आस्था से इकोनॉमी कैसे बूस्ट होती है महाकुंभ ने दिखाया:CM योगी ने शिवालय पार्क का उदाहरण दिया, बोले- 14 करोड़ लगाकर 28 करोड़ कमाए

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा–प्रयागराज कुंभ आध्यात्मिक संगम बन चुका है। अब तक 53 करोड़ लोग मां गंगा की डुबकी लगा चुके हैं। अगले नौ दिनों तक ये उत्सव इसी रूप में चलने वाला है। कल्पना करिए ये भारत की पोंटेशियल है। यदि भारत की आस्था को सम्मान दिया गया होता तो भारत किन ऊंचाई को प्राप्त हुआ होता। मुख्यमंत्री आवास कालिदास मार्ग लखनऊ पर आयोजित मुंबई से आए युवा उद्यमियों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में शिवालिक पार्क की लागत 14 करोड़ रुपए थी। 21 दिन में इसे तैयार करने वाली संस्था ने अपनी लागत के साथ 14 करोड़ मुनाफा भी कमा लिया और इतनी ही राशि प्रयागराज नगर नगम को भी दे दिया। आप उद्यमी हैं, कल्पना कर सकते हैं कि आस्था को सम्मान दिया गया होता तो आज प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था कहां पहुंची होती। महाकुंभ की तैयारियों और प्रयागराज के इंफ्रास्ट्रक्चर पर 75000 करोड़ रुपए का खर्च हुआ है। 36 दिन में प्रयाराज में 53 करोड़ श्रद्धालु आ चुके हैं। अगले 9 दिनों में ये संख्या 60 करोड़ तक पहुंचती है तो यूपी की जीडीपी में 3 से 3.25 लाख करोड़ की अतिरिक्त बढोत्तरी होनी चाहिए। प्रयागराज महाकुंभ सहित अयोध्या और काशी विश्वनाथ का भ्रमण करने आए इन उद्यमियों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि आपको कुछ प्रमुख स्थलों को देखने का सौभाग्य मिलेगा। अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि में अभी भी काफी प्रेशर है। वहां से प्रयागराज और फिर काशी आप जाएंगे। तीनों ऐसे स्थल हैं। जहां वर्तमान में देश और दुनिया से आए श्रद्धालुजन आस्था को व्यक्त कर रहे हैं। ये अवसर है जब आप इस आयोजन के साक्षी बनने जा रहे हैं। भारत अपनी आस्था को दुनिया के सामने दिखाकर अपनी ताकत का अहसास भी करा रहा है। यूपी में 25 करोड़ की आबादी निवास करती है। मेरा सौभाग्य है कि मोदी जी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में पिछले 10 वर्षों के अंदर जो माहौल देश–प्रदेश में खड़ा हुआ। उसके फलस्वरूप पहली बार देश की आस्था को सम्मान मिल रहा है। अब भारत के अंदर उन सभी स्थलाें को फिर से मान्यता प्राप्त हुई, जिससे भारत को जाना जाता था। अयोध्या में 500 वर्षों की प्रतिषा समाप्त हुई। अयोध्या में जो श्रद्धालु आए, उसकी गिनती करना चुनौतीपूर्ण है। 2016–17 में जब यूपी में भाजपा सरकार नहीं थी, तो वहां 2.35 लाख ही श्रद्धालु एक वर्ष में आया करते थे। सिर्फ 2024 में आए श्रद्धालुओं की संख्या की 14 से 15 करोड़ थी। अयोध्या के लिए इस दौरान जो पब्लिक कंट्रीब्यूसन प्राप्त हुआ, उसका अंदाजा देख सकते हैं। राम जन्मभूमि के लिए जो पब्लिक ने चढ़ावे के रूप में 750 करोड़ का कंट्रीब्यूसन दिया। इसके अलावा वहां पर उनके किए गए खर्च से लोगों की आमदनी कई गुना बढ़ी है। इसी तरह काशी विश्वनाथ धाम बनने के पहले श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम थी। आज