कवर्धा में सड़कों पर उतरे किसान, ट्रैक्टरों से जाम

कवर्धा में सड़कों पर उतरे किसान, ट्रैक्टरों से जाम

कवर्धा में सड़कों पर उतरे किसान, ट्रैक्टरों से जाम

रायपुर। भारतीय किसान संघ आज अपनी मांगों को लेकर पूरे प्रदेशभर में आंदोलन कर रहा है। लगभग सभी जिलों में किसान जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। कवर्धा में किसान संघ के कार्यकर्ताओं और किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ रैली निकाली। जिले में बंद बुलाकर जगह-जगह पर बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता ब्लॉक कर दिया गया है।

इस दौरान सड़क पर जाम होने से आम पब्लिश को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई राहगीर अस्पताल जा रहे थे, लेकिन प्रदर्शन के चलते उन्हें पहुंचने में परेशानी हो रही है। खेत के रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। एंबुलेंस भी जाम में फंस गई, लेकिन उन्हें रास्ता दिया गया।

कवर्धा में एक राहगीर ने कहा कि, पत्नी-बच्चे को अस्पताल ले जा रहे हैं, लेकिन सड़क जाम करके रखा गया है। जिससे हम जा नहीं पा रहे हैं। मैं भी किसान हूं। रास्ता नहीं दिया गया, तो तोड़कर जाऊंगा। एक और राहगीर ने बताया कि, छोटे बच्चे को अस्पताल ले जा रहा हूं, लेकिन फंस गया हूं।

इस प्रदर्शन के बाद किसानों मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को अपना 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपेंगे। इनकी मांगों में 1700 करोड़ बकाया भुगतान, धान खरीदी, बकाया भुगतान, समर्थन मूल्य, सिंचाई, बिजली, गन्ने के दाम, गायों के लिए गौ वंदन योजना और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दे शामिल है।

सड़क से लेकर शासन तक आंदोलन करेंगे

भारतीय किसान संघ ने कहा कि, छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन आज उसी धान उत्पादक किसान को अपनी उपज बेचने, खाद प्राप्त करने, उचित मूल्य पाने और प्राकृतिक आपदा में राहत लेने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

सरकार यदि किसानों की समस्याओं को केवल कागजों और बैठकों तक सीमित रखती है तो भारतीय किसान संघ सड़क से लेकर शासन तक निर्णायक संघर्ष करने के लिए बाध्य होगा।

₹1700 करोड़ बकाया रखकर किसानों से समृद्धि की उम्मीद क्यों?

भारतीय किसान संघ ने सरकार से मांग की है कि, साल 2022-23 की धान खरीदी की किसानों की लंबित लगभग ₹1700 करोड़ की राशि तत्काल जारी की जाए। किसानों की मेहनत की राशि वर्षों तक रोकना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

किसानों को उनकी उपज का सही फ़ायदा मिले, यह पक्का करने के लिए केंद्र सरकार से मांग की है कि धान ₹3358 प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाए, जिसमें पिछले तीन सालों में ₹258 प्रति क्विंटल सपोर्ट प्राइस में हुई बढ़ोतरी का फ़ायदा भी शामिल हो। इसके अलावा, सब्ज़ी और फल उगाने वाले किसानों को भी कृषक उन्नति योजना के दायरे में लाया जाना चाहिए।

40 किलो 700 ग्राम की कटौती बंद हो

भारतीय किसान संघ ने धान खरीदी में किसानों के साथ होने वाली कटौती पर कड़ा आक्रोश जताते हुए कहा कि, धान खरीदी में प्रति बोरी अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम ही लिया जाए। किसानों की उपज में मनमाने तरीके से अतिरिक्त वजन लेना बंद किया जाए।

संघ ने यह भी कहा कि, टोकन व्यवस्था में बड़े किसानों के लिए 5 टोकन, छोटे, सीमांत किसानों के लिए 3 और 1 टोकन की व्यवस्था की जाए, ताकि कोई भी किसान अपनी पूरी उपज बेचने से वंचित न हो।

बाढ़ से तबाह किसानों का तत्काल सर्वे और मुआवजा

हाल में आई बाढ़ से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं। भारतीय किसान संघ ने मांग की है कि सरकार तत्काल खेत-खेत सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा दे। केवल अधिकारियों की रिपोर्ट और कागजी खानापूर्ति से किसानों का नुकसान पूरा नहीं होगा।

किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने और बाजार में अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

सिंचाई परियोजनाओं को वर्षों तक लटकाना बंद करे सरकार

भारतीय किसान संघ ने अरपा-भैंसाझार सहित अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को तत्काल गति देने तथा लंबित परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने की मांग की है। संघ ने कहा कि किसानों को हर साल सूखा, अनियमित वर्षा और सिंचाई संकट का सामना करना पड़ता है, जबकि करोड़ों रुपये की सिंचाई परियोजनाएं वर्षों से फाइलों में पड़ी हैं।

गन्ना, मक्का और गेहूं उत्पादकों को भी मिले न्याय

संघ ने गन्ने के मूल्य में ₹150 प्रति क्विंटल वृद्धि कर उसे कृषक उन्नति योजना से जोड़ने, रबी सीजन में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मक्का और गेहूं की भी समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की है।

भूमि अधिग्रहण में किसानों के अधिकारों से समझौता नहीं

भारतीय किसान संघ ने भूमि अधिग्रहण के मामलों में भारतीय कृषि इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के उदयपुर डिक्लेरेशन के अनुरूप किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की है। संघ ने स्पष्ट कहा कि विकास के नाम पर किसानों की जमीन लेना आसान समझने वाली व्यवस्था अब स्वीकार नहीं की जाएगी।

15 नवंबर से 15 फरवरी तक धान खरीदी

संघ ने किसानों ने धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक तय करने की मांग है। खरीदी केंद्रों की व्यवस्था और टोकन प्रणाली में सुधार की मांग की जाएगी।

सरकार चेतावनी को गंभीरता से ले

भारतीय किसान संघ ने कहा कि, किसान सरकार का वोट बैंक नहीं, प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसान की मेहनत का पैसा रोककर, उसकी उपज का उचित मूल्य न देकर और उसकी समस्याओं को टालकर सरकार प्रदेश का विकास नहीं कर सकती।

संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि, 12 सूत्रीय मांगों पर तत्काल उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर स्पष्ट निर्णय लिया जाए और हर मांग पर समयबद्ध कार्ययोजना घोषित की जाए।

भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। प्रदेश के गांव-गांव से किसानों को संगठित कर सरकार के विरुद्ध निर्णायक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।