मैक्सिको के चिया सीड्स नर्मदापुरम में उगा रहे:यूट्यूब से सीखा आधुनिक खेती का तरीका; फलदार पेड़ों से कमा रहे दोगुना मुनाफा

मैक्सिको में होने वाली चिया सीड्स की खेती अब नर्मदांचल की धरती पर भी हो रही है। नर्मदापुरम में मिसरोद के किसान प्रमोद दुबे ने चिया सीड का उत्पादन कर न केवल अपनी आय को दोगुना किया है बल्कि रोल मॉडल किसान के रूप में पहचान भी बनाई है। प्रमोद ने सोशल मीडिया से पढ़कर और यूट्यूब से देखकर चिया सीड्स की खेती का तरीका सीखा। उनकी सफलता को देखकर संभाग के दूसरे किसानों ने भी चिया सीड्स की खेती को अपनाया है। दैनिक भास्कर की स्मार्ट किसान सीरीज में आज पढ़िए, प्रमोद दुबे की सफलता की कहानी... 25 एकड़ में हो रही चिया सीड की खेती बिजली कंपनी से रिटायर्ड होने वाले 70 साल के बुजुर्ग किसान प्रमोद दुबे शौकिया तौर पर खेती करते है। 2017 में शासकीय सेवा से रिटायर्ड होने के बाद उन्होंने खेती की ओर ध्यान देना शुरू किया। 3 साल पहले उन्होंने चिया सीड्स की चार एकड़ में खेती शुरू की। पहले ही साल 4 महीने में 17 क्विंटल चिया का उत्पादन हुआ। जिसे उन्होंने 3.14 लाख रुपए में बेचा। चिया सीड्स से उन्हें पारंपारिक खेती गेहूं से ज्यादा दोगुना मुनाफा और उसमें लगने वाली लागत भी 50 फीसदी बची। मुनाफा देख किसान लगातार तीन साल से 4एकड़ में गेहूं की जगह चिया सीड्स की खेती कर रहे है। उनकी मेहनत और सफलता ने क्षेत्र के 5 से अधिक किसानों को प्रेरित किया। उन्हें देख अन्य किसान भी करीब 25 एकड़ भूमि पर चिया सीड्स की जैविक खेती कर रहे हैं। सुपरफूड के रूप में जाना जाता है चिया सीड्स चिया सीड्स को सुपर फूड के रूप में जाना जाता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन, ओमेगा-3, फैटी एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सिडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं। इन बीजों का नियमित सेवन हृदय स्वास्थ्य में सुधार, पाचन तंत्र को मजबूत करने, ऊर्जा में वृद्धि और वजन नियंत्रण में सहायक होता है। इसके अलावा, यह मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के प्रबंधन में भी मददगार है। फालूदा आइस्क्रीम में डाला जाता है चिया सीड फालूदा आइस्क्रीम में कई प्रकार की सामग्री मिलाई जाती है। जिसमें कुछ तुलसी के दाने जैसे दिखने वाले काले बीज भी डाले जाते है, जो टेस्ट में काफी अच्छे होते है। ये काले बीज चिया सीड्स होते है। यह औषधि बीज है, जो पाचन के साथ बीपी, शुगर और वजन कम करने में ज्यादा काम आते है। भारत, मप्र की मंडियों में थोक में ये 18 हजार से 30 हजार रुपए प्रति क्विंटल बिकती है। मॉल में 100 ग्राम 1000 ग्राम तक के पैकेट में बिकती है। संभाग में बनी पहचान, चिया सीड के लिए देते है प्रशिक्षण बिजली कंपनी से रिटायर्ड क्लर्क प्रमोद दुबे ने लीक से हटकर डिफरेंट खेती करने के फैसले से उनकी अलग पहचान बन गई है। उद्यानिकी विभाग और दूसरे किसानों के सामने नर्मदापुरम संभाग में चियासीड को पैदा करने वाले पहले किसान सफल रहे। उन्हें देख अब दूसरे किसान भी इसकी खेती