अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप इकाईयों के लिए एक हजार करोड़ रूपये का कोष बनेगा

अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप इकाईयों के लिए एक हजार करोड़ रूपये का कोष बनेगा

अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप इकाईयों के लिए एक हजार करोड़ रूपये का कोष बनेगा

 नयी दिल्ली । सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप इकाईयों को प्रोत्साहित करने के लिये एक हजार करोड़ रुपये का उद्यम पूंजी कोष बनाने का निर्णय लिया है।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में गुरूवार को यहां हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बाद में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस कोष का गठन इन- स्पेस संगठन के अंतर्गत किया गया है। सरकार ने 2020 के अंतरिक्ष सुधार कार्यक्रम के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी और इस क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इन- स्पेस का गठन किया था।  इस कोष का लक्ष्य भारत को रणनीतिक रूप से अग्रणी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है। एक हजार करोड़ रूपये का कोष पांच वर्षों के लिए होगा और हर वर्ष के लिए 150 से 250 करोड़ रूपये की राशि निर्धारित होगी। वर्ष 2025-26 के लिए यह राशि 150 करोड़, 26-27 के लिए 250 करोड़, 27-28 के लिए 250 करोड़ , 28-29 के लिए 250 करोड़ और 2029-30 के लिए 100 करोड़ होगी।  इसके अलावा अगले दस वर्षों में भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के पांच गुना विस्तार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए निजी अंतरिक्ष उद्योग के विकास में तेजी लाना और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में प्रगति को बढ़ावा देना तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से भारत के नेतृत्व को मजबूत करना। इसके साथ साथ इससे वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिलेगा और भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा और देश में रोजगार के अवसर बढेंगे।  इससे व्यवसायों को विस्तार करने, अनुसंधान एवं विकास में निवेश करने और अपने कार्यबल का विस्तार करने में मदद मिलेगी। प्रत्येक निवेश इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर विकास, डेटा विश्लेषण और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सैकड़ों प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा कर सकता है, साथ ही आपूर्ति श्रृंखला, लॉजिस्टिक्स और पेशेवर सेवाओं में हजारों अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा कर सकता है। एक मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देकर, यह कोष न केवल नौकरियां पैदा करेगा बल्कि एक कुशल कार्यबल भी विकसित करेगा, नवाचार को बढ़ावा देगा और अंतरिक्ष बाजार में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा।