भारत-नेपाल सीमा विवाद पर बड़ा बयान, पीएम बालेन शाह के खुलासे से सियासत गरमाई

भारत-नेपाल सीमा विवाद पर बड़ा बयान, पीएम बालेन शाह के खुलासे से सियासत गरमाई

भारत-नेपाल सीमा विवाद पर बड़ा बयान, पीएम बालेन शाह के खुलासे से सियासत गरमाई

नई दिल्ली । नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह (PM Balen Shah) ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। नेपाल की राजधानी काठमांडू लंबे समय से भारत पर नेपाली भूमि पर अतिक्रमण (India Nepal Border Dispute) करने के आरोप लगाती रही है, लेकिन इस बार प्रधानमंत्री शाह ने दावा किया कि नेपाल ने भी कुछ भारतीय क्षेत्रों पर कब्जा कर रखा है।

दक्षिण एशियाई देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने 35 वर्षीय बालेन शाह ने संसद के मौजूदा सत्र के दौरान अपने पहले संबोधन में यह बात कही। उन्होंने स्वीकार किया कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी से जुड़ा सीमा विवाद दोनों देशों के संबंधों में एक संवेदनशील विषय बना हुआ है।

विशेषज्ञों की मदद से समाधान का सुझाव

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि सीमा विवाद को हल करने के लिए दोनों देशों को इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और अन्य विशेषज्ञों की सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत और नेपाल को मित्र देशों की तरह तथ्यों के आधार पर बातचीत कर इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए।

अपने संबोधन में शाह ने यह भी बताया कि नेपाल ने इस सीमा विवाद का मुद्दा चीन और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के समक्ष भी उठाया है। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि नेपाल कथित रूप से किन भारतीय क्षेत्रों पर कब्जा किए हुए है।
संसद में क्या बोले बालेन शाह

11 मई से शुरू हुए संसद सत्र में पहली बार बोलते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें एक ऐसा तथ्य पता चला जिसने उन्हें भी आश्चर्यचकित कर दिया। उनके अनुसार, भारत द्वारा नेपाली क्षेत्र पर अतिक्रमण के आरोपों के अलावा नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारतीय भूमि पर कब्जा कर रखा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को तथ्यों का गहन अध्ययन कर सौहार्दपूर्ण माहौल में इस विवाद का समाधान तलाशना चाहिए।
नई ऑनलाइन कस्टम व्यवस्था से सीमा पर बढ़ीं परेशानियां

इसी बीच नेपाल सरकार ने भारत से नेपाल आने वाले वाहनों के लिए नई ऑनलाइन "टेम्परेरी इम्पोर्ट ऑफ व्हीकल (TIV)" प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था के तहत भारतीय वाहनों को नेपाल में प्रवेश से पहले वाहन संबंधी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी होती है और कस्टम शुल्क भी डिजिटल माध्यम से जमा करना पड़ता है। इसके बाद वाहन मालिक को एक QR कोड जारी किया जाता है, जिसे सीमा पर दिखाकर प्रवेश मिलता है।
लंबी कतारें और तकनीकी समस्याएं बनी चुनौती

सरकार का उद्देश्य सीमा पर भीड़ और प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना था, लेकिन फिलहाल स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। तकनीकी सहायता की कमी और डिजिटल प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण सीमा चौकियों पर लंबी कतारें लग रही हैं।

यात्रियों और छोटे कारोबारियों को कई घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई मामलों में लोगों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए दलालों की मदद लेने की नौबत आ रही है। ऐसे में नेपाल सरकार की नई डिजिटल व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।