16 गोलियां, मंदिर के बाहर कत्ल: ‘कैसेट किंग’ गुलशन कुमार की हत्या की डरावनी कहानी
16 गोलियां, मंदिर के बाहर कत्ल: ‘कैसेट किंग’ गुलशन कुमार की हत्या की डरावनी कहानी
मुंबई । एक छोटी सी जूस की दुकान से शुरू हुआ सफर Gulshan Kumar को भारत का ‘कैसेट किंग’ बना गया। लेकिन भक्ति संगीत को घर-घर पहुंचाने वाले इस कारोबारी की जिंदगी का अंत बेहद दर्दनाक तरीके से हुआ। साल 1997 में मुंबई के एक मंदिर के बाहर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
दिल्ली के दरियागंज इलाके में गुलशन कुमार के पिता चंद्र भान दुआ की जूस की दुकान थी। यहीं से गुलशन कुमार ने कारोबार की बारीकियां सीखीं। उस दौर में म्यूजिक रिकॉर्ड्स काफी महंगे हुआ करते थे, जिसे आम लोग खरीद नहीं पाते थे। गुलशन कुमार ने सस्ते दामों में ऑडियो कैसेट बेचने का आइडिया निकाला और इसी सोच ने उन्हें सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
उन्होंने 1983 में ‘सुपर कैसेट इंडस्ट्रीज’ की शुरुआत की, जो आगे चलकर T-Series के नाम से मशहूर हुई। भजन, फिल्मी गाने और धार्मिक संगीत को कम कीमत में लोगों तक पहुंचाकर उन्होंने म्यूजिक इंडस्ट्री में क्रांति ला दी।
धार्मिक स्वभाव के लिए भी थे मशहूर
गुलशन कुमार अपनी धार्मिक आस्था के लिए भी जाने जाते थे। वह नियमित रूप से मंदिर जाते थे और कई धार्मिक आयोजनों से जुड़े रहते थे। बिजनेस में बड़ी सफलता मिलने के बाद भी उनका जीवन काफी साधारण माना जाता था।
मीडिया रिपोर्ट्स और लेखक S. Hussain Zaidi की किताब My Name Is Abu Salem के मुताबिक, अंडरवर्ल्ड डॉन Abu Salem ने गुलशन कुमार से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी। बताया जाता है कि गुलशन कुमार ने यह रकम देने से इनकार कर दिया था। कथित तौर पर उन्होंने कहा था कि इतने पैसों में वह वैष्णो देवी में भंडारा करवा देंगे।
12 अगस्त 1997 को मुंबई के अंधेरी इलाके में एक मंदिर के बाहर गुलशन कुमार पर हमला हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। कहा जाता है कि उन्हें 16 गोलियां मारी गईं। इस हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि हत्या के बाद शूटर ने फोन लाइन चालू रखी, ताकि दूसरी तरफ मौजूद शख्स उनकी चीखें सुन सके। हालांकि इस दावे को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स में भिन्न जानकारी भी सामने आती रही है।