के लिए प्रभावित हुए। किसान प्रमोद दुबे मास्टर बन उद्यानिकी विभाग द्वारा आयोजित होने वाले प्रशिक्षण में किसानों को चिया सीड्स की खेती की तकनीक के बारे में प्रशिक्षित करते हैं और वे किसानों को चिया सीड्स के बीज भी बेचते हैं। उनसे प्रभावित होकर अब जिले में करीब अलग-अलग 6 किसान 20-25 एकड़ में इसकी खेती करने लगे है। नीमच मंडी में अश्वगंधा, चियासीड देखा, फिर यूट्यूब की मदद ली किसान प्रमोद दुबे ने बताया कि मेरे परिचित नीमच में रहते है। उनके घर के सामने ही सब्जी और औषधि मंडी है। साल 2019 में रिश्तेदार के यहां नीमच गया था। चूंकि वे शौकिया तौर पर खेती करते हैं, इसलिए वे नीमच में अनाज मंडी घूमने चले गए। औषधि शेड में फसल देखते हुए उन्होंने अश्वगंधा और चिया सीड की जानकारी ली। चिया सीड्स की कीमत 18 हजार से 30 हजार रुपए क्विंटल थी। आने के बाद चिया सीड की खेती, उसके बीच की खासियत और उसके उपयोग की जानकारियां यूट्यूब से और अन्य माध्यमों से जुटाई। चिया सिड्स की खेती के लिए वहां के किसानों से बातचीत की। इसमें पता चला कि यह होशंगाबाद ( नर्मदापुरम) संभाग की जो मिट्टी और जो अबो-हवा, तापमान है, उसमें चिया सीड्स पैदा करना कोई कठिन कार्य नहीं है। मुझे लगा कि इस जानकारी के हिसाब से तिल्ली और राई की फसल की तरह इसको भी फेक विधि से बोया जा सकता है। गेहूं से दोगुना मुनाफे का ऐसे समझे गणित किसान प्रमोद दुबे ने बताया पारंपरिक खेती गेहूं से चिया सीड्स में उन्हें दोगुना मुनाफा हो रहा है। गेहूं में लगात अधिक लगती और मुनाफा कम होता है। चिया सीड्स में लागत भी कम और मुनाफा ज्यादा है। गेहूं में खरपतवार, रोग, लगते दवाई डालना पड़ता है, लेकिन इसमें रोग से बचाव के लिए दवा डालने का टेंशन नहीं होता है। जानवर भी इसे नहीं खाते है। गेहुं में प्रति एकड़ 40-45 हजार रुपए की फसल बेचते, जिसमें लागत 20-25 हजार होती और बचत 20 से 22 हजार रुपए होता है। चिया सीड में प्रति एकड़ में 72 हजार रुपए की फसल बेचते है और लागत 20 हजार रुपए आती। शुद्ध बचत 50 हजार रुपए होती है। रवि सीजन में प्रति एकड़ में दो किलो बीच लगाएं चिया सीड्स की बोवनी का अनुकूल मौसम रबी सीजन का है। बाेवनी के लिए प्रति एकड़ में डेढ़ से दो किलो किलो बीज लगता है। जिसे सिडिल या हाथों से भी फेंककर कर सकते है। इसमें तीन-चार पानी की आवश्यकता होती है। चार महीने 120 दिन की फसल होती है। इसमें ना तो कोई कीड़े लगते हैं ना कोई रोग लगता है और ना कोई जानवर इसको हानि पहुंचाते हैं। इसलिए इसमें दवा का छिड़काव नहीं होता। इस नीमच मंडी में 16 हजार से 25000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बेचा जा सकता है। खेत के मेढ़ पर लगाए फलदार पौधे किसान की सफलता के बाद उद्यानिकी विभाग ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए फलदार पौधे लगाने की भी सलाह दी और पौधे दिए। जिनमें आम, जाम, चीकू, अनार, आंवले समेत अन्य पौधे लगाए। जिन्हें उन्होंने खेत की मेढ़ पर लगाए है। जो अब करीब 4, 5फीट बड़े हो गए है। उनमें फल आने से किसान की अतिरिक्त आय बढ़ेगी।

