बच्चों की सेहत पर मौसम का असर:एक सप्ताह में 1121 बच्चे पहुंचे अस्पताल, 40 प्रतिशत में निमोनिया-डायरिया के लक्षण
बच्चों की सेहत पर मौसम का असर:एक सप्ताह में 1121 बच्चे पहुंचे अस्पताल, 40 प्रतिशत में निमोनिया-डायरिया के लक्षण
उन्नाव में मौसम के बदलते मिजाज ने बच्चों की सेहत को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। दिन में तेज धूप और रात में सर्द हवाओं के कारण निमोनिया और कोल्ड डायरिया के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। जिला अस्पताल के आंकड़े चिंताजनक स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं। पिछले सात दिनों में बाल रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले 1121 बच्चों में से करीब 40 प्रतिशत निमोनिया और कोल्ड डायरिया से पीड़ित पाए गए। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते दो दिनों में इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किए गए आठ बच्चों में से चार निमोनिया और दो कोल्ड डायरिया से ग्रसित थे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बूजकुमार के अनुसार, बच्चों की कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता उन्हें मौसमी बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है। चिंता का विषय यह है कि अधिकांश अभिभावक प्रारंभिक लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते, जिससे मामला जटिल हो जाता है। सावधानी बरतने की सलाह
स्थिति को और चिंताजनक बनाता है जिला अस्पताल में आईसीयू की सुविधा का अभाव। गंभीर मामलों में मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है, जो कि जानलेवा साबित हो सकता है। डॉ. अमित श्रीवास्तव ने बताया कि निमोनिया के लक्षणों में बहती नाक, खांसी, तेज बुखार, पेट दर्द और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं। चिकित्सकों ने अभिभावकों को सतर्क रहने और बच्चों में किसी भी तरह के लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की हिदायत दी है। मौसम में बदलाव और हवा में पराग कणों की अधिकता से छह साल तक के बच्चों को अधिक परेशानी होती है। छोटे बच्चों में समस्या अधिक गंभीर हो सकती है।चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों की सुरक्षा के लिए निम्न उपाय अपनाने चाहिए 1. मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं – दिन में गर्मी और रात में ठंड से बचाव के लिए हल्के गर्म कपड़े पहनाएं। 2. साफ-सफाई का ध्यान रखें – बच्चों को हाथ धोने की आदत डालें और उनकी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। 3. भोजन में पोषक तत्व शामिल करें – बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उनके आहार में फल, सब्जियां और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन दें। 4. बीमार बच्चों से दूर रखें – अगर कोई बच्चा बीमार है, तो उसे अन्य बच्चों से दूर रखें ताकि संक्रमण न फैले। 5. नेबुलाइजर का प्रयोग करें – अगर बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह से नेबुलाइजर का उपयोग करें।
उन्नाव में मौसम के बदलते मिजाज ने बच्चों की सेहत को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। दिन में तेज धूप और रात में सर्द हवाओं के कारण निमोनिया और कोल्ड डायरिया के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। जिला अस्पताल के आंकड़े चिंताजनक स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं। पिछले सात दिनों में बाल रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले 1121 बच्चों में से करीब 40 प्रतिशत निमोनिया और कोल्ड डायरिया से पीड़ित पाए गए। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते दो दिनों में इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किए गए आठ बच्चों में से चार निमोनिया और दो कोल्ड डायरिया से ग्रसित थे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बूजकुमार के अनुसार, बच्चों की कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता उन्हें मौसमी बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है। चिंता का विषय यह है कि अधिकांश अभिभावक प्रारंभिक लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते, जिससे मामला जटिल हो जाता है। सावधानी बरतने की सलाह
स्थिति को और चिंताजनक बनाता है जिला अस्पताल में आईसीयू की सुविधा का अभाव। गंभीर मामलों में मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है, जो कि जानलेवा साबित हो सकता है। डॉ. अमित श्रीवास्तव ने बताया कि निमोनिया के लक्षणों में बहती नाक, खांसी, तेज बुखार, पेट दर्द और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं। चिकित्सकों ने अभिभावकों को सतर्क रहने और बच्चों में किसी भी तरह के लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की हिदायत दी है। मौसम में बदलाव और हवा में पराग कणों की अधिकता से छह साल तक के बच्चों को अधिक परेशानी होती है। छोटे बच्चों में समस्या अधिक गंभीर हो सकती है।चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों की सुरक्षा के लिए निम्न उपाय अपनाने चाहिए 1. मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं – दिन में गर्मी और रात में ठंड से बचाव के लिए हल्के गर्म कपड़े पहनाएं। 2. साफ-सफाई का ध्यान रखें – बच्चों को हाथ धोने की आदत डालें और उनकी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। 3. भोजन में पोषक तत्व शामिल करें – बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उनके आहार में फल, सब्जियां और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन दें। 4. बीमार बच्चों से दूर रखें – अगर कोई बच्चा बीमार है, तो उसे अन्य बच्चों से दूर रखें ताकि संक्रमण न फैले। 5. नेबुलाइजर का प्रयोग करें – अगर बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह से नेबुलाइजर का उपयोग करें।