IAS-IPS और संयुक्त कलेक्टर की मां ने रचा इतिहास
IAS-IPS और संयुक्त कलेक्टर की मां ने रचा इतिहास
महासमुंद। उम्र के उस पड़ाव पर जब लोग पढ़ाई और एग्जाम को पीछे छोड़ देते हैं, तब महासमुंद शहर की कौशल्या देवी बंसल ने किताबें थामकर एक नई मिसाल कायम की है। आज 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (International Literacy Day) मनाया जा रहा है। 60 साल की उम्र में 8वीं और 62 साल की उम्र में 10वीं क्लास की परीक्षा पास कर ये साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
अधूरी रह गई थी पढ़ाई
कौशल्या देवी कभी नगर पालिका की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। कम उम्र में ही फैमिली की जिम्मेदारियां बढ़ गईं तो उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई। बच्चों की परवरिश, परिवार और सोशल कामों के बीच जिंदगी आगे बढ़ती रही, लेकिन मन में पढ़ाई पूरी करने की चाहत हमेशा बनी रही। जब हालात अनुकूल हुए तो उन्होंने अपना सालों पुराना सपना पूरा करने का फैसला लिया।
60 में 8वीं, 62 में 10वीं पास की
पहले उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की और 8वीं क्लास का एग्जाम दिया। 60 साल की उम्र में सक्सेस मिलने के बाद उनका हौसला और बढ़ गया। उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और 62 साल की उम्र में 10वीं का एग्जाम भी सक्सेसफुली क्लियर कर लिया।
बच्चे हैं बड़े पदों पर
उनकी ये अचीवमेंट इसलिए भी खास है क्योंकि उनके बच्चे आज अलग-अलग फील्ड में बड़ी पोस्ट पर हैं। बेटे श्रवण बंसल अपर आयुक्त जीएसटी, त्रिलोक बंसल एसपी बेमेतरा और बेटी संयुक्त कलेक्टर राजनांदगांव के पद पर काम कर रही हैं। दूसरे बेटे मनीष बंसल टिंबर बिजनेस से जुड़े हैं।
शिक्षा है आत्मविश्वास
कौशल्या देवी बंसल के लिए एजुकेशन सिर्फ सर्टिफिकेट लेना नहीं है। उनका मानना है कि पढ़ाई से सेल्फ कॉन्फिडेंस आता है और लाइफ को बेहतर तरीके से समझने की क्षमता बढ़ती है। उन्होंने बताया कि उनकी अधूरी पढ़ाई के सपने को पूरा करने में पति रमेश बंसल और बेटे श्रवण का बड़ा योगदान रहा।








