प्रयागराज में निकली अनूठी हथौड़ा बारात:दूल्हा बने हथौड़े का काजल लगाकर नजर उतारी, होली की शुरुआत
प्रयागराज में निकली अनूठी हथौड़ा बारात:दूल्हा बने हथौड़े का काजल लगाकर नजर उतारी, होली की शुरुआत
प्रयागराज की संगम नगरी में होलिका दहन की पूर्व संध्या पर एक अनूठी परंपरा 'हथौड़ा बारात' निकाली गई। केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज, चौक से शुरू हुई इस बारात में हथौड़े को दूल्हा बनाया गया। बारात में गुलाबी साफा पहने बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। संयोजक संजय सिंह ने दूल्हा बने हथौड़े का काजल लगाया। राई, नून और मिर्च से नजर उतारी और बलइयां लीं। कुरीतियों के प्रतीक कद्दू को हथौड़े से तोड़ा गया। मूसर नवाचन के बाद लालटेन से आरती उतारी गई। गाजे-बाजे, ढोल-भांगड़ा और आतिशबाजी के साथ बारात कॉलेज परिसर से निकली। यह खोवा मंडी, घंटाघर और जीरो रोड होते हुए विद्यापीठ पहुंची। बारात में घोड़े, ऊंट और हजारों लोगों ने नृत्य किया। संयोजक संजय सिंह के अनुसार, यह प्रयागराज की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने विष्णु जी के कहने पर तपस्या कर हथौड़ा बनाया। इसकी उत्पत्ति प्रयागराज में हुई। इसलिए यहां होली की शुरुआत हथौड़ा बारात से होती है। इस पारंपरिक विवाह में दूल्हा हथौड़ा होता है। बारात में चवन्नीकम, लेहड़ीबूची, छुरियल जैसे व्यंग्यपरक रूपक शामिल रहते हैं। ये सभी हास्य-व्यंग्य का अनूठा रंग भरते हैं।
प्रयागराज की संगम नगरी में होलिका दहन की पूर्व संध्या पर एक अनूठी परंपरा 'हथौड़ा बारात' निकाली गई। केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज, चौक से शुरू हुई इस बारात में हथौड़े को दूल्हा बनाया गया। बारात में गुलाबी साफा पहने बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। संयोजक संजय सिंह ने दूल्हा बने हथौड़े का काजल लगाया। राई, नून और मिर्च से नजर उतारी और बलइयां लीं। कुरीतियों के प्रतीक कद्दू को हथौड़े से तोड़ा गया। मूसर नवाचन के बाद लालटेन से आरती उतारी गई। गाजे-बाजे, ढोल-भांगड़ा और आतिशबाजी के साथ बारात कॉलेज परिसर से निकली। यह खोवा मंडी, घंटाघर और जीरो रोड होते हुए विद्यापीठ पहुंची। बारात में घोड़े, ऊंट और हजारों लोगों ने नृत्य किया। संयोजक संजय सिंह के अनुसार, यह प्रयागराज की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने विष्णु जी के कहने पर तपस्या कर हथौड़ा बनाया। इसकी उत्पत्ति प्रयागराज में हुई। इसलिए यहां होली की शुरुआत हथौड़ा बारात से होती है। इस पारंपरिक विवाह में दूल्हा हथौड़ा होता है। बारात में चवन्नीकम, लेहड़ीबूची, छुरियल जैसे व्यंग्यपरक रूपक शामिल रहते हैं। ये सभी हास्य-व्यंग्य का अनूठा रंग भरते हैं।