काफी संख्या में लोग वहां पहुंच रहे हैं। मैं परसों काशी में था। मेरी कुछ काशीवासियों से बात हुई, तो उन्होंने बताया कि हमने अपने जीवन में इतनी भीड़ कभी यहां नहीं देखी, जो पिछले डेढ़ महीने से आ रही है। आज पूरे देश के लोग प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या आ रहे हैं। प्रयागराज में 2013 में भी कुंभ था। तब कुल 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे। उस समय आयोजन 55 दिन का था। मेरी सरकार में 2019 में अर्द्धकुंभ था। उसे कुंभ के रूप में आयोजित किया था। तब 24 करोड़ आए थे। इस बार अभी तक प्रयागराज महाकुंभ की दृष्टि से देखेंगे तो 45 दिन के इस आयोजन में 36 दिन हो चुके हैं। 9 दिन अभी शेष हैं। इतने दिनों में ही 53 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज में आ चुके हैं। प्रयागराज में 700 से अधिक नियमित फ्लाइट चल रही है। 700 से अधिक नए चार्टड प्लेन यहां उतरे हैं। प्रतिदिन मेला स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। 14 हजार राज्य परिवहन का बेड़ा चल रहा है। प्रयागराज में सिर्फ 28, 29 व 30 को 3 दिन में ही 15 करोड़ लोग में आ गए थे। सरकार ने जनता के बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रयास किए हैं। प्रयागराज का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हो। संगम में जल की प्रचूर मात्रा उपलब्ध हो। कनेक्टिविटी बेहतर हो। इस पर पहले से एक्सरसाइज चल रही थी। तभी हम कामयाब हो पाए। आज भी सुबह तक 40 लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। स्टेशन, बस स्टेशन पार्किंग सब भरे हुए हैं। ये क्रम केवल आस्था को सम्मान देने का ही अभियान नहीं है। आस्था को सम्मान मिलना चाहिए। ये अच्छी बात है। पर आस्था का इकोनामी आपसेक्ट क्या है। उससे भी देखा जा सकता है। एक सज्जन ने प्रस्ताव दिया कि हम प्रयागराज में कुछ निवेश करना चाहते हैं। आस्था के अनुरूप होगा। कहां कि द्वादश लिंग की लिपिका बनाना चाहते हैं। एक मॉडल दिखाया कि इस रूप में करना चाहेंगे। कहा गया कि रॉ मटेरियल है। पुराना लोहा, स्टील, आदि होंगे। इसका इस्तेमाल कर लिपिका का निर्माण किया। उन्होंने लैंड मांगा। कहा कि पैसा हम लगाएंगे और प्राफिट में 50–50 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। 10 से 31 जनवरी ही तक 14 करोड़ कमा चुकी है। 14 करोड़ का मुनाफा नगर निगम को भी दिया। कोई और बिजनेस ऐसा है कि 21 दिन में लागत से अधिक कमा ले। ये धार्मिक आयोजन से ही संभव है। लाखों को रोजगार मिला है। मेरा अनुमान है कि ये संख्या 60 करोड़ तक पहुंचती है तो यूपी की इकोनामी तीन से सवा तीन लाख करोड़ की अतिरिक्त जीडीपी में बढोत्तरी होनी चाहिए। हमने आस्था को केवल मान लिया कि इसमें कोई ताकत नहीं है। इसका दुष्परिणाम भोगना पडा। गुलामी के कालखंड में ये बात दिमाग में डाल दिय गया कि जाे भारतीय है उसे कमतर कर आंको। इसी का दुष्परिणाम हम भोग रहे हैं। भारतीय का महत्व नहीं है। भारत के बाहर का महत्व है। यही समझाया गया। मोदी ने पहली बार अहसास कराया कि भारतीय के रूप में भारत की आस्था को यहां के उत्पाद को महत्व देकर स्वयं की महत्ता को बढ़ा सकते हैं। दूसरे की उपलब्धियों पर गौरव पर अनुभूति करने की बजाय स्वय और पूर्वजों के गौरव पर अनुभूति करेंगे तो बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। प्रयागराज आज यही बता रहा है। काशी व आयोध्या बता रहा है। कितने को रोजगार मिल रहा है। आ

