PoK में हिंसा की आग, झड़पों में 30 की मौत
PoK में हिंसा की आग, झड़पों में 30 की मौत
नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों को लेकर सुलग रही चिंगारी ने अब एक भीषण हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है। क्षेत्र में नागरिक समाज संगठन और सुरक्षा बलों के बीच हुई आमने-सामने की खूनी झड़प में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जबकि लगभग 200 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे इलाके में तनाव चरम पर है।
प्रतिबंध के बाद भड़का जन-आक्रोश
इस ताजा और अभूतपूर्व हिंसा की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तानी अधिकारियों ने क्षेत्र के एक प्रमुख नागरिक अधिकार संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। यह संगठन लंबे समय से पीओके में बढ़ती महंगाई, आर्थिक बदहाली और राजनीतिक अधिकारों के हनन के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों की कमान संभाल रहा था। प्रतिबंध की घोषणा के बाद से ही स्थानीय नागरिकों में सरकार के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा।
मोर्चरी के बाहर हिंसक झड़प और पेट्रोल बम
स्थानीय पुलिस प्रशासन के मुताबिक, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के सैकड़ों कार्यकर्ता एक स्थानीय अस्पताल के शवगृह (मोर्चरी) के बाहर एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारी वहां अपने एक साथी का शव लेने पहुंचे थे, जिसकी कथित तौर पर पुलिस की गोलीबारी में मौत हो गई थी। जब सुरक्षा बलों ने इस उग्र भीड़ को हटाने और तितर-बितर करने का प्रयास किया, तो दोनों पक्षों के बीच हिंसक टकराव शुरू हो गया। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए ऑटोमैटिक राइफलों, पत्थरों और पेट्रोल बमों का खुलकर इस्तेमाल किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में इतनी बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए।
शरणार्थियों के लिए सीट आरक्षण का विरोध
इस बड़े विवाद और राष्ट्रव्यापी हड़ताल की मुख्य वजह आगामी चुनाव हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने क्षेत्र की लेजिस्लेटिव बॉडी (विधायिका) के लिए आगामी 27 जुलाई को होने वाले चुनावों का पूरी तरह बहिष्कार करते हुए चक्का जाम का आह्वान किया है। दरअसल, सरकार ने विधानसभा की 45 सीटों में से 12 सीटें रिफ्यूजियों (शरणार्थियों) के लिए आरक्षित करने का फैसला किया है, जिसे स्थानीय लोग अपने राजनीतिक अधिकारों का हनन मान रहे हैं और इसी के विरोध में वे सड़कों पर उतर आए हैं।
मानवाधिकारों के हनन पर भारत का कड़ा रुख
पीओके में जारी इस कत्लेआम और पुलिसिया बर्बरता पर भारत सरकार ने बहुत सख्त प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तान की ओर से इस मामले में लगातार भ्रामक खबरें और फर्जी वीडियो फैलाए जा रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह अपनी आंतरिक नाकामियों पर पर्दा डालने और वहां हो रहे मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन से दुनिया का ध्यान भटकाने की पाकिस्तान की एक हताश और नाकाम कोशिश है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जिस तरह निर्दोष नागरिकों पर पुलिसिया दमन चक्र चलाया जा रहा है, उसे देखते हुए वैश्विक शक्तियों को आगे आना चाहिए और पाकिस्तान को उसके इस बर्बर कृत्य व मानवाधिकारों के लगातार उल्लंघन के लिए विधिक रूप से जवाबदेह ठहराना चाहिए।







