रायपुर: UCC को लेकर आदिवासियों के हित पर दिया भरोसा
रायपुर: UCC को लेकर आदिवासियों के हित पर दिया भरोसा
रायपुर। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। इसमें प्रदेश की आदिवासी सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखा जा रहा है। यूसीसी के प्रारूप को तैयार करने वाली समिति ने आदिवासी समाज को आश्वस्त किया है कि उनका सामाजिक ताना-बाना सुरक्षित रहेगा।
विपक्षी पार्टी कांग्रेस का कहना है कि यूसीसी लागू होने से आदिवासियों की परंपराएं समाप्त हो जाएंगी। राजधानी के न्यू सर्किट हाउस में मंगलवार को आयोजित परिचर्चा में बस्तर से सरगुजा तक के आदिवासी प्रतिनिधियों और विभिन्न आयोगों के पदाधिकारियों ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों पर अपने सुझाव दिए।
कंवर, गोंड, बैगा और उरांव जनजातियों के प्रतिनिधियों ने यूसीसी में आदिवासी समाज की पारंपरिक प्रथाओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विवाह पंजीयन, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे मुद्दों पर भी सुझाव दिए।
महिला आयोग ने भी दिया सुझाव
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉक्टर ममता साहू ने महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने भरण-पोषण के अधिकार सहित कई मुद्दों पर समान कानून की आवश्यकता पर जोर दिया।
राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन ने लोककला और जनजातीय विरासत को सुरक्षित रखने के साथ महिलाओं को वैवाहिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों में समानता देने का सुझाव दिया। यूसीसी समिति के सदस्य एमके राउत, मोहन पवार, ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े ने सभी सुझावों को दर्ज किया।