मैक्सिको के चिया सीड्स नर्मदापुरम में उगा रहे:यूट्यूब से सीखा आधुनिक खेती का तरीका; फलदार पेड़ों से कमा रहे दोगुना मुनाफा
मैक्सिको में होने वाली चिया सीड्स की खेती अब नर्मदांचल की धरती पर भी हो रही है। नर्मदापुरम में मिसरोद के किसान प्रमोद दुबे ने चिया सीड का उत्पादन कर न केवल अपनी आय को दोगुना किया है बल्कि रोल मॉडल किसान के रूप में पहचान भी बनाई है। प्रमोद ने सोशल मीडिया से पढ़कर और यूट्यूब से देखकर चिया सीड्स की खेती का तरीका सीखा। उनकी सफलता को देखकर संभाग के दूसरे किसानों ने भी चिया सीड्स की खेती को अपनाया है। दैनिक भास्कर की स्मार्ट किसान सीरीज में आज पढ़िए, प्रमोद दुबे की सफलता की कहानी... 25 एकड़ में हो रही चिया सीड की खेती बिजली कंपनी से रिटायर्ड होने वाले 70 साल के बुजुर्ग किसान प्रमोद दुबे शौकिया तौर पर खेती करते है। 2017 में शासकीय सेवा से रिटायर्ड होने के बाद उन्होंने खेती की ओर ध्यान देना शुरू किया। 3 साल पहले उन्होंने चिया सीड्स की चार एकड़ में खेती शुरू की। पहले ही साल 4 महीने में 17 क्विंटल चिया का उत्पादन हुआ। जिसे उन्होंने 3.14 लाख रुपए में बेचा। चिया सीड्स से उन्हें पारंपारिक खेती गेहूं से ज्यादा दोगुना मुनाफा और उसमें लगने वाली लागत भी 50 फीसदी बची। मुनाफा देख किसान लगातार तीन साल से 4एकड़ में गेहूं की जगह चिया सीड्स की खेती कर रहे है। उनकी मेहनत और सफलता ने क्षेत्र के 5 से अधिक किसानों को प्रेरित किया। उन्हें देख अन्य किसान भी करीब 25 एकड़ भूमि पर चिया सीड्स की जैविक खेती कर रहे हैं। सुपरफूड के रूप में जाना जाता है चिया सीड्स चिया सीड्स को सुपर फूड के रूप में जाना जाता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन, ओमेगा-3, फैटी एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सिडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं। इन बीजों का नियमित सेवन हृदय स्वास्थ्य में सुधार, पाचन तंत्र को मजबूत करने, ऊर्जा में वृद्धि और वजन नियंत्रण में सहायक होता है। इसके अलावा, यह मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के प्रबंधन में भी मददगार है। फालूदा आइस्क्रीम में डाला जाता है चिया सीड फालूदा आइस्क्रीम में कई प्रकार की सामग्री मिलाई जाती है। जिसमें कुछ तुलसी के दाने जैसे दिखने वाले काले बीज भी डाले जाते है, जो टेस्ट में काफी अच्छे होते है। ये काले बीज चिया सीड्स होते है। यह औषधि बीज है, जो पाचन के साथ बीपी, शुगर और वजन कम करने में ज्यादा काम आते है। भारत, मप्र की मंडियों में थोक में ये 18 हजार से 30 हजार रुपए प्रति क्विंटल बिकती है। मॉल में 100 ग्राम 1000 ग्राम तक के पैकेट में बिकती है। संभाग में बनी पहचान, चिया सीड के लिए देते है प्रशिक्षण बिजली कंपनी से रिटायर्ड क्लर्क प्रमोद दुबे ने लीक से हटकर डिफरेंट खेती करने के फैसले से उनकी अलग पहचान बन गई है। उद्यानिकी विभाग और दूसरे किसानों के सामने नर्मदापुरम संभाग में चियासीड को पैदा करने वाले पहले किसान सफल रहे। उन्हें देख अब दूसरे किसान भी इसकी खेती