आस्था से इकोनॉमी कैसे बूस्ट होती है महाकुंभ ने दिखाया:CM योगी ने शिवालय पार्क का उदाहरण दिया, बोले- 14 करोड़ लगाकर 28 करोड़ कमाए
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा–प्रयागराज कुंभ आध्यात्मिक संगम बन चुका है। अब तक 53 करोड़ लोग मां गंगा की डुबकी लगा चुके हैं। अगले नौ दिनों तक ये उत्सव इसी रूप में चलने वाला है। कल्पना करिए ये भारत की पोंटेशियल है। यदि भारत की आस्था को सम्मान दिया गया होता तो भारत किन ऊंचाई को प्राप्त हुआ होता। मुख्यमंत्री आवास कालिदास मार्ग लखनऊ पर आयोजित मुंबई से आए युवा उद्यमियों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में शिवालिक पार्क की लागत 14 करोड़ रुपए थी। 21 दिन में इसे तैयार करने वाली संस्था ने अपनी लागत के साथ 14 करोड़ मुनाफा भी कमा लिया और इतनी ही राशि प्रयागराज नगर नगम को भी दे दिया। आप उद्यमी हैं, कल्पना कर सकते हैं कि आस्था को सम्मान दिया गया होता तो आज प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था कहां पहुंची होती। महाकुंभ की तैयारियों और प्रयागराज के इंफ्रास्ट्रक्चर पर 75000 करोड़ रुपए का खर्च हुआ है। 36 दिन में प्रयाराज में 53 करोड़ श्रद्धालु आ चुके हैं। अगले 9 दिनों में ये संख्या 60 करोड़ तक पहुंचती है तो यूपी की जीडीपी में 3 से 3.25 लाख करोड़ की अतिरिक्त बढोत्तरी होनी चाहिए। प्रयागराज महाकुंभ सहित अयोध्या और काशी विश्वनाथ का भ्रमण करने आए इन उद्यमियों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि आपको कुछ प्रमुख स्थलों को देखने का सौभाग्य मिलेगा। अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि में अभी भी काफी प्रेशर है। वहां से प्रयागराज और फिर काशी आप जाएंगे। तीनों ऐसे स्थल हैं। जहां वर्तमान में देश और दुनिया से आए श्रद्धालुजन आस्था को व्यक्त कर रहे हैं। ये अवसर है जब आप इस आयोजन के साक्षी बनने जा रहे हैं। भारत अपनी आस्था को दुनिया के सामने दिखाकर अपनी ताकत का अहसास भी करा रहा है। यूपी में 25 करोड़ की आबादी निवास करती है। मेरा सौभाग्य है कि मोदी जी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में पिछले 10 वर्षों के अंदर जो माहौल देश–प्रदेश में खड़ा हुआ। उसके फलस्वरूप पहली बार देश की आस्था को सम्मान मिल रहा है। अब भारत के अंदर उन सभी स्थलाें को फिर से मान्यता प्राप्त हुई, जिससे भारत को जाना जाता था। अयोध्या में 500 वर्षों की प्रतिषा समाप्त हुई। अयोध्या में जो श्रद्धालु आए, उसकी गिनती करना चुनौतीपूर्ण है। 