कचरे को बनाया उपयोगी संसाधन : एनआईबीएसएम विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल

कचरे को बनाया उपयोगी संसाधन : एनआईबीएसएम विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल

कचरे को बनाया उपयोगी संसाधन : एनआईबीएसएम विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल

रायपुर। स्वच्छता में सहभाग स्वच्छ भारत - विकसित भारत अभियान के अंतर्गत भाकृअनुप-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर में आज विद्यार्थियों द्वारा ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (कचरे से उपयोगी संसाधन) विषय पर विभिन्न मॉडल एवं नवाचार प्रस्तुत किए गए। बी.एससी. कृषि के विद्यार्थियों ने अपशिष्ट पदार्थों को उपयोगी उत्पादों एवं संसाधनों में परिवर्तित करने से संबंधित नवीन, व्यावहारिक एवं पर्यावरण-अनुकूल विचारों का प्रदर्शन किया।


विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मॉडलों में कचरा पृथक्करण, पुनर्चक्रण, पुनः उपयोग एवं अपशिष्ट का मूल्य संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रदर्शित किया गया। इन मॉडलों में घरेलू कचरे, कृषि अवशेषों तथा जैव-अवक्रमणीय अपशिष्ट के उपयोग से संबंधित रचनात्मक एवं उपयोगी समाधान शामिल थे। विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि वैज्ञानिक सोच, उपयुक्त तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से कचरे को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया जा सकता है।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता एवं उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन का उद्देश्य केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संसाधनों की पुनर्प्राप्ति एवं उनके सतत उपयोग पर भी ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा हमें कचरे को केवल त्याज्य पदार्थ के रूप में देखने के बजाय एक संभावित संसाधन के रूप में देखने की प्रेरणा देती है। युवा विद्यार्थियों द्वारा विकसित नवाचारपूर्ण विचार सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों को अपने विचारों को व्यावहारिक, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तथा व्यापक स्तर पर अपनाए जा सकने वाले समाधानों के रूप में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक एवं रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ सतत जीवनशैली और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर मिला। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि स्वच्छ एवं विकसित भारत के निर्माण में व्यक्तिगत सहभागिता, नवाचार और सामुदायिक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम में डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. के. के. मंडल एवं डॉ. डेज़ी बसंदराय, संयुक्त निदेशक तथा डॉ. एस. के. शर्मा एवं डॉ. के. सी. शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक उपस्थित रहे और विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मॉडलों का अवलोकन कर उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. श्रावणी सन्याल द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों के मॉडल प्रदर्शन एवं प्रस्तुतियों को सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया।