क्या तमिलनाडु की सत्ता के असली 'थलापति' बनेंगे विजय?
क्या तमिलनाडु की सत्ता के असली 'थलापति' बनेंगे विजय?
नई दिल्ली । तमिल सिनेमा के दिग्गज सुपरस्टार विजय, जिन्हें प्रशंसक प्यार से 'थलापति' (कमांडर) कहते हैं, आज अपने जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा से गुजर रहे हैं। 34 साल पहले फिल्म 'नालैया थीरपू' से अपने करियर की शुरुआत करने वाले विजय का डेब्यू बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहा था। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और 'गिल्ली', 'थुप्पाकी' और 'मर्सल' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के जरिए न केवल खुद को साबित किया, बल्कि तमिलनाडु के हर घर में अपनी पहचान बनाई। अब अपनी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) के साथ वे राजनीति के असली चुनावी मैदान में उतरे हैं।
सिनेमाई पर्दे से राजनीति के मंच तक... एक सोची-समझी रणनीति
विजय का सुपरस्टार बनने का सफर रिकॉर्ड-तोड़ रहा है। साल 2004 में उनकी फिल्म 'घिल्ली' 500 मिलियन रुपये से अधिक की कमाई करने वाली पहली तमिल फिल्म बनी थी, जिसने MGR का दशकों पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था। इसके बाद 'लियो' और 'मास्टर' जैसी फिल्मों ने उन्हें सफलता के शिखर पर पहुँचा दिया। पिछले कुछ वर्षों में उनकी फिल्मों में राजनीतिक संदेशों की भरमार रही है। 'थलाइवा' की टैगलाइन "Time to Lead" से लेकर उनकी आखिरी फिल्म 'जन नायकन' (जनता का नेता) तक, विजय ने अपनी रील लाइफ छवि को रीयल लाइफ राजनेता में बदलने के स्पष्ट संकेत दिए थे।
राजनीतिक भविष्य और 2026 के ऐतिहासिक चुनाव
फरवरी 2024 में विजय ने एक साहसी फैसला लेते हुए फिल्मों से संन्यास की घोषणा की और पूरी तरह राजनीति में समर्पित हो गए। उनकी पार्टी का लक्ष्य तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के बीच एक नया विकल्प पेश करना है। 23 अप्रैल 2026 को तमिलनाडु में रिकॉर्ड 85.1% मतदान दर्ज किया गया, जिसके नतीजे आज घोषित किए जा रहे हैं। आज का परिणाम न केवल विजय का राजनीतिक भविष्य तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि क्या तमिलनाडु की जनता अपने पसंदीदा फिल्मी 'नायक' को राज्य की बागडोर सौंपने के लिए तैयार है।







