ग्रामीण की मौत केस में निलंबित SDM डहरिया की मुश्किलें बढ़ीं
ग्रामीण की मौत केस में निलंबित SDM डहरिया की मुश्किलें बढ़ीं
अंबिकापुर। बलरामपुर जिले के हंसपुर निवासी रामनरेश हत्याकांड में पुलिस ने न्यायालय के समक्ष निलंबित एसडीएम करुण डहरिया समेत चार आरोपितों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया है। करीब 200 से अधिक पन्नों के चालान में पुलिस ने तत्कालीन एसडीएम पर अवैध वसूली, अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने तथा वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं करने जैसे गंभीर आरोपों का उल्लेख किया है।
पूरक चालान भी न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा
मामले में 32 गवाहों के बयान, मोबाइल लोकेशन, काल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी शामिल किया गया है। फिलहाल सभी आरोपित न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने यह भी बताया है कि कुछ तकनीकी रिपोर्ट और दस्तावेज लंबित हैं, जिनके प्राप्त होने पर पूरक चालान भी न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
पुलिस जांच के अनुसार घटना 15 फरवरी 2026 की रात की है। तत्कालीन एसडीएम करुण डहरिया अपने सहयोगियों के साथ बाक्साइट के अवैध परिवहन की सूचना पर झारखंड सीमा क्षेत्र लुचुतघाट पहुंचे थे। विवेचना में कहा गया है कि बिना स्थानीय प्रशासन को सूचना दिए तथा बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए एक ट्रक को रोककर जब्त किया गया।
क्या है आरोप
आरोप है कि चालक और क्लीनर को जबरन वाहन से नीचे उतारकर ट्रक को निजी व्यक्तियों की मदद से हंसपुर की ओर ले जाया गया। इसी दौरान चालक और क्लीनर ने ट्रक मालिक को घटना की जानकारी दी। ट्रक को लूटे जाने के संदेह पर ग्रामीण हंसपुर नदी के पास एकत्र हो गए और ट्रक को रोक लिया। इसके बाद विवाद बढ़ गया।
पुलिस के अनुसार कुछ देर बाद तत्कालीन एसडीएम बाहरी लोगों के साथ मौके पर पहुंचे, जिनमें सुदीप यादव, मंजीत यादव और अजय प्रताप सिंह शामिल थे। पुलिस द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत चालान में उल्लेख है कि आरोपितों ने ग्रामीणों के साथ मारपीट की, जिसमें आकाश अगरिया, अजीत राम, राकेश खलखो, राजेंद्र और रुपसाय समेत कई लोग घायल हुए, जबकि रामनरेश की मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति निर्मित हो गई थी।
वसूली के चक्कर में हुई घटना, कार्रवाई विधिविरुद्ध
पुलिस ने न्यायालय को बताया है कि तत्कालीन एसडीएम करुण डहरिया द्वारा की गई कार्रवाई विधिसम्मत नहीं थी। जांच में पाया गया कि करुण डहरिया अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर झारखंड राज्य पहुंचे थे। वहां न तो स्थानीय प्रशासन को सूचना दी गई और न ही पर्याप्त सुरक्षा बल साथ रखा गया।
किन पहलुओं को किया गया शामिल
पुलिस ने आरोप पत्र में अवैध वसूली से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया है। जांच के अनुसार कार्रवाई से पहले एक मोबाइल नंबर से ट्रक मालिक को कॉल कर पैसों की मांग की जा रही थी। पुलिस ने संबंधित व्यक्ति को गवाह बनाया है। ट्रक मालिक ने अपने बयान में पहले भी पैसों की मांग किए जाने की बात कही है। विवेचना में कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को आधार बनाया गया है।
डिजिटल साक्ष्यों से आरोपितों की उपस्थिति प्रमाणित
पुलिस का दावा है कि तकनीकी साक्ष्य यह प्रमाणित करते हैं कि सभी आरोपित घटना के समय मौके पर मौजूद थे और विवाद में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। मामले में 32 गवाहों को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें प्रत्यक्षदर्शी आकाश अगरिया का कलमबंद बयान भी शामिल है। इसके अलावा घटना के समय मौके पर मौजूद लोगों के बयान भी शामिल किए गए हैं।