2016–17 में जब यूपी में भाजपा सरकार नहीं थी, तो वहां 2.35 लाख ही श्रद्धालु एक वर्ष में आया करते थे। सिर्फ 2024 में आए श्रद्धालुओं की संख्या की 14 से 15 करोड़ थी। अयोध्या के लिए इस दौरान जो पब्लिक कंट्रीब्यूसन प्राप्त हुआ, उसका अंदाजा देख सकते हैं। राम जन्मभूमि के लिए जो पब्लिक ने चढ़ावे के रूप में 750 करोड़ का कंट्रीब्यूसन दिया। इसके अलावा वहां पर उनके किए गए खर्च से लोगों की आमदनी कई गुना बढ़ी है। इसी तरह काशी विश्वनाथ धाम बनने के पहले श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम थी। आज काफी संख्या में लोग वहां पहुंच रहे हैं। मैं परसों काशी में था। मेरी कुछ काशीवासियों से बात हुई, तो उन्होंने बताया कि हमने अपने जीवन में इतनी भीड़ कभी यहां नहीं देखी, जो पिछले डेढ़ महीने से आ रही है। आज पूरे देश के लोग प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या आ रहे हैं। प्रयागराज में 2013 में भी कुंभ था। तब कुल 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे। उस समय आयोजन 55 दिन का था। मेरी सरकार में 2019 में अर्द्धकुंभ था। उसे कुंभ के रूप में आयोजित किया था। तब 24 करोड़ आए थे। इस बार अभी तक प्रयागराज महाकुंभ की दृष्टि से देखेंगे तो 45 दिन के इस आयोजन में 36 दिन हो चुके हैं। 9 दिन अभी शेष हैं। इतने दिनों में ही 53 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज में आ चुके हैं। प्रयागराज में 700 से अधिक नियमित फ्लाइट चल रही है। 700 से अधिक नए चार्टड प्लेन यहां उतरे हैं। प्रतिदिन मेला स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। 14 हजार राज्य परिवहन का बेड़ा चल रहा है। प्रयागराज में सिर्फ 28, 29 व 30 को 3 दिन में ही 15 करोड़ लोग में आ गए थे। सरकार ने जनता के बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रयास किए हैं। प्रयागराज का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हो। संगम में जल की प्रचूर मात्रा उपलब्ध हो। कनेक्टिविटी बेहतर हो। इस पर पहले से एक्सरसाइज चल रही थी। तभी हम कामयाब हो पाए। आज भी सुबह तक 40 लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। स्टेशन, बस स्टेशन पार्किंग सब भरे हुए हैं। ये क्रम केवल आस्था को सम्मान देने का ही अभियान नहीं है। आस्था को सम्मान मिलना चाहिए। ये अच्छी बात है। पर आस्था का इकोनामी आपसेक्ट क्या है। उससे भी देखा जा सकता है। एक सज्जन ने प्रस्ताव दिया कि हम प्रयागराज में कुछ निवेश करना चाहते हैं। आस्था के अनुरूप होगा। कहां कि द्वादश लिंग की लिपिका बनाना चाहते हैं। एक मॉडल दिखाया कि इस रूप में करना चाहेंगे। कहा गया कि रॉ मटेरियल है। पुराना लोहा, स्टील, आदि होंगे। इसका इस्तेमाल कर लिपिका का निर्माण किया। उन्होंने लैंड मांगा। कहा कि पैसा हम लगाएंगे और प्राफिट में 50–50 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। 10 से 31 जनवरी ही तक 14 करोड़ कमा चुकी है। 14 करोड़ का मुनाफा नगर निगम को भी दिया। कोई और बिजनेस ऐसा है कि 21 दिन में लागत से अधिक कमा ले। ये धार्मिक आयोजन से ही संभव है। लाखों को रोजगार मिला है। मेरा अनुमान है कि ये संख्या 60 करोड़ तक पहुंचती है तो यूपी की इकोनामी तीन से सवा तीन लाख करोड़ की अतिरिक्त जीडीपी में बढोत्तरी होनी चाहिए। हमने आस्था को केवल मान लिया कि इसमें कोई ताकत नहीं है। इसका दुष्परिणाम भोगना पडा। गुलामी के कालखंड में ये बात दिमाग में डाल दिय गया कि जाे भारतीय है उसे कमतर कर आंको। इसी का दुष्परिणाम हम भोग रहे हैं। भारतीय का महत्व नहीं है। भारत के बाहर का महत्व है। यही समझाया गया। मोदी ने पहली बार अहसास कराया कि भारतीय के रूप में भारत की आस्था को यहां के उत्पाद को महत्व देकर स्वयं की महत्ता को बढ़ा सकते हैं। दूसरे की उपलब्धियों पर गौरव पर अनुभूति करने की बजाय स्वय और पूर्वजों के गौरव पर अनुभूति करेंगे तो बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। प्रयागराज आज यही बता रहा है। काशी व आयोध्या बता रहा है। कितने को रोजगार मिल रहा है। आमदनी कई गुना बढ़ाने में मदद मिल रही है। बड़ा आयोजन देश व दुनिया को आर्कर्षित कर रहा है। इस पक्ष को माना होता तो विदेशी सामानों से जो भारत के मार्केट भरे होते थे वो नहीं होता। 2018 में एक जिला एक उत्पाद के रूप में मैपिंग की और उत्पाद को चिन्हित किया। उसकी डिजाइनिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग में मदद की। यूपी ने देश को एक ब्रांड दे दिया। परिणाम ये है कि लाखों को रोजगार देने में सफल रहे। दिवाली, होली, विजयदशमी सहित अन्य त्यौहारों में पहले चीन के प्रोडक्ट से भरी होती थी। वो समाप्त अब जिला उत्पाद ही लोग देते हैं। लोग घरों में रखने में गौरव की अनुभूति करते हैं। कितने बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार मिला। मुरादाबाद में पीतल का काम होता है। मेरी सरकार से पहले वहां हताशा व निराशा था। वहां पीतल से संबंधी काम बंदी की कगार पर थी। डिजाइन व मार्केट नहीं रह गया था। प्रदूषण व इंस्पेक्टर राज को कंट्रोल किया। वहां 16 से 17 हजार करोड़ रुपए के प्रोडक्ट विदेशों में निर्यात होते हैं। कारपेट वाराणसी, मिर्जापुर व भदोही में डिजाइन व मार्केट के साथ जोड़ा। 8 साल पहले बंदी की कगार पर थे। वहां 8 हजार करोड़ के सामान निर्यात होता हैं। हर जनपद का प्रोडक्ट एक नया क्रांतिकारी परिवर्तन कर आकर्षित कर रहा है। ये पहले भी था। पर ध्यान नहीं दिया गया। आज वही प्रोडक्ट सबके घर में जा रहा है। लोग सम्मान के साथ उसे ले रहे हैं। हमने नकल तो की पर अक्ल नहीं लगाई। इसका परिणाम हमें भुगतना पड़ा। आज भारत स्वयं के प्रोडक्ट व तकनीक पर विश्वास कर रहा है तो हर भारतीय उससे जुड़ रहा है। उसका लाभ भी मिल रहा है। यूपी ने 8 वर्ष में काफी प्रगति भी की है। यूपी में निवेश के प्रस्तावों को, सुरक्षा, कानून व्यवस्था को इसके साथ जोड़कर देख सकते हैं। यूपी ने इस दौरान कई रिफार्म भी किए। प्रधानमंत्री की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए हर कदम उठाए। टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया। प्रदेश इन्वेस्ट के रूप में बेहतनी डिस्टीनेशन के रूप में उभरे, इसके लिए सिंगल विंडो दिया, लैंड दिया। सुरक्षा दिया। इसका परिणाम ये है कि लोग आज यूपी में निवेश कर रहे हैं। लोगों को रोजगार मिला। नौकरी मिल रही। अलग–अलग सेक्टर में काम हुआ। पुलिस के आधुनिकीकरण पर काम हुआ। इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हुआ। प्रदेश के हर ग्राम पंचायत में पांच से छह रोजगार का सृजन किया है। गांव के ही लोगों को काम दिया। सफाई से लेकर बैंकिंग का काम दिया। कम्प्यूटर ऑपरेटर से लेकर ट्यूबल ऑपरेटर का काम गांव के लोग कर रहे हैं। गांव आत्मनिर्भर हो रहे हैं। यूपी देश के उन चुनिंदों राज्य में है। जिसमें आबादी सबसे अधिक रहती है। 65 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है। ऑर्गनाइजेशन बहुत देरी से हुआ। कानपुर देश के चार महानगरों में गिना जाता था। आज प्रदेश के महानगर एक नई दूरी तय करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सुविधाएं बढ़ाने के लिए दुगनी कोशिश की जा रही है। प्रयागराज शहर के अंदर आधुनिक सुविधा नहीं देते तो तीन दिन के अंदर 15 करोड़ की संख्या को बर्दाश्त कर पाता। कभी नहीं। पहले कुंभ हजार एकड़ क्षेत्रफल में होता था। 13 में दो हजार हुआ। हमने 10 हजार एकड़ क्षेत्रफल में किया। आरोप लगाने वाले कहते थे कि इसकी क्या जरूरत है। ये पैसा पानी में बहाया जा रहा है। कुंभ के आयोजन में 75000 करोड़ खर्च किए हैं। ये इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च हुए। कारीडोर, पुल, पुलिया, एयरपोर्ट टर्मिनल, नए घाट आदि पर खर्च हुआ। कुंभ मेले पर 1500 करोड़ रखे थे। आज वही लोग कहते हैं कि आज इतने कम जगह पर कुंभ का आयोजन क्यों किया। उनके पुराने बयान और नए बयान को देखेंगे तो हंसी आएगी कि इनका कौन सा बयान सही है। केंद्र और राज्य ने मिलकर 75 हजार करोड़ खर्च कर अगर इकोनामी में तीन लाख करोड़ की बढ़ोत्तरी हो रही है तो कौन सा निवेश बेहतर है। महाकुंभ का विरोध करने वालों से इकोनामी मेरी बेहतर होगी। इसी गति से आगे बढ़ेगी। आप मान कर चलो जो अहसास अयोध्या में होगी। अयोध्या में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है। वाराणसी, गोरखपुर, चित्रकूट, में इसी तरह के काम हुआ। अयोध्या की सड़क की चौड़ाई बढ़ाई तब भी विरोध कर रहे थे। काशी विश्वनाथ धाम का विरोध कर रहे थे। उनका काम विरोध करना है। इसके बीच रास्ता निकाल कर दूरगामी सोच के साथ काम करती है, तब परिणाम आता है। इसके लिए निर्णय आया। अयोध्या में अकेले एक साल में 750 करोड़ का चढ़ावा आया। जो विरोध करते थे। उस सड़क को चौड़ी करने की क्या जरूरत थी। अब वहीं लोग कहते हैं कि नहीं होता तो इतनी भीड़ कहां जाती। भारतीय रेलवे ने 9 स्टेशन का विस्तार किया। ये नहीं होता प्रतिदिन 5 से 7 लाख यात्री ट्रेन से आ रहे हैं। ये संभव होता। पहले से कार्ययोजना बनानी पड़ती है। तभी रिजल्ट अपेक्षा के अनुसार आते हैं। आस्था को जो सम्मान मिल रहा है। ये भारत और भारतीयता को सम्मान मिल रहा है। वो खुश हैं। मुझे लगता है कि मुंबई से आए हैं। अयोध्या के साथ प्रयागराज जाएं। भीड़ हैं, उसका भी अपना आनंद है। यही जीवन है। देखना चाहिए, जीवन की मस्ती। उनके उत्साह को देखें। अयोध्या में सरयू में डुबकी लगाया और राम जी का दर्शन किया वो कभी इस अनुभव को भूलेंगा नहीं। ऐसे ही प्रयागराज में श्रद्धालु कहीं से भी आ रहा हो, एक बार संगम में डुबकी क्या लगाई उसका जीवन धन्य हो जा रहा है। अक्षय वट के दर्शन भी करने को मिलेगा। लेटे हुए हनुमान भी हैं। मान्यता है कि वर्ष में एक बार गंगा हनुमान जी का अभिषेक करने आती है। इसके बाद जल कम होने लगता है। बड़ी मान्यता है। सरस्वती कूप भी है। मां सरस्वती के दर्शन करने हैं तो संगम में अनुभूति करेंगे, लेकिन चछु से दर्शन करने सरस्वती कूप तक जाना होगा। 12 से 14 नए कॉरीडोर बनाए हैं। शिवालिक पार्क भी जरूर देखिएंगा। एक पूंजी 21 दिन में अपनी लागत से अधिक मुनाफा कमा सकती है। वो शिवालिक पार्क में देखने को मिलेगा। आपकी यात्रा आपके लिए अविश्वमरणीय बनेगी। सवाल–प्रशांत आप सीएम के अलावा एक पीठाधीश्वर भी हैं। धार्मिक व अध्यात्मिक महत्व समझांए। सीएम–प्रयाग की अपनी महत्ता रही है। मां गंगा, यमुना व सरस्वती का संगम। राम वनवास को जाते हैं तो महर्षि भारद्वाज से हुई। लौटते समय भी प्रयागराज में उतरते हैं। प्रयागराज के ईष्ट देव भगवान बेनी माधव हैं। भगवान विष्णु का बाल रूप हैं। उन्हीं का स्वरूप अक्षयवट है। इसके बारे में मान्यता है कि ये प्रलय काल में भी रहता है। मुगल काल भी इसे नहीं नष्ट कर पाए। अभी अक्षय रूप में खड़ा है। मां सरस्वती प्रत्यक्ष रूप से कूप में किले के अंदर दिख जाएंगी। महाकंभ की अपनी अपरंपरा है। देवासुर संग्राम में युद्ध हुआ था। समुद्र मंथन की प्रक्रिया होती है। कई रत्न होती है। उसमें अमृत व विष है। चार बुंदे धरती पर गिरी थी। उसमें प्रयागराज, नासिक, उज्जैन व हरिद्वार हैं। काशी बाबा विश्वनाथ की धरती है। प्राचीनतम नगरी है। ज्ञान व आध्यात्मिक नगरी के रूप में विख्यात रही है। आज भी वो प्राचीनता मौजूद है। पीए मोदी काशी से ही देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अयोध्या मानवता की पहली भूमि है। भगवान मनु से लेकर जैनी परपरा के चार प्रमुख तीर्थंकर इसी अयोध्या में पैदा हुए थे। भगवान ऋषभदेव इसी अयोध्या में पैदा हुए। मनु की परंपरा में ही भगवान राम का जन्म होता है। मां सरयू के तट पर अयोध्या है। प्रयाराज मां गंगा, यमुना के संगम में है। काशी मां गंगा के तट पर हैं। यूपी के अंदर ये तीन अध्यात्मिक रूप से हैं। ये पूर्वी यूपी में आते हैं। पश्चिम में मथुरा वृंदावन है। भगवान कृष्ण की जन्म मथुरा में और लीला वृंदावन में हुआ। अन्य तीर्थ भी वहां हैं। जिसका विकास हो रहा है। युवा भारत संस्थान के तत्वावधान में मुंबई से पधारे युवा उद्यमी टूर पर निकला है। कुंभ और प्रदेश में हुए विकास पर अध्ययन करने ये दल निकला है। अभिनंदन–युवा भारत एक छोटी सी कल्पना है। उद्योगिक परिवार हैं। आर्थिक रूप से समाज में आगे बढ़ चुके हैं। पर भारतीय संस्कृति से जुड़ नहीं पाए हैं। युवा भारत का पहला कार्यक्रम हो रहा है। अयोध्या जाएंगे। महाकुंभ फिर काशी विश्वनाथ का दर्शन कर मुंबई लौटेंगे। हिंदू संस्कृति के बारे में किस तरह सोचना चाहिए। यूपी में मेरा अनुभव रहा है। सात स्टेट में काम करने के आधार पर बिजनेस फ्रेंडली माहौल पूरे भारत में कहीं नहीं हैं। सीएम के आशीर्वाद से यूपी में उद्योगिक काम करने का अवसर मिलता है तो सही रहेगा। लोहा जितना तपता है। उतनी ही ताकत भरता है सोने पर जितनी भी आग लगे हीरे पर जितनी धार लगे, वो और चमकता है सूरज जैसा बनना है तो सूरज जैसा जलना होगा