सिंगापुर में बढ़े नास्तिक, हिंदुओं की हिस्सेदारी भी बढ़ी

सिंगापुर में बढ़े नास्तिक, हिंदुओं की हिस्सेदारी भी बढ़ी

सिंगापुर में बढ़े नास्तिक, हिंदुओं की हिस्सेदारी भी बढ़ी

नई दिल्ली । अपनी बहुसांस्कृतिक और बहुधार्मिक पहचान के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध सिंगापुर में एक नया और महत्वपूर्ण सामाजिक-जनसांख्यिकीय बदलाव दर्ज किया गया है। 'सिंगापुर जनरल हाउसहोल्ड सर्वे' के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, बीते पांच वर्षों के दौरान देश के धार्मिक ताने-बाने में उल्लेखनीय परिवर्तन देखे गए हैं।

इस व्यापक सर्वेक्षण के निष्कर्ष बताते हैं कि जहां देश में पारंपरिक रूप से स्थापित कई मुख्य धर्मों के अनुयायियों के अनुपात में गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर हिंदू समुदाय और किसी भी धर्म का पालन न करने वाले नास्तिक लोगों के आंकड़े में बढ़ोतरी हुई है।

प्रमुख धर्मों में केवल हिंदू आबादी का बढ़ा प्रतिशत

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 15 वर्ष तथा उससे अधिक आयु वर्ग की जनसंख्या में हिंदू ही ऐसा एकमात्र मुख्य धार्मिक समूह है जिसके अनुयायियों के प्रतिशत में पिछले पांच सालों में वृद्धि दर्ज की गई है।

    वर्ष 2020: सिंगापुर की कुल आबादी में हिंदुओं का अनुपात 5.0 प्रतिशत था।
    वर्ष 2025: यह आंकड़ा बढ़कर 5.4 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो कि 0.4 प्रतिशत की शुद्ध वृद्धि दर्शाता है।

इसके विपरीत, बौद्ध, इस्लाम, ताओ और ईसाई धर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाली आबादी के अनुपात में कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 1.8 प्रतिशत की गिरावट ईसाई धर्मावलंबियों में देखी गई है, जबकि ताओ धर्म के अनुयायियों में 1.5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
तेजी से बढ़ा 'नास्तिक' वर्ग

इस सामाजिक परिवर्तन का सबसे ध्यान खींचने वाला पहलू यह है कि धर्म से दूरी बनाने वाले अथवा किसी भी संप्रदाय से खुद को न जोड़ने वाले लोगों का ग्राफ सबसे तेजी से ऊपर गया है।

    2020 में हिस्सेदारी: 20.0 प्रतिशत
    2025 में हिस्सेदारी: 23.9 प्रतिशत (3.9 प्रतिशत का उछाल)

सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर जैक चिया का मानना है कि इस नई प्रवृत्ति का सीधा अर्थ यह है कि वर्तमान में सिंगापुर का लगभग हर चौथा व्यक्ति ऐसा है जिसकी कोई निश्चित धार्मिक पहचान नहीं है।
हिंदू जनसंख्या में वृद्धि के मुख्य कारण

सर्वेक्षण रिपोर्ट में हिंदू आबादी के अनुपात में हुई इस बढ़ोतरी के पीछे दो प्रमुख वजहें बताई गई हैं:

    कुशल पेशेवरों का प्रवासन (Immigration): भारत से बड़ी संख्या में आए योग्य हिंदू पेशेवरों को सिंगापुर में रोजगार और तत्पश्चात स्थायी निवास व नागरिकता मिलना इसका एक प्रमुख कारण है।
    जन्म और मृत्यु दर का संतुलन: हिंदुओं के बीच जन्म दर 7.3 प्रति हजार और मृत्यु दर 5 प्रति हजार दर्ज की गई है। स्थानीय चीनी समुदाय की तुलना में हिंदुओं में जन्म दर अधिक और मृत्यु दर कम होना भी इस जनसांख्यिकीय बढ़त को मजबूती देता है।

अपने धर्म से जुड़े रहने की प्रवृत्ति (Retention Rate)

आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि अपने मूल धर्म को न छोड़ने और जीवनभर उसी परंपरा से जुड़े रहने के मामले में हिंदू समुदाय सबसे आगे है।

    हिंदू धर्म: 97.0 प्रतिशत हिंदू अपने मूल धर्म में ही बने रहते हैं।
    मुस्लिम समाज: 96.1 प्रतिशत रिटेंशन रेट के साथ दूसरे स्थान पर है।
    ताओ धर्म: 91.7 प्रतिशत
    बौद्ध धर्म: 79.7 प्रतिशत
    ईसाई समाज: ईसाइयों में यह दर काफी कम पाई गई है, जहां कैथोलिकों में यह 65.9 प्रतिशत और अन्य ईसाई वर्गों में मात्र 41.9 प्रतिशत ही दर्ज की गई है।