पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था में समस्याएं, लेकिन समग्र स्थित चुनाव के अनुकूल
पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था में समस्याएं, लेकिन समग्र स्थित चुनाव के अनुकूल
कोलकाता। चुनाव आयोग की पूरी टीम ने पश्चिम बंगाल की अपनी यात्रा के पहले दिन राजनीतिक दलों, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठकें करने के बाद सोमवार को स्वीकार किया कि कुछ क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की समस्याएँ थीं, लेकिन समग्र स्थिति चुनाव कराने के लिए अनुकूल बनी हुई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकें करने के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था के ध्वस्त होने के विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया। पीठ का विचार था कि हालांकि कुछ स्थानीय समस्याएं मौजूद थीं, लेकिन वे चुनाव के संचालन में बाधा डालने के लिए महत्वपूर्ण नहीं थीं।
बैठक के बाद आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "कुछ जगहों पर समस्याएं हो सकती हैं, जो कई राज्यों में आम है। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि स्थिति इतनी खराब है कि चुनाव नहीं कराए जा सकते।"
रविवार रात पश्चिम बंगाल पहुंची आयोग की पूर्ण पीठ ने सोमवार को राज्य के सभी 23 जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों के साथ-साथ राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। चर्चा विधानसभा चुनावों की तैयारी और शांतिपूर्ण एवं पारदर्शी मतदान प्रक्रिया सुनिश्चित करने के उपायों पर केंद्रित थी।
आयोग ने इससे पहले राज्य के आठ मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। बातचीत के दौरान, विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जतायी और सवाल किया कि क्या आयोग केवल आश्वासन देने के बजाय हिंसा मुक्त चुनाव सुनिश्चित कर पाएगा।
आयोग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। सूत्रों ने कहा कि राज्य के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा 15 या 16 मार्च के आसपास की जा सकती है।
चर्चा के दौरान मतदाता सूची के चल रहे पुनरीक्षण का मुद्दा भी सामने आया। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के हिस्से के रूप में मतदाता सूची के मसौदे में लगभग 60.6 लाख प्रविष्टियां वर्तमान में विचाराधीन हैं। इस बात पर सवाल उठाए गए कि क्या चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले इन मामलों का सत्यापन और निपटान पूरा किया जा सकता है।
आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि प्रक्रिया पूरी करने के लिए अभी भी पर्याप्त समय है। अधिकारी ने कहा, "हर दिन लगभग एक लाख मामलों का निपटान किया जा रहा है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद भी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि तक पात्र मतदाताओं को सूची में जोड़ा जा सकता है।"
अधिकारी ने यह भी बताया कि मामला वर्तमान में उच्चतम न्यायालय की जांच के अधीन है और उन्होंने उन मुद्दों पर आगे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। फिर भी, आयोग का मानना है कि भले ही चुनावों की घोषणा जल्द हो जाए, प्रक्रिया को पूरा करने के लिए लगभग एक महीने का समय बचेगा।
सोमवार की बैठक के दौरान, आयोग ने कथित तौर पर प्रशासनिक खामियों को लेकर कई अधिकारियों को फटकार भी लगाई। भारतीय रिजर्व बैंक, विमानपत्तन प्राधिकरण, उत्पाद शुल्क विभाग और नारकोटिक्स कंट्रोल एजेंसियों सहित विभिन्न एजेंसियों के अधिकारियों को भी चुनाव संबंधी निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आगाह किया गया।
सूत्रों ने कहा कि आयोग ने प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों से कहा गया कि चाहे वह जिलाधिकारी हो या पुलिस आयुक्त, खामियां पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
इसके साथ ही आयोग ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां पश्चिम बंगाल सरकार ने उसके निर्देशों का पूरी तरह से सहयोग नहीं किया था। हालांकि अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि एक बार आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद, पूरा राज्य प्रशासन चुनाव आयोग के अधिकार में आ जाएगा। एक अधिकारी ने कहा, "उस स्थिति में, सरकार आयोग के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होगी। इसलिए, चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी की तटस्थता के बारे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए।"
राज्य में केंद्रीय बलों की जल्द तैनाती पर प्रतिक्रिया देते हुए आयोग के अधिकारियों ने कहा कि यह कदम असामान्य नहीं है और अतीत में कई राज्यों में ऐसा किया जा चुका है। उन्होंने कहा, "ऐसी तैनाती मतदाताओं का विश्वास बढ़ाने और मतदाताओं के बीच सुरक्षा की भावना सुनिश्चित करने के लिए की जाती है।"
आयोग की पूर्ण पीठ मंगलवार को मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे, मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल और राज्य पुलिस तथा केंद्रीय बलों के नोडल अधिकारियों सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आयोग के अन्य सदस्यों द्वारा मंगलवार को ही नयी दिल्ली रवाना होने से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने की उम्मीद है।
पश्चिम बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।







