ठंड में जिला अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या:एक दिन में 270 बच्चे बीमार, आईसीयू और एसएनसीयू में 28 भर्ती

महराजगंज में ठंड का प्रकोप बच्चों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। जिला अस्पताल में रोजाना सैकड़ों बच्चे बुखार, सर्दी, खांसी, निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारियों से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में आईसीयू में 14 और नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में 27 बच्चों को भर्ती कराया गया है। जिला अस्पताल की ओपीडी में एक दिन में कुल 1090 मरीजों में से 270 बच्चे सर्दी-जुकाम और अन्य बीमारियों से पीड़ित पाए गए। सुबह 9 बजे से ही अस्पताल के पर्ची काउंटर और ओपीडी के बाहर मरीजों और तीमारदारों की लंबी कतारें देखी गईं। सुरक्षा कर्मियों को भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। झाड़-फूंक या झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में न पड़ें मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एपी भार्गव के अनुसार, तराई क्षेत्र का बदलता मौसम बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों में बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत सरकारी अस्पताल में चिकित्सक से संपर्क करें। झाड़-फूंक या झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में न पड़ें। जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर भर्ती किया जा रहा है। निजी क्लीनिक और अस्पतालों में भी मरीजों की भारी भीड़ देखी जा रही है। जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है। चिकित्सक बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर उचित दवाएं और सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं।

ठंड में जिला अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या:एक दिन में 270 बच्चे बीमार, आईसीयू और एसएनसीयू में 28 भर्ती
महराजगंज में ठंड का प्रकोप बच्चों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। जिला अस्पताल में रोजाना सैकड़ों बच्चे बुखार, सर्दी, खांसी, निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारियों से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में आईसीयू में 14 और नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में 27 बच्चों को भर्ती कराया गया है। जिला अस्पताल की ओपीडी में एक दिन में कुल 1090 मरीजों में से 270 बच्चे सर्दी-जुकाम और अन्य बीमारियों से पीड़ित पाए गए। सुबह 9 बजे से ही अस्पताल के पर्ची काउंटर और ओपीडी के बाहर मरीजों और तीमारदारों की लंबी कतारें देखी गईं। सुरक्षा कर्मियों को भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। झाड़-फूंक या झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में न पड़ें मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एपी भार्गव के अनुसार, तराई क्षेत्र का बदलता मौसम बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों में बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत सरकारी अस्पताल में चिकित्सक से संपर्क करें। झाड़-फूंक या झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में न पड़ें। जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर भर्ती किया जा रहा है। निजी क्लीनिक और अस्पतालों में भी मरीजों की भारी भीड़ देखी जा रही है। जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है। चिकित्सक बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर उचित दवाएं और सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं।