हरदा में कृषि विशेषज्ञों ने शासन को भेजी रिपोर्ट:उप संचालक कासड़े बोले- कीटनाशकों से मिट्टी-पानी में घुल रहा जहर; स्वास्थ्य पर खतरा
हरदा में कृषि विशेषज्ञों ने शासन को भेजी रिपोर्ट:उप संचालक कासड़े बोले- कीटनाशकों से मिट्टी-पानी में घुल रहा जहर; स्वास्थ्य पर खतरा
हरदा में मूंग की खेती से किसानों की आय तो बढ़ रही है, लेकिन इससे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियां सामने आ रही हैं। किसान हर 10 दिन में कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं। इससे मिट्टी और पानी में जहरीले तत्व घुल रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों ने शासन को एक चिंताजनक रिपोर्ट भेजी है। इसमें बताया गया है कि कीटनाशकों का अनियंत्रित प्रयोग जमीन और मानव शरीर के लिए खतरनाक है। फसल पकने पर सुखाने के लिए खतरनाक निंदानाशक का प्रयोग किया जाता है। इससे उपज और अधिक जहरीली हो जाती है। कृषि उप संचालक- तंत्रिका तंत्र को हो रहा नुकसान
कृषि उप संचालक जवाहरलाल कासड़े के अनुसार, किसान फसल को जल्दी सुखाने के लिए पैराकाट और ग्लाइफोसेट का अंधाधुंध उपयोग करते हैं। ये रसायन मानव के साथ-साथ पशु-पक्षियों और मछलियों के तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। ह्दय संबंधी समस्याओं का खतरा
ग्लाइफोसेट पौधों में आवश्यक अमीनो एसिड के उत्पादन को रोककर उन्हें नष्ट कर देता है। ये मिट्टी और पानी में लंबे समय तक रहता है। इससे कृषि के लिए लाभदायक सूक्ष्मजीवों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इन रसायनों के संपर्क में आने से पाचन और श्वसन संबंधी समस्याएं, आंखों में जलन, त्वचा में परेशानी और अस्थमा जैसी बीमारियां हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि अगर इसे निगल लिया जाए तो गले में जलन, दर्द, मितली और दस्त हो सकते है। इसके संपर्क में आने से गंभीर चयापचय अम्लरक्तता हाइपर कैलेमिया और ह्दय संबंधी समस्याएं हो सकती है।
हरदा में मूंग की खेती से किसानों की आय तो बढ़ रही है, लेकिन इससे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियां सामने आ रही हैं। किसान हर 10 दिन में कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं। इससे मिट्टी और पानी में जहरीले तत्व घुल रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों ने शासन को एक चिंताजनक रिपोर्ट भेजी है। इसमें बताया गया है कि कीटनाशकों का अनियंत्रित प्रयोग जमीन और मानव शरीर के लिए खतरनाक है। फसल पकने पर सुखाने के लिए खतरनाक निंदानाशक का प्रयोग किया जाता है। इससे उपज और अधिक जहरीली हो जाती है। कृषि उप संचालक- तंत्रिका तंत्र को हो रहा नुकसान
कृषि उप संचालक जवाहरलाल कासड़े के अनुसार, किसान फसल को जल्दी सुखाने के लिए पैराकाट और ग्लाइफोसेट का अंधाधुंध उपयोग करते हैं। ये रसायन मानव के साथ-साथ पशु-पक्षियों और मछलियों के तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। ह्दय संबंधी समस्याओं का खतरा
ग्लाइफोसेट पौधों में आवश्यक अमीनो एसिड के उत्पादन को रोककर उन्हें नष्ट कर देता है। ये मिट्टी और पानी में लंबे समय तक रहता है। इससे कृषि के लिए लाभदायक सूक्ष्मजीवों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इन रसायनों के संपर्क में आने से पाचन और श्वसन संबंधी समस्याएं, आंखों में जलन, त्वचा में परेशानी और अस्थमा जैसी बीमारियां हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि अगर इसे निगल लिया जाए तो गले में जलन, दर्द, मितली और दस्त हो सकते है। इसके संपर्क में आने से गंभीर चयापचय अम्लरक्तता हाइपर कैलेमिया और ह्दय संबंधी समस्याएं हो सकती है।