपाई के लिए भारी कर्ज के बोझ तले दबना पड़ता है, जिनके लिए वह स्वयं जिम्मेदार भी नहीं है। इसके साथ ही, उन्होंने इस आपदा की घड़ी में त्वरित सहायता पहुंचाने के लिए भारत, चीन, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया।








