बाल संप्रेक्षण गृह हत्या मामले में धरना समाप्त
बाल संप्रेक्षण गृह हत्या मामले में धरना समाप्त
बिलासपुर। सरकंडा के नूतन चौक स्थित बाल संप्रेक्षण गृह के चौकीदार नरेंद्र खांडे की हत्या के 11 दिन बाद आखिरकार उनका शव स्वजन को सौंप दिया गया। प्रशासन की ओर से साढ़े 11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और बेटे को संविदा अथवा कलेक्टर दर पर नौकरी देने के आश्वासन के बाद स्वजन धरना समाप्त करने पर सहमत हुए। बुधवार को पुलिस की मौजूदगी में सिम्स प्रबंधन ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया गया।
सरकंडा के नूतन चौक स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में 12 जुलाई की रात बाल संप्रेक्षण विशेष गृह से चार युवकों ने फरार होने के दौरान चौकीदार नरेंद्र खांडे की हत्या कर दी थी। घटना के बाद से स्वजन और समाज के लोग शव लेने से इनकार कर धरने पर बैठ गए थे। उनकी मांग थी कि मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, पत्नी को प्रतिमाह 15 हजार रुपये पेंशन, बेटे को सरकारी नौकरी तथा बेटी की पढ़ाई और विवाह का पूरा खर्च शासन वहन करे।
धरने के दौरान आठवें दिन मृतक की पत्नी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सिम्स में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद प्रदर्शन और तेज हो गया। वहीं, पुलिस ने मामले में फरार चार युवकों में से तीन को पकड़ लिया, जबकि चौथे की तलाश जारी रही। इस बीच प्रशासन और पुलिस के अधिकारी लगातार परिजनों एवं समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत करते रहे। बाद में समाज ने अपनी मांग घटाकर 35 लाख रुपये मुआवजे की कर दी, लेकिन लंबी चर्चा और समझाइश के बाद साढ़े 11 लाख रुपये के सहायता पैकेज पर सहमति बन गई।
प्रशासन ने पांच लाख रुपये बेटी के विवाह के लिए, पांच लाख रुपये स्वेच्छानुदान मद से, एक लाख रुपये महिला एवं बाल विकास विभाग तथा 50 हजार रुपये रेडक्रास सोसायटी की ओर से देने की घोषणा की। इसके साथ ही मृतक के बेटे को संविदा अथवा कलेक्टर दर पर नौकरी उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया। समझौता होने के बाद मंगलवार देर रात धरना समाप्त कर दिया गया। बुधवार को पुलिस की मौजूदगी में सिम्स से शव स्वजन को सौंपा गया। अंतिम संस्कार के साथ 11 दिनों से जारी गतिरोध समाप्त हो गया।
यूपी-बिहार और झारखंड में डंटी पुलिस की टीम
बाल संप्रेक्षण गृह में चौकीदार की हत्या के बाद युवक उनकी बाइक लेकर फरार हो गए। फरार युवक बाइक पर कटघोरा तक गए। इसके बाद चारों अलग-अलग दिशाओं में चले गए। इधर पुलिस की टीम सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपित युवकों की तलाश कर रही थी। पुलिस ने सूचना के आधार पर सबसे पहले प्रयागराज से दिनेश राठिया को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि विशाल चौबे और अंकित सिंह एक साथ बिहार के पटना भाग निकले।
पटना में अंकित का पिता एक निजी संस्थान में काम करता है। उसने बेटे और उसके साथी को एक अस्पताल में सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी लगा दी। इसी बीच पुलिस की टीम वहां पहुंच गई। पुलिस की मौजूदगी की भनक लगते ही अंकित भाग निकला। वहीं पुलिस ने विशाल को पकड़ लिया। उससे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने आरोपित अंकित को बेंगलुरु से पकड़ लिया। अब पुलिस की टीम तीनों से कड़ाई से पूछताछ कर ही है। उनसे मिली जानकारी के आधार पर चौथे आरोपित की गिरफ्तारी की बात कही जा रही है।