के लिए प्रभावित हुए। किसान प्रमोद दुबे मास्टर बन उद्यानिकी विभाग द्वारा आयोजित होने वाले प्रशिक्षण में किसानों को चिया सीड्स की खेती की तकनीक के बारे में प्रशिक्षित करते हैं और वे किसानों को चिया सीड्स के बीज भी बेचते हैं। उनसे प्रभावित होकर अब जिले में करीब अलग-अलग 6 किसान 20-25 एकड़ में इसकी खेती करने लगे है। नीमच मंडी में अश्वगंधा, चियासीड देखा, फिर यूट्यूब की मदद ली किसान प्रमोद दुबे ने बताया कि मेरे परिचित नीमच में रहते है। उनके घर के सामने ही सब्जी और औषधि मंडी है। साल 2019 में रिश्तेदार के यहां नीमच गया था। चूंकि वे शौकिया तौर पर खेती करते हैं, इसलिए वे नीमच में अनाज मंडी घूमने चले गए। औषधि शेड में फसल देखते हुए उन्होंने अश्वगंधा और चिया सीड की जानकारी ली। चिया सीड्स की कीमत 18 हजार से 30 हजार रुपए क्विंटल थी। आने के बाद चिया सीड की खेती, उसके बीच की खासियत और उसके उपयोग की जानकारियां यूट्यूब से और अन्य माध्यमों से जुटाई। चिया सिड्स की खेती के लिए वहां के किसानों से बातचीत की। इसमें पता चला कि यह होशंगाबाद ( नर्मदापुरम) संभाग की जो मिट्टी और जो अबो-हवा, तापमान है, उसमें चिया सीड्स पैदा करना कोई कठिन कार्य नहीं है। मुझे लगा कि इस जानकारी के हिसाब से तिल्ली और राई की फसल की तरह इसको भी फेक विधि से बोया जा सकता है। गेहूं से दोगुना मुनाफे का ऐसे समझे गणित किसान प्रमोद दुबे ने बताया पारंपरिक खेती गेहूं से चिया सीड्स में उन्हें दोगुना मुनाफा हो रहा है। गेहूं में लगात अधिक लगती और मुनाफा कम होता है। चिया सीड्स में लागत भी कम और मुनाफा ज्यादा है। गेहूं में खरपतवार, रोग, लगते दवाई डालना पड़ता है, लेकिन इसमें रोग से बचाव के लिए दवा डालने का टेंशन नहीं होता है। जानवर भी इसे नहीं खाते है। गेहुं में प्रति एकड़ 40-45 हजार रुपए की फसल बेचते, जिसमें लागत 20-25 हजार होती और बचत 20 से 22 हजार रुपए होता है। चिया सीड में प्रति एकड़ में 72 हजार रुपए की फसल बेचते है और लागत 20 हजार रुपए आती। शुद्ध बचत 50 हजार रुपए होती है। रवि सीजन में प्रति एकड़ में दो किलो बीच लगाएं चिया सीड्स की बोवनी का अनुकूल मौसम रबी सीजन का है। बाेवनी के लिए प्रति एकड़ में डेढ़ से दो किलो किलो बीज लगता है। जिसे सिडिल या हाथों से भी फेंककर कर सकते है। इसमें तीन-चार पानी की आवश्यकता होती है। चार महीने 120 दिन की फसल होती है। इसमें ना तो कोई कीड़े लगते हैं ना कोई रोग लगता है और ना कोई जानवर इसको हानि पहुंचाते हैं। इसलिए इसमें दवा का छिड़काव नहीं होता। इस नीमच मंडी में 16 हजार से 25000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बेचा जा सकता है। खेत के मेढ़ पर लगाए फलदार पौधे किसान की सफलता के बाद उद्यानिकी विभाग ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए फलदार पौधे लगाने की भी सलाह दी और पौधे दिए। जिनमें आम, जाम, चीकू, अनार, आंवले समेत अन्य पौधे लगाए। जिन्हें उन्होंने खेत की मेढ़ पर लगाए है। जो अब करीब 4, 5फीट बड़े हो गए है। उनमें फल आने से किसान की अतिरिक्त आय बढ़ेगी।